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पहली बार गोमती के किनारे गणपति की स्थापना, मनौतियों के राजा का 10 करोड़ का बीमा
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 25 Aug 2017 03:14 PM IST
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गणपति उत्सव पर पूजा करते लोग
- फोटो : amarujala
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गणेश चतुर्थी के अवसर पर गोमती के किनारे गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई। लखनऊ में ऐसा पहली बार हुआ है जब लोग गोमती के किनारे पर गणपति के दर्शन कर सकेंगे। आज पहले दिन श्री गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। उसके बाद पांच सितम्बर तक अनेक धार्मिक अनुष्ठान होंगे।
लखनऊ का सबसे बड़ा गणेशोत्सव झूलेलाल वाटिका में पांच सितम्बर तक होगा। श्री गणेश प्राकट्य कमेटी की ओर से 12वां श्री गणेश प्राकट्य महोत्सव 5 सितंबर तक झूलेलाल वाटिका निकट हनुमान सेतु के पास चलेगा। मनौतियों के राजा लगभग 10 फीट ऊंची मूर्ति को सिद्ध विनायक रूप में बनी है।
आयोजकों के मुताबिक दरबार में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल राम नाईक, सीएम योगी को भी आमंत्रण भेज रहे हैं। उनके भी दर्शनों के लिए आने की संभावना है। मनौतियों के राजा के नाम चिट्ठी हर दिन लगभग 8 घंटों तक लिखी जा सकेगी।
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लखनऊ का सबसे बड़ा गणेशोत्सव झूलेलाल वाटिका में पांच सितम्बर तक होगा। श्री गणेश प्राकट्य कमेटी की ओर से 12वां श्री गणेश प्राकट्य महोत्सव 5 सितंबर तक झूलेलाल वाटिका निकट हनुमान सेतु के पास चलेगा। मनौतियों के राजा लगभग 10 फीट ऊंची मूर्ति को सिद्ध विनायक रूप में बनी है।
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आयोजकों के मुताबिक दरबार में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल राम नाईक, सीएम योगी को भी आमंत्रण भेज रहे हैं। उनके भी दर्शनों के लिए आने की संभावना है। मनौतियों के राजा के नाम चिट्ठी हर दिन लगभग 8 घंटों तक लिखी जा सकेगी।
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देखें, आयोजन की तिथि
गणपति उत्सव
- फोटो : amarujala
करीब दो लाख वर्ग फीट में होने वाले उत्सव में बप्पा का 75 फीट से अधिक ऊंचा पांडाल मुस्लिम व हिंदू कारीगरों ने सजाया है। पांडाल का 10 करोड़ रुपये का बीमा कराया गया है। बुजुर्गों-दिव्यांगों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। पंडाल के चारों ओर नौ फीट ऊंची बेरीकेडिंग की जाएगी तथा 50 सीसी टीवी कैमरे और लगभग 80 सुरक्षाकर्मियों का पहरा रहेगा। इस बार प्रतिमा का नदी किनारे भू-विसर्जन होगा।
ये होंगे आयोजन
26 अगस्त : गजरा
29 अगस्त : दूर्वाभिषेक
30 अगस्त : छप्पन भोग
01 सितंबर : सिंदूराभिषेक
03 सितंबर : पाशांकुश पूजन
ये होंगे आयोजन
26 अगस्त : गजरा
29 अगस्त : दूर्वाभिषेक
30 अगस्त : छप्पन भोग
01 सितंबर : सिंदूराभिषेक
03 सितंबर : पाशांकुश पूजन