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Lucknow News: दो साल बाद मनेगा बलरामपुर अस्पताल का स्थापना दिवस
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लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल, फरवरी माह में अपने 155 वर्ष पूरे कर लेगा। तीन फरवरी को अस्पताल का स्थापना दिवस मनाया जाएगा। पिछले वर्ष किन्हीं कारणों के चलते स्थापना दिवस नहीं मनाया गया था। समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को आमंत्रित किया गया है।
अस्पताल निदेशक डॉ. सुशील प्रकाश ने बताया कि 12 बेड का ये एक छोटा अस्पताल हुआ करता था। आज 155 वर्ष के सफर के बाद यहां 776 बेड पर मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा भी मिल रही है। उपलब्धि ये है कि मेडिसिन से लेकर न्यूरो सर्जरी व कैंसर तक के मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। गंभीर मरीजों के लिए 28 बेड की वेंटिलेटर यूनिट भी हैं। गुर्दा रोगियों की मुफ्त डायलिसिस भी हो रही है।
1860 में पड़ी नीव, ब्रिटिश सर्जन का बना है मकबरा
अस्पताल की नींव वर्ष 1860 में पड़ी थी। 27 वर्ष की उम्र में ब्रिटिश सर्जन फ्रेड्रिक ऑगस्टस की मौत हो गई। गोलागंज में उनका मकबरा बना। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए अंग्रेजों ने वर्ष 1869 में रेजिडेंसी हिल डिस्पेंसरी खोली। यहां सैनिकों का इलाज होता था। बाद में जनता को भी सुविधा मिलने लगी। वर्ष 1902 में राजा बलरामपुर ने जमीन उपलब्ध कराई। इसके बाद डिस्पेंसरी अस्पताल में बदल गई।
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राजा बलरामपुर ने किया था विस्तार
अस्पताल के निदेशक ने बताया कि राजा बलरामपुर ने जब इसका विस्तार किया। 36 बेड पर मरीजों का इलाज शुरू हुआ। उपकरण भी लगाए गए। वर्ष 1948 में बलरामपुर अस्पताल, सरकार के अधीन कर दिया गया। तब 20 बेड और बढ़ाए गए। एक विशेषज्ञ व तीन एमबीबीएस डॉक्टर तैनात किए गए। तीन कंपाउंटर, 20 नर्स और 50 कर्मचारी रखे गए हैं।
अस्पताल निदेशक डॉ. सुशील प्रकाश ने बताया कि 12 बेड का ये एक छोटा अस्पताल हुआ करता था। आज 155 वर्ष के सफर के बाद यहां 776 बेड पर मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा भी मिल रही है। उपलब्धि ये है कि मेडिसिन से लेकर न्यूरो सर्जरी व कैंसर तक के मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। गंभीर मरीजों के लिए 28 बेड की वेंटिलेटर यूनिट भी हैं। गुर्दा रोगियों की मुफ्त डायलिसिस भी हो रही है।
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1860 में पड़ी नीव, ब्रिटिश सर्जन का बना है मकबरा
अस्पताल की नींव वर्ष 1860 में पड़ी थी। 27 वर्ष की उम्र में ब्रिटिश सर्जन फ्रेड्रिक ऑगस्टस की मौत हो गई। गोलागंज में उनका मकबरा बना। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए अंग्रेजों ने वर्ष 1869 में रेजिडेंसी हिल डिस्पेंसरी खोली। यहां सैनिकों का इलाज होता था। बाद में जनता को भी सुविधा मिलने लगी। वर्ष 1902 में राजा बलरामपुर ने जमीन उपलब्ध कराई। इसके बाद डिस्पेंसरी अस्पताल में बदल गई।
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राजा बलरामपुर ने किया था विस्तार
अस्पताल के निदेशक ने बताया कि राजा बलरामपुर ने जब इसका विस्तार किया। 36 बेड पर मरीजों का इलाज शुरू हुआ। उपकरण भी लगाए गए। वर्ष 1948 में बलरामपुर अस्पताल, सरकार के अधीन कर दिया गया। तब 20 बेड और बढ़ाए गए। एक विशेषज्ञ व तीन एमबीबीएस डॉक्टर तैनात किए गए। तीन कंपाउंटर, 20 नर्स और 50 कर्मचारी रखे गए हैं।