पुराने पन्नों से: गोलीकांड में मारे गए कारसेवकों के कलश की देशभर में निकाली गई यात्रा
जनवरी 1991 में प्रयागराज में माघ मेला के अवसर पर हुतात्मा कारसेवकों की अस्थियों का विसर्जन संगम में संतों के हाथों से हुआ। इसके बाद चार अप्रैल को दिल्ली के वोट क्लब पर रैली आयोजित हुई।
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दो नवंबर वर्ष 1990 को कारसेवकों पर गोलीकांड के बाद पूरे देश में राम मंदिर आंदोलन की ही गूंज थी। हर तरफ गुस्से का माहौल था। ऐसे में अयोध्या में बचे हुए कारसेवक वापस लौट गए लेकिन यहां 40 दिनों तक इस लोमहर्षक घटना के विरोध में अनवरत सत्याग्रह चला। पुलिस की गोलियों से मारे गए कारसेवकों के कलश की देशभर में यात्रा निकाली गई। हिंदू समाज ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
जनवरी 1991 में प्रयागराज में माघ मेला के अवसर पर हुतात्मा कारसेवकों की अस्थियों का विसर्जन संगम में संतों के हाथों से हुआ। इसके बाद चार अप्रैल को दिल्ली के वोट क्लब पर रैली आयोजित हुई। एक अनुमान के मुताबिक इस रैली में देश के कोन-कोने से 20 लाख से अधिक लोग पहुंचे। यह यहां पर हुई तब तक की रैलियों में विशालतम और ऐतिहासिक थी।
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इसी के बाद वोट क्लब पर रैली और सभाओं के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। रैली में धर्माचार्यों के संबोधन के बीच ही संदेश आया कि उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।
सिंतबर 1992 में देश के गांव-गांव में श्रीराम पादुका पूजन का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से गीता जयंती पर छह दिसंबर को रामभक्तों से अयोध्या पहुंचने का आह्वान किया गया।