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बेरोजगारों से ठगी करने वाले गिरोह के सरगना को एसटीएफ ने दबोचा
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90 बेरोजगारों को नौकरी के नाम पर ठगने वाले गिरोह का सरगना गिरफ्तार
एसटीएफ ने मंगलवार को बेरोजगारों को ठगने वाले गिरोह के सरगना कुलदीप कुमार को विकास नगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में कुलदीप ने कुबूला कि वह 2016 से इस गोरखधंधे में है और अब तक 80 से 90 बेरोजगारों से पांच करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि जालसाजों ने शिक्षा विभाग में चपरासी के पद, चकबंदी विभाग में कनिष्ठ लिपिक के पद, राजस्व विभाग व स्वास्थ्य विभाग में लिपिक के पद, नगर पालिका परिषद में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद के लिए फर्जी तरीके से रिक्तियां निकालीं।
इसके बाद राजेश पाल, अंकित पाठक, पंकज यादव, मुन्ना यादव और उपेंद्र यादव से नौकरी के नाम पर 21 लाख रुपये की ठगी की गई।
पीड़ित जोखूराम ने 26 मई को विकास नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मंगलवार को एसटीएफ ने विकास नगर में टेढ़ी पुलिया के पास से कुलदीप तिवारी को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सरगना कुबूला कि वह साथी जीतू सिंह, संदीप श्रीवास्तव और रितु कौर के जरिए नौकरी दिलाने के नाम पर पांच से सात लाख रुपये वसूलता था।
बलिया निवासी जीतू और रायबरेली निवासी संदीप श्रीवास्तव बेरोजगारों को ढूंढकर सौदा करते थे। पैसा मिलने के बाद कुलदीप फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करता था।
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एसटीएफ ने मंगलवार को बेरोजगारों को ठगने वाले गिरोह के सरगना कुलदीप कुमार को विकास नगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में कुलदीप ने कुबूला कि वह 2016 से इस गोरखधंधे में है और अब तक 80 से 90 बेरोजगारों से पांच करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि जालसाजों ने शिक्षा विभाग में चपरासी के पद, चकबंदी विभाग में कनिष्ठ लिपिक के पद, राजस्व विभाग व स्वास्थ्य विभाग में लिपिक के पद, नगर पालिका परिषद में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद के लिए फर्जी तरीके से रिक्तियां निकालीं।
इसके बाद राजेश पाल, अंकित पाठक, पंकज यादव, मुन्ना यादव और उपेंद्र यादव से नौकरी के नाम पर 21 लाख रुपये की ठगी की गई।
पीड़ित जोखूराम ने 26 मई को विकास नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मंगलवार को एसटीएफ ने विकास नगर में टेढ़ी पुलिया के पास से कुलदीप तिवारी को गिरफ्तार कर लिया।
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पूछताछ में सरगना कुबूला कि वह साथी जीतू सिंह, संदीप श्रीवास्तव और रितु कौर के जरिए नौकरी दिलाने के नाम पर पांच से सात लाख रुपये वसूलता था।
बलिया निवासी जीतू और रायबरेली निवासी संदीप श्रीवास्तव बेरोजगारों को ढूंढकर सौदा करते थे। पैसा मिलने के बाद कुलदीप फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करता था।