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Lucknow News: 65 साल बाद भी नहीं मिला जमीन का पूरा मुआवजा, हाईकोर्ट सख्त
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हाईकोर्ट।
लखनऊ। जमीन अधिग्रहण के 65 साल बाद भी पूरा मुआवजा न मिलने पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एडीएम (भूमि अधिग्रहण) और मुख्य कोषाधिकारी को छह अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने का आदेश दिया है। इनसे पूछा गया है कि मुआवजा संबंधी आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश राजकुमार शैलेंद्र सिंह की याचिका पर दिया। याची का कहना है कि उसकी जमीन 1959 में अधिगृहीत की गई थी, लेकिन अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों के कामकाज के तरीके पर भी नाराजगी जताई।
कोर्ट को बताया गया कि कलेक्टर ने 14 अक्तूबर 1959 को जमीन के मुआवजे से संबंधित आदेश पारित किया था। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और छह दिसंबर 1996 को फैसला हुआ। राज्य सरकार ने इसके खिलाफ 2007 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की, जिसे नौ सितंबर 2019 को खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद मुआवजे की पूरी रकम का भुगतान नहीं हुआ। याची के मुताबिक अब तक 11.72 लाख रुपये मिले हैं, जबकि अगस्त 2025 तक करीब 38.25 लाख रुपये और बकाया थे। मामले की अगली सुनवाई छह अक्तूबर को होगी।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश राजकुमार शैलेंद्र सिंह की याचिका पर दिया। याची का कहना है कि उसकी जमीन 1959 में अधिगृहीत की गई थी, लेकिन अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों के कामकाज के तरीके पर भी नाराजगी जताई।
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कोर्ट को बताया गया कि कलेक्टर ने 14 अक्तूबर 1959 को जमीन के मुआवजे से संबंधित आदेश पारित किया था। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और छह दिसंबर 1996 को फैसला हुआ। राज्य सरकार ने इसके खिलाफ 2007 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की, जिसे नौ सितंबर 2019 को खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद मुआवजे की पूरी रकम का भुगतान नहीं हुआ। याची के मुताबिक अब तक 11.72 लाख रुपये मिले हैं, जबकि अगस्त 2025 तक करीब 38.25 लाख रुपये और बकाया थे। मामले की अगली सुनवाई छह अक्तूबर को होगी।
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