यूपी: अवध के जिलों में गांवों तक पहुंचा बाढ़ का कहर, खतरे के निशान से ऊपर पहुंची नदियां
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अवध के ज्यादातर जिलों में बाढ़ का कहर बढ़ने लगा है। जहां घाघरा-शारदा और सरयू नदियां अयोध्या और अंबेडकरनगर में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं हैं।
वहीं सीतापुर-बहराइच और बाराबंकी समेत आसपास के कई जिलों में बाढ़ का पानी गांवों के मुहाने तक पहुंच गया है। बहराइच में घाघरा का जलस्तर घटना शुरू हुआ है लेकिन कटान तेज हो गई है।
उधर अंबेडकरनगर में सरयू नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण माझा क्षेत्र के ग्रामीणों में हड़कंप का माहौल है ग्रामीणों ने पलायन की तैयारी कर दी है।
अयोध्या में सरयू में बुधवार शाम सरयू का जलस्तर 92.85 मीटर पर आकर थम गया। वहीं सीतापुर के रेउसा पहाड़ों पर होने वाली भारी बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी के कारण घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
गांवों की तरफ तेजी से बढ़ रही सरयू की धारा, ग्रामीण बोले- घर छोड़ने को होना है विवश
अंबेडकरनगर जिले की सरजू नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण पानी नदी से सटे गांवों की तरफ तेजी से बढ़ने लगा है। इससे माझा क्षेत्र के ग्रामीणों में हड़कंप का माहौल है। वे पलायन की भी तैयारी कर चुके हैं। तीन मजरों में तो सरयू का पानी सड़क तक चढ़ भी गया है। इससे ग्रामीणों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। उधर, तहसील प्रशासन बाढ़ से निपटने की तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहा है।
सरयू में पिछले तीन दिनों से लगातार जल स्तर में वृद्धि हो रही है। इसके चलते आलापुर तहसील क्षेत्र के तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ने लगा है। सरयू नदी का पानी तीन मजरों तक पहुंच चुका है। इससे संबंधित ग्रामीणों को रास्तों पर पानी चढ़ जाने से पानी में घुसकर आवागमन करने को विवश होना पड़ रहा है।
नदी के किनारे स्थित कम्हरिया, माझा कम्हरिया व आराजी देवारा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। इस बीच जलस्तर बढ़ने के कारण आराजी देवारा ग्राम पंचायत के प्रसादकुर्मी का पूरा, हंशू का पूरा व सिद्धनाथ का पूरा गांव के ग्रामीणों को पानी में घुसकर आवागमन करना पड़ रहा है। कारण यह कि कई मार्गों के ऊपर से पानी बह रहा है।
माझा कम्हरिया ग्राम पंचायत के पटपरवा, कल्लू का पूरा, बद्री का पूरा गांवों की तरफ भी पानी बढ़ रहा है। ऐसे में गांव लगातार नदी के पानी से घिरते जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में हड़कंप की स्थिति है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल स्तर में ज्यादा इजाफा हुआ तो आने वाले दिनों में उन्हें गांव छोड़ने के लिए विवश होना पड़ेगा।
रिमझिम बारिश ने बढ़ाई परेशानी, जलभराव से दिक्कत
बाराबंकी जिले में हो रही बारिश लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई। कई जगह भारी जलभराव से लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हुई। बुधवार को हुई 8.2 मिमी बारिश धान की अगैती फसल के लिए नुकसानदायक तो पछैती के लिए फायदेमंद रही।
जिले में बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू हुई रिमझिम बारिश देर शाम तक होती रही। ऐसे में खेतों मे सूख रही धान की फसल के लिए बारिश संजीवनी बन गई। हालांकि लंबी लाक वाली अगैती फसल के लिए बारिश से नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
कई किसानों की फसल तो खेतों में गिर गई। कई जगह जलभराव होने से लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत हुई। पूरे दिन हुई बारिश से पटरी दुकानदारों का धंधा फीका रहा तो बाजार में भी रौनक कम रही। जरूरी काम के लिए लोगों को बारिश में भीगते हुए ही जाना पड़ा। कृषि विभाग की मानें तो बुधवार को जिले में 8.2 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
अयोध्या में सरयू लाल निशान से ऊपर, खतरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना
पहाड़ों पर हो रही बारिश व नेपाल से छोड़े गए पानी के चलते सरयू नदी उफनाई हुई है। उधर, अब कटान का खतरा बढ़ गया है। बुधवार शाम सरयू का जलस्तर 92.85 मीटर पर आकर थम गया। सरयू अभी भी लाल निशान से 12 सेमी. ऊपर है। बाढ़ के संभावित खतरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह से चौकन्ना है।
सरयू के रौद्र रूप के चलते तटीय इलाकों में हलचल बढ़ गई है। बाढ़ से भयभीत गांवों के लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन की कवायद में जुट गए हैं। प्रशासन ने लेखपालों को प्रभावित इलाकों में कैंप करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार से शुरू हुआ सरयू के जलस्तर में वृद्धि का क्रम बुधवार की दोपहर तक जारी रहा। शाम तक सरयू लाल निशान से 12 सेमी. ऊपर पहुंचकर थम गई।
केंद्रीय जल आयोग के सहायक अभियंता संजय कुशवाहा ने बताया कि बुधवार शाम 5 बजे सरयू का जलस्तर 92.85 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हो गया है। उधर, कछार इलाकों में बाढ़ के संभावित खतरे को लेकर हलचल है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते कटान का खतरा भी बढ़ गया है।
सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा, तीन गांव घिरे, ग्रामीण सहमे
सहमे ग्रामीणों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है। तीनों बैराजों से बुधवार को फिर सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। पानी के गांजर पहुंचने पर हालात बेकाबू हो सकते हैं।
पिछले एक सप्ताह से नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय क्षेत्र के हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। घाघरा के किनारे फौजदारपुरवा, कोनी, परमेश्वरपुरवा, मरेली, चौकीपुरवा, ठेकेदारपुरवा, सलामतपुरवा, जैतहिया, बिल्लरपुरवा, दुर्गापुरवा, जिन्नापुरवा, लालापुरवा, खुशीराम पुरवा और शारदा के किनारे बसे जटपुरवा के संपर्क मार्ग व खेतों में पानी भरने से ग्रामीणों मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है।
घाघरा की बेकाबू लहरों ने कोनी के बाद अब परमेश्वरपुरवा को निशाने पर ले लिया है। इस गांव के राम अचल, लालजी, सियाराम व पेशकार के मकानों पर कटान की तलवार लटकने लगी है। शारदा के किनारे बसे जटपुरवा पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।