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फूट-फूट कर रोने लगा गैंगरेप का आरोपी विधायक सेंगर, कहा- पीड़ता के परिवार से 63 साल से है झगड़ा

Mon, 16 Apr 2018 02:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 16 Apr 2018 02:45 AM IST
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gang rape accused mla kuldeep singh sengar started weeping in custody.
विधायक को ले जाते पुलिसकर्मी। - फोटो : amar ujala

दुष्कर्म के आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जब पता चला कि सीबीआई की गिरफ्त से उसे सीधे जेल ही जाना होगा तो वह फूट-फूट कर रोने लगा। सूत्रों के अनुसार उसने शुक्रवार रात में खाना भी नहीं खाया। सिर्फ चाय और बिस्किट लिया।

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इससे पहले दिन भर की पूछताछ में वह खुद को बेकुसूर बताता रहा। इस दौरान दो बार उसके आंसू भी छलक आए। सीबीआई ने शनिवार को अदालत में पेश करने से पहले भी उससे पूछताछ की।
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इस दौरान उसने सीबीआई के अफसरों को बताया कि पीड़िता और उसके परिवार के बीच 63 साल से विवाद चला आ रहा है। 11 जून 2017 की घटना के आरोपियों और पीड़िता के बीच सुलह-समझौता कराने की कोशिश की थी। इसके बाद पीड़िता ने उसके ऊपर ही आरोप लगाकर प्रार्थना पत्र देने शुरू कर दिए।
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सेंगर ने बताया कि वह 2002 से लगातार विधायक है। कुछ लोगों को यह अच्छा नहीं लगता। उन्होंने पीड़िता को उकसा कर उसके खिलाफ खड़ा किया गया और नौबत यहां तक आ गई।

उन्नाव ले जाकर आमना-सामना करा सकती है सीबीआई

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सीबीआई सेंगर को रविवार को उन्नाव ले जा सकती है, जहां पीड़िता से उसका आमना-सामना कराया जाएगा। उन पुलिस कर्मियों से भी आमना-सामना कराया जा सकता है जिनको विधायक ने फोन कर पीड़िता के पिता को गिरफ्तार करने का दबाव बनाया था।

भगवान पर भरोसा
सीबीआई की टीम शनिवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे सेंगर को कोर्ट में पेश करने के लिए जोनल मुख्यालय से निकली। एसीजेएम (सप्तम) सुनील कुमार सवा चार बजे पहुंचे और रिमांड पर सुनवाई शुरू की। रिमांड मिलने के बाद जब सीबीआई सेंगर को लेकर जाने लगी तो कुछ क्षण के लिए वह मीडिया से मुखातिब हुआ। उसने कहा, ‘मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है, आप मेरी मदद करो।’

पुलिस की भूमिका सबसे ज्यादा संदेह के घेरे में

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उन्नाव प्रकरण में पुलिस की भूमिका सबसे ज्यादा संदेह के घेरे में है। सिपाही से लेकर एसपी और उनकी मॉनिटरिंग कर रहे लखनऊ में बैठे अधिकारी तक सभी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके परिवार को बचाने का प्रयास करते रहे। विधायक का एक फोन इन पुलिसकर्मियों के लिए फरमान होता था। सीबीआई की पूछताछ के दौरान विधायक ने यह बात मानी है कि उन्होंने पुलिस अफसरों को फोन किया था।

सीबीआई के अफसरों ने जब विधायक से पूछा कि मारपीट की घटना वाले दिन वह बार-बार एसपी उन्नाव को फोन करके क्या कह रहे थे? जवाब में सेंगर ने कहा, मैं जनप्रतिनिधि हूं। मैं एसपी, डीएम, एडिशनल एसपी और तमाम थानेदारों को क्षेत्र के लोगों के लिए फोन करता रहा हूं।

एसपी ने डाला था समझौते का दबाव
वहीं, पीड़िता के चाचा का आरोप है कि उन्नाव की एसपी पुष्पांजलि ने भी पीड़ित पक्ष पर समझौते का दबाव बनाया था। माखी के तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक भदौरिया को विधायक की पैरवी पर ही पोस्टिंग दी गई थी। सूत्रों का दावा है कि पूर्व के एसओ ने विधायक के नाजायज दबावों को मानने से इन्कार कर दिया था। इस नाते उनका स्थानांतरण कर दिया गया।

विधायक के दबाव के कारण ही होता रहा खेल

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आरोप ये भी है कि पीड़िता के पिता को जेल भेजने का काफी समय से दबाव डाला जा रहा था। यही नहीं, विधायक के दबाव में ही लखनऊ से अलग-अलग स्तर पर मांगी जा रही सूचनाओं में खेल होता रहा। बाद में 3 अप्रैल को जब मारपीट की घटना हुई तो पहली एफआईआर पीड़िता के पिता (जिसकी पिटाई की गई थी) के खिलाफ दर्ज कर आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया गया।

यही वजह रही कि शुरुआती कार्रवाई में ही थाना प्रभारी अशोक भदौरिया, सब इंस्पेक्टर केपी सिंह और चार सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया। थाने के पुलिसक र्मियों से लेकर एसपी तक विधायक के कारिंदे की तरह काम कर रहे थे।

पुलिस वालों पर भी कार्रवाई संभव
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सीबीआई पुलिस कर्मियों से भी पूछताछ कर रही है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही पुलिस की भूमिका तय करते हुए सीबीआई इन पुलिस कर्मियों के खिलाफ  भी कार्रवाई कर सकती है।

सात दिनों की रिमांड पर सीबीआई के सुपुर्द कर दिया

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उन्नाव रेप कांड में दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने पीड़िता को आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के पास ले जाने वाली महिला शशि सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, सेंगर को सीबीआई की विशेष अदालत ने सात दिनों की रिमांड पर सीबीआई के सुपुर्द कर दिया है।

सीबीआई शशि सिंह को रविवार को कोर्ट में पेश करेगी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि शशि ने ही उसे विधायक से मिलवाया था। शशि के बेटे शुभम को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

उधर, सीबीआई ने शनिवार दोपहर करीब 12 बजे पीड़िता का लखनऊ के लोहिया अस्पताल में मेडिकल चेकअप करवाया। एक्सरे भी करवाया ताकि उसकी सही उम्र की जांच की जा सके। तीन घंटे की जांच के बाद पीड़िता को वापस उन्नाव भेज दिया गया।

मामले में सीबीआई ने सेंगर को एसीजेएम (सप्तम) सुनील कुमार की अदालत में दोपहर बाद 3.45 बजे पेश किया। कोर्ट ने विधायक को पॉक्सो एक्ट में 7 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया। इस दौरान सेंगर के वकील ने विरोध नहीं किया। इसके बाद कोर्ट ने सेंगर को 21 अप्रैल तक के लिए सीबीआई के सुपुर्द कर दिया। इस दौरान सेंगर से उनके वकील मिल सकेंगे।

नौकरी के बहाने पीड़िता को विधायक के पास ले गई थी महिला

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प्रतीकात्मक तस्वीर

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि शशि ही उसे चार जून 2017 को रात आठ बजे विधायक के पास नौकरी दिलाने के बहाने ले गई थी। आरोप है कि इसी दौरान कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ बलात्कार किया। उस समय उनके घर के आंगन में शशि मौजूद थी। पीड़िता की मां की ओर से दर्ज एफआईआर में शशि सिंह को सह आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई टीम ने विधायक से पूछताछ के बाद शनिवार को शशि सिंह से पूछताछ शुरू की। पूछताछ में वह खुद को बेगुनाह बताती रही। उसने कहा, उसका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। शशि ने रोते हुए बताया कि उसके बेटे शुभम को पीड़िता ने फर्जी केस में फंसा कर जेल भिजवा दिया था। वह इसकी पैरवी कर रही थी और मदद की गुहार लगाने विधायक कुलदीप सिंह के पास गई थी। कुलदीप सिंह ने दोनों पक्षों में समझौता कराने की कोशिश की। यह कोशिश नाकाम हुई तो उसे रेप के मामले में फंसा दिया गया। शुरुआती पूछताछ के बाद सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया। माना जा रहा है कि  शशि और कुलदीप का पीड़िता से एक साथ आमना-सामना कराया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, शशि के विधायक कुलदीप से पारिवारिक संबंध हैं। शशि का पति हरिपाल सिंह फौज में है। चार दिन पहले शशि सिंह पूरे परिवार के साथ लखनऊ आई थी और मीडिया के सामने खुद को बेकसूर बताया था। उसने पीड़िता को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। इसके अगले दिन विधायक की पत्नी के साथ वह डीजीपी ओम प्रकाश सिंह से भी मिली थी और न्याय की गुहार लगाई थी। शशि ने डीजीपी को बताया कि उसके बेटे के खिलाफ पीड़िता ने फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर जेल भिजवा दिया। पांच महीने जेल में रहने के बाद वह जमानत पर छूट कर बाहर आया है।

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