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50 साल के अधेड़ भी हैं कक्षा नौ के छात्र, चौंकिए नहीं ये हकीकत है, यहां पढ़ें पूरा मामला
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:05 AM IST
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- फोटो : demo
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कक्षा-9 के छात्र की उम्र 50 साल। चौंक गए न! पर यही हकीकत है। ऐसे एक-दो नहीं, वजीफे के लिए आए आवेदनों की जांच में पूरे 18 हजार मामले पकड़ में आए हैं। समाज कल्याण विभाग ने सभी का भुगतान रोक दिया है। इन सभी मामलों में अनुसूचित जाति के विद्यार्थी के तौर पर ऑनलाइन आवेदन किए गए थे।
चालू सत्र में कक्षा-9 और 10 में छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए साढ़े चार लाख से ज्यादा छात्रों ने आवेदन किए थे। एनआईसी की वेबसाइट पर विद्यार्थियों की ओर से दिए गए आधार नंबर से यह जानकारी मिलने पर अधिकारी सकते में आ गए। इतना ही नहीं इन 18 हजार विद्यार्थियों में से अधिकांश की उम्र 40-50 वर्ष के बीच है।
इन मामलों की जिला समाज कल्याण अधिकारियों से शुरुआती जांच कराई गई तो उन्हें भी ये आवेदन संदिग्ध मिले। अमूमन कक्षा-9 व 10 में 13-14 वर्ष या अधिकतम 16 वर्ष तक के विद्यार्थी ही होते हैं। मामला शासन की जानकारी में भी लाया गया।
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इसके बाद समाज कल्याण निदेशालय ने इन सभी कथित 18 हजार विद्यार्थियों को भुगतान रोक दिया। इसकी पुष्टि उप निदेशक पीके त्रिपाठी और छात्रवृत्ति के नोडल अधिकारी सिद्धार्थ मिश्रा ने भी की। मामले की जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं।
इन मामलों में छात्रों का डाटा अग्रसारित करने वाले शिक्षण संस्थानों और जिलास्तरीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। माना जा रहा है कि छात्रवृत्ति की राशि हड़पने के लिए यह खेल किया गया है। यहां बता दें कि कक्षा-9 व 10 के पात्र पाए गए सभी 4 लाख 16 हजार 860 विद्यार्थियों के खातों में 88 करोड़ 49 लाख रुपये की राशि भेज दी गई है।
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चालू सत्र में कक्षा-9 और 10 में छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए साढ़े चार लाख से ज्यादा छात्रों ने आवेदन किए थे। एनआईसी की वेबसाइट पर विद्यार्थियों की ओर से दिए गए आधार नंबर से यह जानकारी मिलने पर अधिकारी सकते में आ गए। इतना ही नहीं इन 18 हजार विद्यार्थियों में से अधिकांश की उम्र 40-50 वर्ष के बीच है।
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इन मामलों की जिला समाज कल्याण अधिकारियों से शुरुआती जांच कराई गई तो उन्हें भी ये आवेदन संदिग्ध मिले। अमूमन कक्षा-9 व 10 में 13-14 वर्ष या अधिकतम 16 वर्ष तक के विद्यार्थी ही होते हैं। मामला शासन की जानकारी में भी लाया गया।
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इसके बाद समाज कल्याण निदेशालय ने इन सभी कथित 18 हजार विद्यार्थियों को भुगतान रोक दिया। इसकी पुष्टि उप निदेशक पीके त्रिपाठी और छात्रवृत्ति के नोडल अधिकारी सिद्धार्थ मिश्रा ने भी की। मामले की जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं।
इन मामलों में छात्रों का डाटा अग्रसारित करने वाले शिक्षण संस्थानों और जिलास्तरीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। माना जा रहा है कि छात्रवृत्ति की राशि हड़पने के लिए यह खेल किया गया है। यहां बता दें कि कक्षा-9 व 10 के पात्र पाए गए सभी 4 लाख 16 हजार 860 विद्यार्थियों के खातों में 88 करोड़ 49 लाख रुपये की राशि भेज दी गई है।