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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से आएंगे क्रांतिकारी बदलाव: राज्यपाल आनंदी बेन पटेल
Sat, 01 Aug 2020 05:13 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 01 Aug 2020 05:13 PM IST
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
- फोटो : amar ujala
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राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति केंद्र सरकार की सराहनीय पहल है। इससे शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। कक्षा एक से लेकर कक्षा पांच तक अनिवार्य रूप से मातृभाषा व स्थानीय भाषा में पढ़ाई से बच्चों का तेजी से बौद्धिक विकास होगा।
छात्रों को पहले से तय विषय चुनने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। अब भौतिकी विज्ञान का छात्र चाहे तो संगीत या इतिहास को दूसरे विषय के रूप में चुन सकता है। बोर्ड परीक्षाओं का तनाव भी खत्म कर दिया है। राज्यपाल ने कहा कि बदलती जरूरतों के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बदलाव की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
नई शिक्षा नीति का उद्देश्य प्राथमिक स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक पाठ्यक्रमों में बदलाव करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के लिए प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार करना है। आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता वर्ष 2030 तक सौ प्रतिशत युवा और प्रौढ़ साक्षरता दर हासिल करना है।
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छात्रों को पहले से तय विषय चुनने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। अब भौतिकी विज्ञान का छात्र चाहे तो संगीत या इतिहास को दूसरे विषय के रूप में चुन सकता है। बोर्ड परीक्षाओं का तनाव भी खत्म कर दिया है। राज्यपाल ने कहा कि बदलती जरूरतों के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बदलाव की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
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नई शिक्षा नीति का उद्देश्य प्राथमिक स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक पाठ्यक्रमों में बदलाव करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के लिए प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार करना है। आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता वर्ष 2030 तक सौ प्रतिशत युवा और प्रौढ़ साक्षरता दर हासिल करना है।
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भारत उच्च शिक्षा आयोग’ का किया जाएगा गठन
उच्चतर शिक्षा में वर्ष 2035 तक सकल नामांकन अनुपात बढ़ाकर कम से कम 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। उच्च शिक्षा में एक मजबूत अनुसंधान संस्कृति तथा अनुसंधान क्षमता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन बनाने का निर्णय किया गया है।
चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर समस्त उच्च शिक्षा के लिए ‘भारत उच्च शिक्षा आयोग’ का गठन किया जाएगा। देश में वैश्विक मानकों के सर्वश्रेष्ठ बहु-विषयक शिक्षा के मॉडलों के रूप में आईआईटी, आईआईएम के समकक्ष ‘बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का निर्णय किया गया है।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा नीति में महामारी एवं वैश्विक महामारी को देखते हुए ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार न आ पाने या विद्यार्थियों के कौशल विकास की दिशा में अपेक्षित नतीजे न आ पाने की बड़ी वजह शिक्षकों का नवोन्मेषी और नई जरूरतों के हिसाब से तैयार न होना रहा है। नई शिक्षा नीति में इस पर ध्यान दिया गया है।
चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर समस्त उच्च शिक्षा के लिए ‘भारत उच्च शिक्षा आयोग’ का गठन किया जाएगा। देश में वैश्विक मानकों के सर्वश्रेष्ठ बहु-विषयक शिक्षा के मॉडलों के रूप में आईआईटी, आईआईएम के समकक्ष ‘बहु-विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का निर्णय किया गया है।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा नीति में महामारी एवं वैश्विक महामारी को देखते हुए ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार न आ पाने या विद्यार्थियों के कौशल विकास की दिशा में अपेक्षित नतीजे न आ पाने की बड़ी वजह शिक्षकों का नवोन्मेषी और नई जरूरतों के हिसाब से तैयार न होना रहा है। नई शिक्षा नीति में इस पर ध्यान दिया गया है।