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12 साल से डॉक्टर के घर में कैद लड़की को कराया आजाद, पिता को देख लिपट कर रोने लगी

Sun, 07 Jul 2019 05:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sun, 07 Jul 2019 05:44 AM IST
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Girl rescued from doctors home
तस्करी कर लाई लड़की को कराया गया आजाद - फोटो : Social Media
झारखंड से तस्करी करके लाई गईं चार लड़कियों में से एक और को शनिवार दोपहर अलीगंज निवासी डॉक्टर अनिल मित्रा के घर से आजाद कराया। लड़की डॉक्टर के घर में 12 साल से कैद थी। उसे बाहर नहीं निकलने दिया जाता था। दिनभर उससे काम कराया जाता था। दिल्ली की एनजीओ महिला बाल विकलांग वृद्ध समिति और आशा ज्योति केंद्र की टीम लड़की को लेकर लोकबंधु अस्पताल स्थित आशा ज्योति केंद्र पहुंची और उसका मेडिकल परीक्षण कराया।
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आशा ज्योति केंद्र की प्रशासनिक अधिकारी अर्चना सिंह ने बताया कि चारों लड़कियों को वर्ष 2007 में प्लेसमेंट कंपनियों का एजेंट फुसलाकर लाया था। दिल्ली की डेनियल प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए लड़कियों को लखनऊ में हजरतगंज निवासी अशोक बोहरा के पास काम करने के लिए भेजा गया। उस वक्त लड़कियों की उम्र सात या आठ वर्ष थी। अशोक ने एक लड़की को अपने घर पर कामकाज के लिए रख लिया जबकि बाकी तीन लड़कियों को ओम प्रकाश कक्कड़ और रिश्तेदारों के घर पर भेज दिया। इस बीच वर्ष 2011 में अशोक बोहरा के घर पर काम कर रही एक लड़की ने भागकर शादी कर ली। उसके जरिए ही बाकी दो लड़कियों का सुराग मिला और उन्हें रेस्क्यू कराया गया।
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दिल्ली से आई एनजीओ कार्यकर्ता रेनू तूरा ने बताया कि शुक्रवार को राजाजीपुरम निवासी दवा कारोबारी ओम प्रकाश कक्कड़ के घर से रेस्क्यू की गई लड़की को बरामद कर उसके पिता के सुपुर्द किया गया था। शनिवार को दूसरी लड़की को भी अलीगंज के सेक्टर जे में रहने वाले डॉ. अनिल मित्रा के घर से बरामद कर लिया गया। उन्होंने बताया कि डॉ. मित्रा दंत विभाग से सेवानिवृत्त हैं और उनकी पत्नी प्रोफेसर पद से रिटायर्ड हैं। उनसे लड़कियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। चौथी लड़की कहां है? इस बारे में भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
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पिता को देखते ही रो पड़ी लड़की

डॉक्टर के घर से रेस्क्यू की गई लड़की ने जैसे ही पिता को देखा, उन्हें पहचान लिया। पिता ने भी बेटी को एक झलक में पहचाना। लड़की चीखते हुए रोने लगी। पिता ने उसे गले से चिपटा लिया। लड़की ने पिता की तबीयत और मां का हाल पूछा। घंटों वह पिता का हाथ पकड़े बैठी रही।

एफआईआर नहीं करानी बाबा, बस मां के पास ले चलो

डॉक्टर और दवा कारोबारी के घर से रेस्क्यू लड़कियों ने एफआईआर कराने की बात से मना कर दिया है। पिता से चिपटी लड़कियां जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाहती हैं। लड़कियों ने पिता से कहा, ‘बाबा कोई एफआईआर नहीं करानी है। बस मां के पास ले चलो।’ आशा ज्योति केंद्र की प्रशासनिक अधिकारी अर्चना सिंह ने बताया कि लड़कियों की काउंसलिंग की गई, लेकिन वह पुलिस कार्रवाई के लिए तैयार नहीं हैं। उन्हें समझाया जा रहा है। रविवार को फिर से उनकी तरफ से एफआईआर कराने का प्रयास किया जाएगा।

जरा सी गलती पर करते थे पिटाई

डॉक्टर के घर से बरामद लड़की ने बताया कि उन्हें घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता था। सुबह से रात तक घर का झाड़ू-पोंछा, बर्तनों की सफाई और अन्य काम कराए जाते। रात को घर के ही एक कोने में जमीन पर बिछे बिस्तर में सोने को मिलता था। कोई गलती होने पर डांट और मारपीट भी होती थी। घर से बाहर का कोई भी काम उसे नहीं दिया जाता था। लड़की ने कहा कि 12 साल में वह कब घर से बाहर निकली, याद नहीं। आलम यह था कि उसने खुद को एक ऐसा कैदी मान लिया था जिसे कभी आजादी नहीं मिलनी थी।

खून की कमी और कमजोरी से बेहाल हैं लड़कियां

आशा ज्योति केंद्र की प्रशासनिक अधिकारी अर्चना सिंह ने बताया कि रेस्क्यू की गई लड़कियां काफी कमजोर हैं और उनमें खून की काफी कमी है। ऐसा लग रहा है कि उन्हें ठीक से खाना नहीं दिया जाता था। लड़कियों की मेडिकल जांच कराई जा रही है। जरूरत पड़ी तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।


डॉक्टर की पत्नी बोलीं, बच्चियों का घर ढूंढा पर नहीं मिला

डॉक्टर अनिल मित्रा की पत्नी और भांजे को पूछताछ के लिए आशा ज्योति केंद्र बुलवाया गया था। वहां डॉक्टर की पत्नी ने सफाई देते हुए कहा कि लड़की जब घर आई थी तो उन्होंने उसके घर और माता-पिता के बारे में पता लगाने का प्रयास किया था। जब उसका घर-ठिकाना और माता-पिता के बारे में जानकारी नहीं मिली तो कोशिशें बंद कर दीं। इसके बाद से लड़की को परिवार के सदस्य की तरह रख रहे थे।
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