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नहीं रहीं पूर्व कांग्रेसी नेता स्वरूप कुमारी बक्शी, 22 जून को पूरे करती जीवन के 100 साल
Sun, 14 Apr 2019 12:12 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sun, 14 Apr 2019 12:12 AM IST
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स्वरूप कुमारी बक्शी
- फोटो : amar ujala
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वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता स्वरूप कुमारी बख्शी का शनिवार देर रात निधन हो गया। 22 जून 2019 को वह अपने जीवन के 100 साल पूरे करती लेकिन सबकी प्यारी बख्शी दीदी इससे पहले ही सबको छोड़कर चली गई।
कमजोरी के चलते उन्हें 10 अप्रैल को डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था। जहां शनिवार रात 9.02 मिनट पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। रविवार सुबह 10.45 बजे उनकी अंतिम यात्रा भैंसाकुंड के लिए रवाना होगी। जहां उनका अंतिम संस्कार होगा।
बख्शी दीदी की इकलौती बेटी ऊषा मालवीय अंतिम समय पर उनके साथ थी। उन्होंने बताया कि 22 जून 1919 को स्वरूप कुमारी बख्शी का जन्म हुआ था। वह 99 साल नौ माह और लगभग 22 दिन की थी। उन्हें शारीरिक कमजोरी की शिकायत के बाद 10 अप्रैल को लोहिया इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया।
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कमजोरी के चलते उन्हें 10 अप्रैल को डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था। जहां शनिवार रात 9.02 मिनट पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। रविवार सुबह 10.45 बजे उनकी अंतिम यात्रा भैंसाकुंड के लिए रवाना होगी। जहां उनका अंतिम संस्कार होगा।
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बख्शी दीदी की इकलौती बेटी ऊषा मालवीय अंतिम समय पर उनके साथ थी। उन्होंने बताया कि 22 जून 1919 को स्वरूप कुमारी बख्शी का जन्म हुआ था। वह 99 साल नौ माह और लगभग 22 दिन की थी। उन्हें शारीरिक कमजोरी की शिकायत के बाद 10 अप्रैल को लोहिया इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया।
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स्वरूप कुमारी बक्शी
- फोटो : amar ujala
वहां जांच में पता चला कि उनका हीमोग्लोबिन कम था। जिसके चलते वह खून की कमी का शिकार थी। साथ ही उनको फेफड़ों में संक्रमण के चलते सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। चार दिन तक इलाज के बाद शनिवार रात उनका निधन हो गया।
बेटी ऊषा मालवीय ने बताया कि रविवार सुबह 10.45 बजे उनकी अंतिम यात्रा कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित आवास ‘राजभवन’ से भैंसाकुंड के लिए रवाना होगी। उन्होंने बताया कि वह स्वयं, पति नीलांबर मालवीय और उनकी बेटी स्वरूप कुमारी बख्शी के साथ रहती थी। कांग्रेस के पदाधिकारियों को बख्शी दीदी के निधन की सूचना दे दी गई है।
बेटी ऊषा मालवीय ने बताया कि रविवार सुबह 10.45 बजे उनकी अंतिम यात्रा कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित आवास ‘राजभवन’ से भैंसाकुंड के लिए रवाना होगी। उन्होंने बताया कि वह स्वयं, पति नीलांबर मालवीय और उनकी बेटी स्वरूप कुमारी बख्शी के साथ रहती थी। कांग्रेस के पदाधिकारियों को बख्शी दीदी के निधन की सूचना दे दी गई है।
राजभवन में छा गया सन्नाटा
स्वरूप कुमारी बक्शी
- फोटो : amar ujala
बख्शी दीदी के निधन के बाद रविवार रात को ‘राजभवन’ में अजीब सा सन्नाटा छा गया। उत्तर प्रदेश में कई बार मंत्री रहने के बावजूद उन्होंने कभी सरकारी आवास नहीं लिया। हमेशा राजभवन में ही रहीं। बख्शी दीदी के निजी सचिव विजय सक्सेना ने बताया कि उन्हें राजभवन से बहुत लगाव था। इसलिए वह मंत्री रहने के बावजूद कभी भी सरकारी आवास में नहीं रही।
सर्दियों में भी सुबह 7.30 से 11 बजे तक वह राजभवन के अपने ऑफिस में बैठती थी। इसके बाद विधान भवन के लिए निकलती थी। विजय सक्सेना ने बताया कि आवास पर उनसे मिलने का वालों की भीड़ लगी रहती थी। कोई भी उनके पास से निराश होकर नहीं लौटता था।
यदि कोई उन्हें मिठाई आदि देता तो वह उसे बाहर गरीबों में बंटवा देती थी। विजय सक्सेना ने बताया कि बख्शी दीदी का उन्हें बहुत स्नेह मिला। वह जब भी उन्हें मिलती तो पूरे परिवार का हालचाल लेती थी। कुछ दिन पहले ही वह चलते हुए बरामदे में आ गई थी। जैसे उन्हें देखा तो सिर पर हाथ फेरते हुए बेटा-बेटी के बारे में पूछा। इसकेबाद फिर अंदर चली गई।
सर्दियों में भी सुबह 7.30 से 11 बजे तक वह राजभवन के अपने ऑफिस में बैठती थी। इसके बाद विधान भवन के लिए निकलती थी। विजय सक्सेना ने बताया कि आवास पर उनसे मिलने का वालों की भीड़ लगी रहती थी। कोई भी उनके पास से निराश होकर नहीं लौटता था।
यदि कोई उन्हें मिठाई आदि देता तो वह उसे बाहर गरीबों में बंटवा देती थी। विजय सक्सेना ने बताया कि बख्शी दीदी का उन्हें बहुत स्नेह मिला। वह जब भी उन्हें मिलती तो पूरे परिवार का हालचाल लेती थी। कुछ दिन पहले ही वह चलते हुए बरामदे में आ गई थी। जैसे उन्हें देखा तो सिर पर हाथ फेरते हुए बेटा-बेटी के बारे में पूछा। इसकेबाद फिर अंदर चली गई।
इकलौती थी परिवार में
स्वरूप कुमारी बक्शी
- फोटो : amar ujala
बख्शी दीदी परिवार में इकलौती थी। उनका कोई भाई-बहन नहीं था। उनके पिता भी अपने परिवार में इकलौते थे। इसी तरह बख्शी दीदी के भी सिर्फ एक बेटी ऊषा मालवीय हैं। ऊषा के भी एक बेटी है। जो उनकेसाथ राजभवन में रहती है।