गायत्री प्रजापति के अवैध निर्माण पर चलेगा बुल्डोजर
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मंगलवार को विहित प्राधिकारी और संयुक्त सचिव धनंजय शुक्ला ने मामले की सुनवाई की। गायत्री की तरफ से पक्ष रखा गया कि उनके निर्माण के शमन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए 11,175 रुपये शमन शुुल्क भी जमा है।
इस पर प्रवर्तन विभाग ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में दी कि किसी तरह से अग्रिम शमन शुल्क जमा होना पूरी तरह औचित्यहीन है। क्योंकि अवैध निर्माण के शमन के लिए कोई मानचित्र जमा नहीं किया गया। ऐसे में शमन की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है।
वहीं मानचित्र सेल के प्रभारी राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि उनके यहां 24 दिसंबर 2016 को निर्माण का मानचित्र पहले ही निरस्त किया जा चुका है। इसकी वजह मौके पर पहले ही निर्माण हो जाना था। ऐसे में अवैध निर्माण को शमन करने के बाद नियमित करने की कोई वजह नहीं पाई गई।
इसके बाद विहित प्राधिकारी ने 15 दिन के अंदर निर्माण को तोड़ने के लिए समय पूर्व मंत्री को दिया है। 15 दिन के बाद निर्माण नहीं टूटने पर खुद एलडीए निर्माण तोड़ देगा।
एलडीए की जमीन भी कब्जा की
विहित प्राधिकारी को अर्जन विभाग ने रिपोर्ट दी कि गायत्री ने अपना निर्माण कराने के लिए एलडीए की अधिगृहीत जमीन तक कब्जे में ले ली।
4.85 मीटर लंबाई और 1.87 मीटर चौड़ाई पर अपने कॉम्प्लेक्स तक जाने के लिए गैलरी बना लिया। अब विहित प्राधिकारी ने एक्सईएन जोन-2 आरडी वर्मा को आदेश दिया है कि इस जमीन से कब्जा हटवाकर एलडीए के कब्जे में लिया जाए।
सरकार बदली तो बदल गई रिपोर्ट
पिछली सरकार में नक्शा पास होने देने के लिए अर्जन विभाग ने ही पूर्व मंत्री के पक्ष में रिपोर्ट दी थी। वहीं प्रवर्र्तन विभाग भी सील करने की कार्रवाई से बच रहा था। अब अर्जन विभाग को अपनी जमीन पूर्व मंत्री के कब्जे में दिख गई। प्रवर्तन विभाग ने भी 15 अप्रैल को निर्माण सील कर दिया था।
कोर्ट ने खुद ही कराया गलत नाम
कोर्ट में प्रवर्तन विभाग का एक और कारनामा सामने आया। प्रजापति के निर्माण के लिए किसी एसपी सिंह के नाम नोटिस जारी होते रहे थे। बाद में विहित प्राधिकारी ने खुद नए सिरे से नोटिस तामील कराए।
पूर्व मंत्री सहित 14 के अवैध निर्माण तोड़ने के आदेश हुए हैं। पूर्व मंत्री का निर्माण तोड़ने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद एलडीए अपनी कार्रवाई कर अवैध निर्माण तोड़ेगा। इसमें कोई सहूलियत एलडीए की तरफ से नहीं दी जाएगी।
- अरूण कुमार, सचिव, एलडीए