जेल में एक-एक पल भारी पड़ रहा है रेप के आरोपी गौरव को
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...नर्म बिस्तर ...एयरकंडीशंड बेडरूम ...सुबह की कॉफी ...लंच और डिनर में फेवरेट इटैलियन डिश ...आसपास घूमते नौकर और चेले-चपाटी। चंद घंटों पहले गौरव शुक्ला की यही जिंदगी हुआ करती थी। लेकिन अब जेल में पथरीली जमीन का बिछौना है।
लंच-डिनर में साधारण दाल-रोटी है। एसी की जगह खिड़कियों से आती गरम हवा है। जो गौरव के लिए एक-एक पल किसी सजा से कम नहीं है। बृहस्पतिवार को जेल में उसकी पहली सुबह खासी तनावभरी रही।
चेहरे पर उदासी और छटपटाहट साफ नजर आ रही थी। गुमसुम हालत में वह मुलाहिजा बैरक (कोरेंटाइन ब्लॉक के क्यू चार बैरक) के एक कोने में ही बैठा रहा। गिनती का वक्त आया तभी वह अपनी जगह से हिला। उसने चाय पी न ही नाश्ता किया। नहाया भी नहीं। दोपहर को अरहर की दाल, रोटी, चावल और सूखी सब्जी दी गई लेकिन उसने भोजन की तरफ देखा तक नहीं।
थाली सरका दी और गुमसुम बैठा रहा
एक बुजुर्ग बंदी ने उसकी हालत देखकर पुचकारा तो वह फफक पड़ा। बुजुर्ग बंदी ने उसे समझाया। किसी तरह गौरव ने एक-दो निवाले गले से उतारे। इसके बाद थाली सरका दी और गुमसुम बैठ गया।
उसकी हालत देखकर बंदियों ने जेल अधिकारियों को जानकारी दी। मौके पर पहुंचे जेल अधिकारियों ने भी गौरव को समझाया। जेल अधिकारियों के अनुसार 16 अप्रैल को सुनाई जाने वाली सजा को लेकर वह तनाव में है। इस वजह से वह रोता है।
जेल अधिकारियों ने उसे समझाया कि तीन हजार कैदियों की तरह वह भी कैदी है और जेल में उसे कोई परेशानी हो तो वह उनसे कहे। उधर, जेल सूत्रों का कहना है कि गौरव को लग रहा है कि अब उसकी जिंदगी जेल में ही कटेगी। अगर उसे उम्रकैद हो गई तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।