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ग्राम समाज की जमीन से हटेंगे कब्जे, सरकारी भूखंड पर कब्जे का होगा खुलासा

Sun, 05 Jul 2020 05:47 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 05 Jul 2020 05:47 PM IST
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Goverment plots will be taken back in Uttar Pradesh.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

ग्रामीण क्षेत्रों में घर के अगल-बगल की ग्राम समाज की जमीन का अपनी पैतृक संपत्ति की तरह उपयोग कर रहे गांव वालों को कब्जा छोड़ना होगा। तालाब, खलिहान व सार्वजनिक उपयोग की अन्य जमीन पर भी कब्जेदारी का स्थायी मोह छोड़ना होगा।

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केंद्र के सहयोग से शुरू हो रही स्वामित्व योजना में ग्रामीण आबादी के अंतर्गत सरकारी व निजी परिसंपत्तियों को अलग-अलग चिह्नांकित कर डिजिटल अभिलेख तैयार किया जाएगा। ग्रामीणों को इसका प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इससे वे अपने मकान व आबादी के भूखंड पर भी बैंक ऋण ले सकेंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम लोग घर के बगल के ग्राम समाज, खलिहान, सड़क, तालाब, नाले व सार्वजनिक उपयोग की अन्य जमीन को अपनी निजी संपत्ति की तरह उपयोग कर रहे हैं। दशकों पुराने तालाबों को पाटकर कब्जे कर लिए। कई जगह स्थायी या अस्थायी निर्माण कर लिए गए हैं। कागज में अब भी सार्वजनिक भूखंड व तालाब उपलब्ध हैं, लेकिन जमीन पर उनका अता-पता नहीं है।
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इस तरह के तमाम भूमि विवाद भी चल रहे हैं। स्वामित्व योजना से ग्राम समाज के भीतर सरकारी भूखंड पर ऐसे कब्जों की पोल खुलने जा रही है। सभी जिलों को निर्देश भेज दिए गए हैं। बाराबंकी में पायलट प्रोजेक्ट शुरू भी हो चुका है।

पहले चरण में 54,022 गांव स्वामित्व योजना में शामिल

प्रदेश सरकार ने पहले चरण में 54,022 गांवों को स्वामित्व योजना में शामिल किया है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आबादी क्षेत्रों का सर्वेक्षण ड्रोन तकनीक से होगा। जिलास्तर पर डीएम के अलावा राजस्व परिषद व शासन स्तर पर नियमित रूप से इसकी प्रगति की मॉनिटरिंग की जाएगी।

ग्राम पंचायत को लाभ संपत्ति विवाद से मुक्ति
- अपने क्षेत्राधिकार में संपत्ति धारण करने वालों की नवीनतम जानकारी उपलब्ध होगी। इससे विकास योजना बनाने में मदद मिलेगी।
- निजी व ग्राम समाज के बीच भूमि विवाद में कमी आएगी। प्रत्येक संपत्ति की सीमा व क्षेत्रफल सुनिश्चित होने से निजी संपत्ति के विवाद भी कम होंगे।

...और ग्रामीणों को ये लाभ
- प्रत्येक संपत्ति धारक को संपत्ति का प्रमाणपत्र व भूमि स्वामित्व प्राप्त होगा।
- सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति का स्थानीय लोग समान तरीके से उपयोग कर सकेंगे।

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