शिकायत वापस पर प्रजापति की मुश्किलें बरकरार!
द्विवेदी ने सोमवार को लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा के समक्ष संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करके कहा कि वे यह नहीं बता सकते कि प्रजापति ने कैसे मंत्री पद का दुरुपयोग किया है।
उनके पास इसकी कोई सूचना नहीं है, इसलिए वह अपना परिवाद वापस ले रहे हैं। लोकायुक्त का कहना है कि चूंकि द्विवेदी ने शिकायत के साथ दाखिल किए गए हलफनामे में लगाए गए आरोपों से इन्कार नहीं किया है इसलिए इस मामले की जांच जारी रहेगी।
लोकायुक्त ने गायत्री प्रजापति के शिकायतकर्ता प्रतापगढ़ के ओम शंकर द्विवेदी को नोटिस जारी कर सोमवार को तलब किया था। उनसे पूछा था कि गायत्री प्रजापति ने कैसे मंत्री पद का दुरुपयोग किया है?
साथ ही उनसे प्रजापति के 11 वाहनों के रजिस्ट्रेशन, उनकी कंपनियों और जमीनों की खरीद-फरोख्त का ब्यौरा भी हलफनामे के साथ देने को कहा गया था।
जल्द ही भेजेंगे गायत्री को नोटिस
द्विवेदी ने अपने वकील अजय प्रताप सिंह राठौर के साथ लोकायुक्त के समक्ष उपस्थित होकर संक्षिप्त हलफनामा दिया जिसमें मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने में असमर्थता जताते हुए परिवाद वापस लेने की बात कही गई। द्विवेदी ने लोकायुक्त से कहा कि उनके पास और कोई साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।
न्यायमूर्ति मेहरोत्रा का कहना है कि द्विवेदी ने हलफनामा देकर परिवाद वापस लेने की बात कही जरूर है लेकिन लोकायुक्त अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि परिवादी के कहने से जांच की जाए या जांच बंद की जाए।
उन्होंने परिवाद के साथ जो भी दस्तावेज दाखिल किए हैं उसी आधार पर परिवाद स्वीकार करके जांच शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।
अगर छानबीन में कोई बात मिलती है तो उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा, जल्द ही गायत्री प्रजापति को नोटिस भेजकर उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। उनका जवाब मिलने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।