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करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं मिला जीआईएस सर्वे का पूरा लाभ
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प्रवेंद्र गुप्ता
गृहकर से आय बढ़ाने के लिए शासन ने संपत्तियों का जीआईएस सर्वे कराने के लिए कहा है। यह काम दो साल में पूरा होना था, जो चार साल बाद भी अधूरा है। अब तक महज 50 प्रतिशत संपत्तियों का ही सर्वे के बाद मिलान हो सका है। ऐसे में करोड़ों खर्च करने के बाद भी जीआईएस सर्वे का पूरा लाभ नहीं मिला है। अब सर्वे का काम करने वाली निजी कंपनी और समय मांग रही है।
जीआईएस सर्वे के लिए निजी कंपनी जियोनियो इंफोसिस टेक्नालॉजी पर 9.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सर्वे के बाद संपत्तियों का भौतिक सत्यापन भी मौके पर जाकर किया जाना है। इसके बाद ही संपत्तियों का गृहकर निर्धारण कम या ज्यादा किया जाना है, क्योंकि सर्वे में कई संपत्तियां व्यावसायिक मिली हैं, जो नगर निगम के रिकॉर्ड में आवासीय दर्ज हैं। इसी तरह क्षेत्रफल और मंजिला का भी अंतर जीआईएस सर्वे में आया है। कई मामले ऐसे मिले, जिनमें जो संपत्तियां व्यावसायिक आईं, वे मौके पर आवासीय या कम क्षेत्रफल की हैं। ऐसे में ड्रोन से किए गए सर्वे के रिकॉर्ड को नगर निगम से मिलाते हुए उसका स्थलीय सत्यापन किया जाना है।
2018 में शुरू हुआ था सर्वे का काम
जीआईएस सर्वे का काम 2018 में शुरू हुआ था, जो दो साल में पूरा होना था। इस काम में देरी के लिए कोरोना को वजह बताया गया। इसके बाद मार्च 2022 तक का समय दिया गया। हालांकि, इसके बावजूद अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। करीब 50 हजार संपत्तियों का सर्वे और करीब तीन लाख संपत्तियों के डाटा का मिलान अभी बाकी है। जीआईएस सर्वे करने वाली निजी कंपनी के प्रतिनिधि नीरज का कहना है कि सर्वे का ज्यादातर काम पूरा हो गया है। कुछ ही जगह काम बाकी है। संपत्तियों का मिलान नगर निगम से मिलकर किया जा रहा है। इसे लेकर तीन महीने का समय और बढ़ाने की मांग भी की गई है।
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प्रमुख वार्डों में संपत्तियों के मिलान का हाल
इस्माइलगंज द्वितीय- 20 प्रतिशत
लाल बहादुर शास्त्री द्वितीय- 41 प्रतिशत
डालीगंज-निरालानगर- 24 प्रतिशत
फैजुल्लागंज प्रथम- 30 प्रतिशत
फैजुल्लागंज चतुर्थ- 16 प्रतिशत
ऐशबाग- 10 प्रतिशत
मोती लाल नेहरू चंद्रभानु गुप्त नगर -7 प्रतिशत
हजरतगंज रामतीरथ- 11प्रतिशत
बालागंज- 16 प्रतिशत
आलमनगर- 35 प्रतिशत
हैदरगंज तृतीय- 20 प्रशित
भवानीगंज- 21 प्रतिशत
जीआईएस सर्वे का काम जल्द पूरा कराने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसे लेकर अपडेट रिपोर्ट भी तलब की गई है। सर्वे करने वाली कंपनी से रिपोर्ट ली जाएगी कि समस्या कहां है।
पंकज सिंह, अपर नगर आयुक्त
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गृहकर से आय बढ़ाने के लिए शासन ने संपत्तियों का जीआईएस सर्वे कराने के लिए कहा है। यह काम दो साल में पूरा होना था, जो चार साल बाद भी अधूरा है। अब तक महज 50 प्रतिशत संपत्तियों का ही सर्वे के बाद मिलान हो सका है। ऐसे में करोड़ों खर्च करने के बाद भी जीआईएस सर्वे का पूरा लाभ नहीं मिला है। अब सर्वे का काम करने वाली निजी कंपनी और समय मांग रही है।
जीआईएस सर्वे के लिए निजी कंपनी जियोनियो इंफोसिस टेक्नालॉजी पर 9.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सर्वे के बाद संपत्तियों का भौतिक सत्यापन भी मौके पर जाकर किया जाना है। इसके बाद ही संपत्तियों का गृहकर निर्धारण कम या ज्यादा किया जाना है, क्योंकि सर्वे में कई संपत्तियां व्यावसायिक मिली हैं, जो नगर निगम के रिकॉर्ड में आवासीय दर्ज हैं। इसी तरह क्षेत्रफल और मंजिला का भी अंतर जीआईएस सर्वे में आया है। कई मामले ऐसे मिले, जिनमें जो संपत्तियां व्यावसायिक आईं, वे मौके पर आवासीय या कम क्षेत्रफल की हैं। ऐसे में ड्रोन से किए गए सर्वे के रिकॉर्ड को नगर निगम से मिलाते हुए उसका स्थलीय सत्यापन किया जाना है।
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2018 में शुरू हुआ था सर्वे का काम
जीआईएस सर्वे का काम 2018 में शुरू हुआ था, जो दो साल में पूरा होना था। इस काम में देरी के लिए कोरोना को वजह बताया गया। इसके बाद मार्च 2022 तक का समय दिया गया। हालांकि, इसके बावजूद अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। करीब 50 हजार संपत्तियों का सर्वे और करीब तीन लाख संपत्तियों के डाटा का मिलान अभी बाकी है। जीआईएस सर्वे करने वाली निजी कंपनी के प्रतिनिधि नीरज का कहना है कि सर्वे का ज्यादातर काम पूरा हो गया है। कुछ ही जगह काम बाकी है। संपत्तियों का मिलान नगर निगम से मिलकर किया जा रहा है। इसे लेकर तीन महीने का समय और बढ़ाने की मांग भी की गई है।
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प्रमुख वार्डों में संपत्तियों के मिलान का हाल
इस्माइलगंज द्वितीय- 20 प्रतिशत
लाल बहादुर शास्त्री द्वितीय- 41 प्रतिशत
डालीगंज-निरालानगर- 24 प्रतिशत
फैजुल्लागंज प्रथम- 30 प्रतिशत
फैजुल्लागंज चतुर्थ- 16 प्रतिशत
ऐशबाग- 10 प्रतिशत
मोती लाल नेहरू चंद्रभानु गुप्त नगर -7 प्रतिशत
हजरतगंज रामतीरथ- 11प्रतिशत
बालागंज- 16 प्रतिशत
आलमनगर- 35 प्रतिशत
हैदरगंज तृतीय- 20 प्रशित
भवानीगंज- 21 प्रतिशत
जीआईएस सर्वे का काम जल्द पूरा कराने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसे लेकर अपडेट रिपोर्ट भी तलब की गई है। सर्वे करने वाली कंपनी से रिपोर्ट ली जाएगी कि समस्या कहां है।
पंकज सिंह, अपर नगर आयुक्त