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हेलो, हाईकोर्ट का जज बोल रहा हूं... जेल में बंद कैदी से उसके वकील की बात करवाइए
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लखनऊ। डीआईजी कारागार व सुधार सेवाओं को एक अंजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को हाईकोर्ट का जस्टिस बताया। उसने निर्देश दिया कि गाजीपुर जिला जेल में बंद कैदी से उसके वकील की बात करा दीजिए। पड़ताल की गई तो वह फर्जी निकला। इस पर डीआईजी कारागार ने आलमबाग थाने में केस दर्ज कराया है। पुलिस साइबर क्राइम सेल की मदद से जांच कर रही है।
आलमबाग थानाक्षेत्र में पुरानी जेल रोड पर कारागार प्रशासन का कार्यालय है। डीआईजी जेल के पद पर आईपीएस अधिकारी एसके मैत्रेय की तैनाती है। डीआईजी जेल के मुताबिक, 14 अप्रैल की दोपहर करीब 3.30 बजे उनके मोबाइल पर एक अंजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ का जस्टिस शमीम अहमद बताया। उसने कहा कि गाजीपुर जेल में प्रदीप यादव नाम का कैदी बंद है। उसे मोबाइल पर उसके वकील चंगेज खान से बात करा दीजिए। कॉल करने वाले ने एक मोबाइल नंबर दिया, जिस पर बात कराने को कहा गया था। अंजान नंबर से कॉल पर एसके मैत्रेय को संदेह हुआ। उन्होंने न्यायाधीश से संपर्क किया तो जानकारी मिली कि उन्होंने कोई कॉल ही नहीं की। इसके बाद डीआईजी जेल एसके मैत्रेय ने आलमबाग थाने में तहरीर दी। प्रभारी निरीक्षक आलमबाग अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
एक सप्ताह में दूसरा मामला
हाईकोर्ट का जस्टिस बनकर अधिकारियों को कॉल करने का यह एक सप्ताह के अंदर दूसरा मामला सामने आया है। इसके पहले सीएमओ डॉ. मनोज कुमार को भी 15 अप्रैल को कॉल कर एक अस्पताल बंद करने का आदेश दिया गया था। सीएमओ ने वजीरगंज थाने में केस दर्ज कराया है। डॉ. मनोज कुमार ने तहरीर दी थी कि 15 अप्रैल की दोपहर 12.58 बजे 8545928877 से उनके मोबाइल पर कॉल आई। कॉलर ने खुद को जस्टिस रमेश सिन्हा बताया। कहा कि लखनऊ शहीद पथ स्थित एशिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर को तत्काल बंद करने का आदेश उनके द्वारा जारी किया गया था। लिहाजा तत्काल अस्पताल का संचालन बंद करा दें। यह भी कहा कि आपको व जिलाधिकारी को आदेश का मेल भेजा गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने मेल चेक किया तो कोई मेल नहीं था। उन्होंने वजीरगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
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आलमबाग थानाक्षेत्र में पुरानी जेल रोड पर कारागार प्रशासन का कार्यालय है। डीआईजी जेल के पद पर आईपीएस अधिकारी एसके मैत्रेय की तैनाती है। डीआईजी जेल के मुताबिक, 14 अप्रैल की दोपहर करीब 3.30 बजे उनके मोबाइल पर एक अंजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ का जस्टिस शमीम अहमद बताया। उसने कहा कि गाजीपुर जेल में प्रदीप यादव नाम का कैदी बंद है। उसे मोबाइल पर उसके वकील चंगेज खान से बात करा दीजिए। कॉल करने वाले ने एक मोबाइल नंबर दिया, जिस पर बात कराने को कहा गया था। अंजान नंबर से कॉल पर एसके मैत्रेय को संदेह हुआ। उन्होंने न्यायाधीश से संपर्क किया तो जानकारी मिली कि उन्होंने कोई कॉल ही नहीं की। इसके बाद डीआईजी जेल एसके मैत्रेय ने आलमबाग थाने में तहरीर दी। प्रभारी निरीक्षक आलमबाग अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
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एक सप्ताह में दूसरा मामला
हाईकोर्ट का जस्टिस बनकर अधिकारियों को कॉल करने का यह एक सप्ताह के अंदर दूसरा मामला सामने आया है। इसके पहले सीएमओ डॉ. मनोज कुमार को भी 15 अप्रैल को कॉल कर एक अस्पताल बंद करने का आदेश दिया गया था। सीएमओ ने वजीरगंज थाने में केस दर्ज कराया है। डॉ. मनोज कुमार ने तहरीर दी थी कि 15 अप्रैल की दोपहर 12.58 बजे 8545928877 से उनके मोबाइल पर कॉल आई। कॉलर ने खुद को जस्टिस रमेश सिन्हा बताया। कहा कि लखनऊ शहीद पथ स्थित एशिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर को तत्काल बंद करने का आदेश उनके द्वारा जारी किया गया था। लिहाजा तत्काल अस्पताल का संचालन बंद करा दें। यह भी कहा कि आपको व जिलाधिकारी को आदेश का मेल भेजा गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने मेल चेक किया तो कोई मेल नहीं था। उन्होंने वजीरगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
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