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कोहरे में अब नहीं थमेंगे ट्रेनों के पहिए, तैयार की गई है ये डिवाइस, जल्द होगा ट्रायल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 05 Oct 2018 12:08 PM IST
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- फोटो : डेमो
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कोहरे में अब ट्रेनों की रफ्तार नहीं थमेगी। अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने इसके लिए फॉग विजन डिवाइस तैयार की है। उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी घटकर शून्य तक पहुंच जाती है।
ऐसे में ट्रेनों की रफ्तार घट जाती है और वे घंटों विलंब से चलती हैं। उत्तर, पूर्वोत्तर व उत्तर मध्य रेलवे की ट्रेनें कोहरे के कारण सर्वाधिक लेट होती हैं। इससे यात्रियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए आरडीएसओ को फॉग विजन डिवाइस बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
आरडीएसओ के अधिकारियों ने बताया कि फॉग विजन डिवाइस का प्रोटोटाइप तैयार हो गया है। इस माह के अंत तक डिवाइस ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगी। इसे आलमबाग स्थित डीजल शेड में लोको में लगाया जाएगा, जहां से ट्रायल शुरू होगा।
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ऐसे में ट्रेनों की रफ्तार घट जाती है और वे घंटों विलंब से चलती हैं। उत्तर, पूर्वोत्तर व उत्तर मध्य रेलवे की ट्रेनें कोहरे के कारण सर्वाधिक लेट होती हैं। इससे यात्रियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए आरडीएसओ को फॉग विजन डिवाइस बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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आरडीएसओ के अधिकारियों ने बताया कि फॉग विजन डिवाइस का प्रोटोटाइप तैयार हो गया है। इस माह के अंत तक डिवाइस ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगी। इसे आलमबाग स्थित डीजल शेड में लोको में लगाया जाएगा, जहां से ट्रायल शुरू होगा।
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जल्द जुड़ेंगी कई और उपलब्धियां
यह डिवाइस राडार व इन्फ्रारेड विजन पर काम करेगी। इससे स्क्रीन पर एक इमेज बनेगी, जिससे लोको पायलट ट्रैक पर आने वाली अड़चनों के बारे में जान सकेगा। रेलवे बजट में डीजल इंजनों में फॉग विजन डिवाइस के लिए एक करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी।
टक्कर होने पर ट्रेन को नुकसान से बचाने के लिए आरडीएसओ में तैयार किया गया ट्रेन कोलिजन एवॉयडेंस सिस्टम यानी टीकास का काम भी अंतिम चरण में है। सिकंदराबाद के रेलखंड पर इसका ट्रायल पूरा होने वाला है। ट्रैक के टूटने, रेल फ्रैक्चर आदि की जानकारी के लिए सिस्टम भी आगामी मार्च तक काम करने लगेगा। इसका ट्रायल इलाहाबाद व मुरादाबाद के रेलखंडों पर हो रहा है।
टक्कर होने पर ट्रेन को नुकसान से बचाने के लिए आरडीएसओ में तैयार किया गया ट्रेन कोलिजन एवॉयडेंस सिस्टम यानी टीकास का काम भी अंतिम चरण में है। सिकंदराबाद के रेलखंड पर इसका ट्रायल पूरा होने वाला है। ट्रैक के टूटने, रेल फ्रैक्चर आदि की जानकारी के लिए सिस्टम भी आगामी मार्च तक काम करने लगेगा। इसका ट्रायल इलाहाबाद व मुरादाबाद के रेलखंडों पर हो रहा है।