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कहीं आप तो नहीं इस फर्जीवाड़े का शिकार?

Mon, 21 Oct 2013 12:07 PM IST
अंकुर तिवारी/लखनऊ
अंकुर तिवारी/लखनऊ Updated Mon, 21 Oct 2013 12:07 PM IST
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fraud board get even more murckier

मध्य प्रदेश के फर्जी बोर्ड संचालित करने वाले शिक्षा माफिया एक-एक कमरे के मकान में अपने दफ्तर चला रहे थे।

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पुलिस ने छापेमारी के दौरान मिनी ट्रक भरकर मार्क्सशीट, प्रमाण पत्र और फर्जी डिग्रियां बरामद कीं।

गिरोह के लोगों ने कुछ दिन पहले पुलिस की दबिश के डर से लगभग इतने ही कागजात जला दिए थे।

ये गैंग देशभर में करीब दस लाख लोगों को फर्जी मार्क्सशीट, प्रमाण पत्र, मान्यता और डिग्री बांट चुके थे। इन लोगों ने देश के 22 राज्यों में करीब 150 एजेंट बना रखे थे जो इनके लिए क्लाइंट लाने का काम करते थे।

पुलिस इन सभी के बारे में जानकारी जुटा रही है। वहीं एक बोर्ड के फरार सरगना विपिन शर्मा की तलाश में भी दबिशें दी जा रही हैं।

शाक्य हुआ करता था सरगना

गैंग को पकड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले एसटीएफ के एसआई आकाश सिंह के मुताबिक तीन साल पहले जब गैंग बना तो गंगा दयाल शाक्य सरगना हुआ करता था। बाद में महेश चंद्रवंशी और विपिन शर्मा ने अलग होकर दूसरा बोर्ड बना लिया।
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इसके बाद विपिन और महेश चंद्रवंशी भी अलग हो गए। इन गिरोहों ने कोलकाता और चेन्नई में भी अपने रीजनल ऑफिस बना रखे थे।

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कासगंज, संभल और मोदीनगर में ये एक-एक कमरे के मकान किराए पर लेकर उनमें बोर्ड के दफ्तर संचालित कर रहे थे। कई जगह ये लोग बिना किराया दिए मकान छोड़कर चले गए।

इन लोगों ने देश भर में जिन 600 स्कूलों को मान्यता दी, उनमें से 150 का कोई अस्तित्व ही नहीं है।

रुतबे से रहते थे, बना रखा था दबदबा
गंगा दयाल शाक्य और महेश चंद्रवंशी ने जालसाजी की रकम से शानदार मकान बना रखे थे। गंगा दयाल गंजडुंडवारा में अपना डिग्री कॉलेज बनवा रहा है। महेश भी एक कॉलेज का निर्माण करा रहा है। वहीं विपिन ने घर तो कोई खास नहीं बनवा रखे थे लेकिन चलता पूरी शानो-शौकत के साथ था।

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लग्जरी गाड़ियां और असलहाधारी उसके साथ रहते थे। गंगादयाल शाक्य खुद को बाल न्यायालय कासगंज और भारतीय खाद्य निगम का सदस्य बताता था।

घर के पास गलियों में लगवा रखे थे कैमरे
घर में लगे कैमरों के चलते गिरोह का सरगना विपिन शर्मा पुलिस को चकमा देकर भाग निकला। गली में उसके तीन मकान थे। दरअसल विपिन ने अपने घर की गलियों में कैमरे लगा रखे थे। वह और उसके साथी कैमरों के जरिए हर आने- जाने वाले पर नजर रखते थे।


जिस दिन पुलिस ने विपिन की घेराबंदी की, उस दिन उसके घर के पास देवी जागरण था। जागरण से लौटने के बाद वह पुलिस को चकमा देकर भाग निकला।

फर्जी दस्तावेज से नौकरी पाने वालों की तलाश
पुलिस को फर्जी बोर्डों की वेबसाइट से कई अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। शिक्षा माफिया ने जिन लोगों को फर्जी मार्क्सशीट, डिग्रियां और प्रमाण पत्र दिए हैं, उनमें से कई की सेना व दूसरे सरकारी संस्थानों में नौकरियां लग गई हैं।

उन सभी संस्थानों से बोर्ड के पास लेटर भेजे गए हैं और संबंधित लोगों की डिग्रियों के बारे में जानकारी मांगी गई है। एसटीएफ इन सभी लोगों का ब्यौरा जुटा रही है।

बैंक खातों से चलेगा एजेंटों का पता
एसपी एसटीएफ अनंत देव ने बताया कि जालसाजों के बैंक एकाउंट के जरिए देशभर में फैले एजेंटों का पता लगाया जाएगा। जालसाजी की ज्यादातर रकम का लेन-देन बैंक खातों के जरिए ही किया जाता था। पिछले तीन साल के दौरान इन खातों में किस-किसने रकम का आदान-प्रदान किया, उसकी सूची तैयार होगी।

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