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Lucknow News: दिखने में साधारण काम में अव्वल

Wed, 23 Aug 2023 08:23 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Aug 2023 08:23 PM IST
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लखनऊ की बेटी ने चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग में निभाई अहम भूमिका
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चंद्रयान-3 की लैंडिंग की जिम्मेदारी संभालने वाली डॉ. रितु करिधाल की पीएचडी सुपरवाइजर रही प्रो. मनीषा गुप्ता ने साझा किए अनुभव
संवाद न्यूज एजेंसी
लखनऊ। चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाली डॉ. रितु करिधाल की प्रतिभा का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। डॉ. रितु कारिधाल ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी करने के बाद छह महीने तक पीएचडी के लिए भी पंजीकृत थीं। उनकी रिसर्च गाइड प्रो. मनीषा गुप्ता ने बताया कि पीएचडी में इनरोल होते समय रितु कारिधाल का पहला प्रभाव भले ही साधारण हो, पर जब उन्होंने काम करना शुरू किया तो वे सभी से अव्वल नजर आईं।
प्रो. गुप्ता के अनुसार रितु ने पीएचडी में प्रवेश लेने के तीन महीने के भीतर ही उन्होंने लिटरेचर रिव्यू का काम पूरा कर लिया और शोध कार्य शुरू कर दिया था। आमतौर इसी काम में बाकी शोधार्थी छह से आठ महीने का समय लेते हैं। शोध करते हुए तीन माह का समय पूरा ही हुआ था कि खबर आई की रितु का चयन इसरो में बतौर वैज्ञानिक हो गया। प्रो. गुप्ता ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय और भौतिक विज्ञान विभाग के लिए यह बेहद गर्व के पल हैं कि उनकी छात्र रही रितु करिधाल को चंद्रयान 3 के सफल प्रक्षेपण के लिए अहम जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि 1996 में एमएससी के दौरान ही उन्होंने रितु ने सीएसआईआर का जेआरएफ उत्तीर्ण कर लिया था। इसके तुरंत बाद 1997 में उन्होंने विभाग में शोध छात्रा बन गई। उनका पीएचडी का टॉपिक डाइलेक्ट्रिक एंड अल्ट्रासोनिक स्टडीज ऑफ मैटेरियल्स था। वह लिखने से ज्यादा शोध में समय लगाती थीं।
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बंगलूरू पहुंचीं तो घर पर डिनर के लिए बुलाया-
प्रो. मनीषा ने बताया कि रितु भले ही बंगलूरू में हो लेकिन विभाग और विश्वविद्यालय के वो हमेशा करीब रही। उन्होंने बताया कि 2019 में वह बंगलूरू पहुंची और रितु करिधाल को ये बात पता चली तो उन्होंने अपनी उन्हें घर बुलाया और घर पर उनके साथ डिनर करने के बाद उन्हें विदा किया। इसी तरह जब उनकी बेटी पढ़ने के लिए बंगलूरू गई तो वहां भी बेटी की मदद के लिए हरसंभव प्रयास किया। इसके अलावा वह हमेशा फोन पर उनके संपर्क में रहीं।
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शताब्दी वर्ष पर हुई सम्मानित
2021 में लखनऊ विश्वविद्यालय ने जब अपना शताब्दी वर्ष मनाया तब रितु करिधाल को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया था। इस मौके पर उन्होंने विश्वविद्यालय में अपने विभाग का दौरा भी किया था। इसके साथ वर्तमान छात्र-छात्राओं से बातचीत भी की थी।
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