कुंभ मेले के नाम पर फर्जी टेंडर से पर्यटन भवन में हो रही थी डीलिंग, मिलीभगत की आशंका!
कुंभ मेले के नाम पर पर्यटन विभाग की ओर से फर्जी टेंडर निकालकर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में शनिवार को नए तथ्य उजागर होने के बाद अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। डॉक्यूमेंट्री मेकिंग के ढाई करोड़ के टेंडर के नाम पर दस लाख रुपये गंवाने वाली राखी सेन ने बताया कि ठेका दिलाने के लिए पर्यटन भवन में कई चरणों में अधिकारियों से उनकी मुलाकात करवाई गई।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जालसाजों की पहुंच पर्यटन विभाग के आला अधिकारियों के कमरों तक थी। गोमतीनगर पुलिस पर्यटन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के एंगल पर भी जांच-पड़ताल कर रही है।
दरअसल, प्रयाग में अगले साल लगने वाले कुंभ मेले को लेकर प्रदेश सरकार की तैयारियां चल रही हैं। वहीं जालसाजों ने कुंभ मेले में डॉक्यूमेंट्री मेकिंग से लेकर चादर, कंबल, तौलिये की सप्लाई, टेंट सिटी बनाने, दिव्यांगों के लिए ट्राई साइकिल, ई-रिक्शे किराए पर लेने, सड़क निर्माण, फ्लेक्स-बैनर आदि से जुड़े कामों को लेकर 2,727 करोड़ रुपये के फर्जी टेंडर निकाले और लोगों को शिकार बनाकर करोड़ों रुपये ठग लिए। इस फर्जीवाड़े की जानकारी के बाद पर्यटन विभाग ने गोमतीनगर थाने में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।
राखी ने शनिवार को बताया कि उमाशंकर तिवारी के जरिए उन्हें टेंडरों की जानकारी हुई। उमाशंकर ने पर्यटन निगम के आला अधिकारी की मदद से ठेका दिलाने की बात कही। इसके बाद मनोज तिवारी ने राखी से संपर्क किया और उमाशंकर का रेफरेंस दिया।
उसने खुद को पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक का करीबी बताते हुए पर्यटन भवन में आलोक मिश्र से मिलवाया। उसने पर्यटन विभाग में एक अधिकारी के कमरे में भी एक शख्स से मुलाकात करवाई, जिसे प्रबंध निदेशक बताया गया। साथ ही दस लाख रुपये एडवांस ले लिए। हालांकि, जिस अधिकारी को एमडी बताकर मुलाकात करवाई गई, वह जालसाज निकला।
‘जुगाड़ पूरा है, दिलवा दूंगा ठेका’
राखी सेन ने शुक्रवार को जब शिकायत दर्ज कराई तो गोमतीनगर पुलिस को पर्यटन भवन बुलाया गया। वहां पुलिस की उपस्थिति में राखी ने आलोक मिश्रा को फोन मिलाया तो उसने कहा कि जुगाड़ पूरा है। विश्वास रखिए। डॉक्यूमेंट्री का ठेका आपको दिला दूंगा। बाकी आरोपियों के फोन स्विच ऑफ थे।
कई और पीड़ित पहुंचे पर्यटन भवन
‘अमर उजाला’ में शनिवार को ‘कुंभ के नाम पर फर्जी टेंडर निकालकर करोड़ों की ठगी’ शीर्षक खबर छपने के बाद जालसाजी के शिकार कई ठेकेदार गोमतीनगर स्थित पर्यटन भवन पहुंचे। छुट्टी होने के बावजूद वहां मौजूद अधिकारियों से मिलकर फर्जी टेंडरों से जुड़ी जानकारी हासिल की। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ठगी के शिकार लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
मंत्रियों से भी करवाई सिफारिश
कंबल, चादर व तौलियों का टेंडर जब निकाला गया तो कई ठेकेदार मंत्रियों से सिफारिश के लिए भी पहुंचे। पर्यटन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रियों के सिफारिश पत्र पर टेंडर लेने के लिए पर्यटन भवन में अधिकारियों पर दबाव डाला। वहां से टेंडर फर्जी होने की जानकारी मिलने के बाद ठेकेदारों ने हाथ पीछे खींच लिए।
पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। पीड़ित ठेकेदारों से जानकारी ली जा रही है। जरूरत पड़ी तो एसटीएफ की भी मदद ली जाएगी। पर्यटन विभाग के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।