डॉक्टरों ने बताया ब्रेनडेड लेकिन मरने के बाद ऐसे जी गया ये शख्स
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सड़क हादसे में बुरी तरह घायल एक शख्स के होश में आने की जब सारी उम्मीदें टूट गईं तो डॉक्टरों की सलाह पर एक अहम फैसला लिया गया। मरने के बाद भी गोरखपुर का सुंदर तीन लोगों में जी रहा है। पढ़िए मरने के बाद अमर होने वाले सुंदर की कहानी...
सड़क हादसे में बुरी तरह से घायल गोरखपुर निवासी सुंदर की सांसें तो चल रही हैं, लेकिन वह कभी होश में नहीं आएगा, कुछ इस तरह 27 जुलाई की शाम केजीएमयू के डॉक्टरों ने उसके ब्रेनडेड होने की जानकारी बड़े भाई धर्मेन्द्र को दी।
बताया कि जब तक वेंटीलेटर पर है, तब तक उसकी सांसें चल रही हैं। यदि परिवार चाहे तो उसके अंगदान से पांच लोगों को जिंदगियां संवारी जा सकती हैं। छोटे भाई के ब्रेनडेड होने की खबर ही सदमे से कम नहीं थी, ऐसे में अंगदान का फैसला इतना आसान नहीं था।
फिर भी बड़े भाई ने कलेजा मजबूत किया और अंगदान की अनुमति दे दी। परिवारीजनों की मंजूरी मिलते ही केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम ने कैडबर से अंग निकालने की सूचना तत्काल पीजीआई लखनऊ और दिल्ली के अपोलो अस्पताल को दी।
वहां से अनुमति मिलते ही ट्रैफिक पुलिस से ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने को कहा गया। दूसरी तरफ सर्जरी कर अंग निकाले गए। किडनी एसजीपीजीआई और लिवर चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से दिल्ली के अपोलो अस्पताल के लिए रवाना किया गया।
धर्मेन्द्र ने बताया कि सुंदर 24 जुलाई को घर के कुछ काम के लिए बाइक से निकला था, जब वह सड़क हादसे का शिकार हुआ था। दो प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद 25 जुलाई को तड़के पांच बजे उसे केजीएमयू के ट्रामासेंटर लेकर पहुंचे थे परिवारीजन।
अंगदान के बारे में सोचकर बैठ गया कलेजा
डॉक्टरों ने बताया कि ब्रेन डेड मतलब अब सुंदर की सांसें वेंटिलेटर के सहारे चलेंगी। वेंटिलेटर हटाते ही उसकी जिंदगी की डोर हमेशा के लिए टूट जाएगी।
धर्मेन्द्र बोला, डॉक्टरों ने बताया कि यह दुखद है कि तुम्हारा भाई अब वापस नहीं लौटेगा, लेकिन वह अमर हो सकता है। उसके किडनी, लिवर और कॉर्निया पांच मरीजों को नई जिंदगी दे सकते हैं।
धर्मेन्द्र ने बताया कि मां भाग्यावनी देवी और अन्य रिश्तेदारों से बात की तो उन्होंने भी अंगदान की अनुमति दे दी। जब सुंदर का शव अंगदान के बाद ओटी से बाहर निकला तो भाई धर्मेन्द्र सिंह, जय सिंह और दोस्त सागर फफक रो पड़े।
डॉक्टरों व स्टाफ के साथ अन्य लोगों ने उनको संभाला लेकिन जिगर के टुकड़े भाई को हमेशा के लिए खो देने का दर्द जब आंखों से छलका तो हर किसी का कलेजा फट गया। शताब्दी अस्पताल में मौजूद हर सख्श की आंखें गमजदा थीं।
अंगदान कराने वाली केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम
केजीएमयू के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता और के डॉ. परवेज, डॉ. मनमीत सिंह, डॉ. साकेत कुमार, डॉ. प्रदीप जोशी और डॉ. विशाल गुप्ता की टीम ने ऑपरेशन सुंदर का आगाज सुबह नौ बजे शुरू किया। करीब दस बजे तक सुंदर के शरीर से किडनी, लिवर और कॉर्निया निकाल लिया गया।
बीए की परीक्षा देने आया था सुंदर
धर्मेद्र ने बताया कि वह गुजरात के बलसाड़ में कपड़े का कारोबार करता है, जबकि सुंदर कोल्डड्रिंक शॉप चलाता था। धर्मेंद्र सात भाइयों में तीसरे नंबर का था। अंगदान और अन्य सभी तरह की प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिवारीजन शव लेकर चले गए।
धर्मेंद्र ने बताया कि सुंदर तीन साल पहले गुजरात गया था। वह पुलिस में भर्ती होना चाहता था। इस बार उसने बीए का फॉर्म भरा था। कुछ दिन पहले ही वह प्रथम वर्ष की परीक्षा देने गांव आया था।
25 जुलाई को आखिरी पेपर था। 26 को वापसी का रिजर्वेशन था, लेकिन इसके दो दिन पहले ही यह घटना हो गई। धर्मेंद्र ने बताया कि सुंदर सात भाइयों और एक बहन में सबसे होशियार और मिलनसार था।
बड़े भाई ने बताया कि सुंदर हमेशा के लिए अलविदा कह गया लेकिन जाते-जाते एक पहचान दे गया। उसने पांच लोगों को नई जिंदगी दी है। धर्मेंद्र ने बताया कि उसके होश में आने की कोई आस नहीं थी।
डॉक्टरों ने अंगदान के बारे में बताया तो लगा कि भाई तो नहीं रहा लेकिन एक फैसला उसे हमेशा हमारे बीच रखेगा। पांच परिवारों को मिली खुशी शायद हमारा गम कम कर दे।
इस तरह के फैसले लेने की जरूत है क्योंकि जो शरीर ब्रेन डेड होने के बाद ठीक नहीं हो सकता। उसके अंगों से दूसरों को जिंदगी मिल जाए इससे अच्छी बात क्या होगी?
इन्हें मिली नई जिंदगी
सुंदर का लिवर आगरा निवासी 61 वर्षीय बुजुर्ग में प्रत्यारोपित किया गया है। बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे लिवर अपोलो पहुंच चुका था। दोपहर दो बजे दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट शुरू किया।
शाम सात बजे प्रत्यारोपण पूरा हुआ। केजीएमयू से लिवर लेकर दिल्ली गए डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता और अपोलो के डॉ. सुभाष गुप्ता ने बताया कि लिवर प्रत्यारोपण के बाद अब मरीज पूरी तरह ठीक है और किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है।
पीजीआई के निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि पीजीआई भेजी गई दो किडनी में से एक सीतापुर की (30) वर्षीय महिला को लगाई गई। जबकि दूसरी किडनी बाराबंकी के (18) वर्षीय एक युवक को लगाई गई।
डॉ. कपूर ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट शाम करीब चार बजे शुरू हुआ और रात बारह बजे तक चला। डॉ. अनीस श्रीवास्तव, डॉ. एमएस अंसारी, डॉ. उदय प्रताप सिंह और एनेस्थिसिया विभाग के डॉ. पीके सिंह और उनकी टीम ने डॉ. राकेश कपूर के नेतृत्व में सात घंटे तक चली प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सफलता पूर्वक अंजाम दिया।
डॉ. कपूर ने बताया कि दोनों मरीज पूरी तरह ठीक हैं। उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी जारी है। सुंदर की दोनों आंख की कॉर्निया केजीएमयू के आई बैंक में सुरक्षित रख ली गई जिससे दो लोगों की जिंदगी में रोशनी आएगी।