अब कार्यकर्ताओं पर 'तीसरी आंख' से नजर रखेगा संघ
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घरों पर विश्राम कर रहे पूर्व प्रचारक अब संघ की तीसरी आंख के रूप में काम करेंगे। इन्हें काम पर लगाने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है।
रणनीति के मुताबिक इन्हें न सिर्फ संघ की कार्ययोजना से सीधे जोड़ा जाएगा, बल्कि सहयोगी संगठनों के कामकाज को संवारने की भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनका मुख्य काम संघ परिवार के कामकाज पर नजर रखना और उससे संघ नेतृत्व को अवगत कराना होगा।
पूर्व प्रचारकों को इसके लिए तैयार करने का काम संघ प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह सुरेश जोशी भैया जी ने अपने हाथ में लिया है। दोनों लोग इनसे संवाद कर रहे हैं। साथ ही इन्हें मानसिक तौर पर तैयार कर रहे हैं कि वे रोजाना कम से कम एक घंटा और माह में कम से कम तीन दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दें।
शनिवार को उन्नाव में इस सिलसिले में पूर्व प्रचारकों की बैठक भी हुई। इसमें भागवत भी मौजूद थे। दरअसल, संघ सार्वजनिक रूप से कामकाज में विस्तार का दावा करता है लेकिन अंदरखाने उसके नेतृत्व को भी कहीं न कहीं यह बात सालती है कि शाखाओं में पहले की तरह उत्साह नहीं दिखता।
पहले संघ बैठक में उभरी ये पीड़ा
खासतौर से यूपी में शाखाओं में न तो पहले की तरह संख्या दिखती है और न समाज के साथ उनके सरोकार जुड़े दिखाई देते हैं। इसके चलते संघ या अन्य संगठनों के कार्यक्रमों में पहले जैसी भागीदारी नहीं दिखती। बीते साल के अंत में लखनऊ में संघ के सबसे अहम फोरम केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में भी अंदरखाने यह पीड़ा उभरी थी।
जमीनी हकीकत भी परखेंगे : जानकारी के मुताबिक, पूर्व प्रचारकों को अपने इर्द-गिर्द लगने वाली शाखाओं को सक्रिय करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके लिए उनके जरिये पहले कभी संघ से जुड़े परिवारों के साथ तथा संघ का कामकाज संभालने वाली मौजूदा पीढ़ी से भी संपर्क व संवाद बढ़ाया जाएगा।
साथ ही ऐसे परिवारों के कम से कम एक सदस्य को आसपास लगने वाली शाखाओं पर भेजने का आग्रह किया जाएगा। इसके अलावा तीन दिन पूर्व प्रचारकों से संघ की कार्ययोजना के अनुसार काम कराया जाएगा।
इसके तहत उन्हें दूसरे स्थानों पर भी भेजकर संघ के कामकाज को मजबूत बनाने का काम सौंपा जाएगा। पूर्व प्रचारकों को संबंधित क्षेत्र में भगवा टोली के कामकाज की जमीनी हकीकत की रिपोर्ट भी देने का जिम्मा सौंपा गया है।