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लोकसभा उपचुनाव: भाजपा के सामने जीत का अंतर कायम रखने की चुनौती

Wed, 21 Feb 2018 12:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 21 Feb 2018 12:22 PM IST
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gorakhpur and phulpur by-election challenge for bjp
सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

गोरखपुर व फूलपुर का उपचुनाव भले ही दो सीटों का हो लेकिन इसके नतीजों में कई सियासी संदेश छिपे होंगे। पता चलेगा कि प्रदेश में भाजपा के मुकाबले सियासी लड़ाई में सपा और बसपा में से कौन आगे है। कांग्रेस कहां पर खड़ी है।

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भाजपा की बात करें तो उसके सामने लोकसभा के पिछले चुनाव में जीत का अंतर बरकरार रखने की चुनौती होगी। विपक्ष खासतौर से सपा और कांग्रेस के लिए ये चुनाव लिटमस टेस्ट जैसे हैं। इससे पता चलेगा कि अगले वर्ष लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ये पार्टियां कहां और किस हाल में खड़ी हैं एवं बसपा की गैरहाजिरी में उसके परंपरागत मतदाताओं का स्वाभाविक रुझान किधर है।
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लोकसभा के पिछले आम चुनाव में दोनों ही जगह भाजपा का मुख्य संघर्ष सपा से हुआ था। दोनों सीटों पर सपा दूसरे, बसपा तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर रही थी। गोरखपुर में भाजपा के योगी आदित्यनाथ और फूलपुर में केशव मौर्य दोनों को पांच लाख से अधिक वोट मिले थे।
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योगी को सपा, बसपा और कांग्रेस को मिले कुल वोटों से भी लगभग एक लाख से अधिक वोट मिले थे जबकि फूलपुर में तीनों पार्टियों के वोटों के योग से केशव को लगभग 86 हजार वोट अधिक मिले थे। इस नाते भाजपा के सामने उपचुनाव में मुख्य चुनौती इस अंतर को बरकरार रखना ही है।

किधर जाएगा बसपा को मिला वोट

उपचुनाव में प्रत्याशी भले ही उपेन्द्र शुक्ल और कौशलेन्द्र पटेल हों लेकिन वास्तव में यह चुनाव निजी तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिष्ठा से जुड़ा है।

जीत-हार का नतीजा तो बाद में आएगा। पर, चुनावी गणित में जिस तरह भाजपा भारी दिख रही है उससे कहा जा सकता है कि दोनों नेताओं की कोशिश भाजपा की जीत के अंतर को न सिर्फ बरकरार रखने की होगी बल्कि इसे बढ़ाने की भी होगी। बसपा इस बार मैदान में नहीं है।

आम चुनाव में बसपा को दोनों ही स्थानों पर लगभग डेढ़-डेढ़ लाख वोट मिले थे। देखना यह है कि उसके वोटर किधर जाते हैं। उसके वोटों का रुझान गोरखपुर और फूलपुर की चुनावी लड़ाई को दिलचस्प बना सकता है।

निशाना साधने के लिए मिलेगा आधार

आंकड़ों की चुनौती भाजपा ही नहीं सपा और कांग्रेस के सामने भी है। यदि दोनों ही पार्टियों को आम चुनाव में मिले वोट से अधिक मिलते हैं तो माना जाएगा कि बसपा की गैरहाजिरी में उसके समर्थक मतदाताओं ने भाजपा के बजाय विपक्ष को तरजीह दी है।

तब सपा और कांग्रेस को भाजपा सरकारों पर निशाना साधने का आधार भी मिल जाएगा। पर, यदि ऐसा नहीं होता है तो भाजपा को अगले चुनाव के लिए न सिर्फ मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी बल्कि यह संदेश भी साफ हो जाएगा कि दावों के बावजूद जनता का रुख अभी भाजपा के पक्ष में ही है। मोदी और योगी की नीतियों पर लोगों का भरोसा कायम है। 

गोरखपुर
-भाजपा को मिले वोट : 5,39,127
-विपक्ष (सपा, बसपा और कांग्रेस) : 4,48, 475

फूलपुर
भाजपा को मिले वोट : 5,03, 564
विपक्ष (सपा, बसपा और कांग्रेस) : 4,17,093

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