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Lucknow News: पांच रचनाकारों को मिला विभोर स्मृति सम्मान
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विभोर स्मृति सम्मान समारोह के दौरान किया गया स्मारिका का विमोचन। स्रोत आयोजक
काव्य कला संगम संस्था के तत्वावधान में आचार्य रामदेव लाल विभोर की 89वीं जयंती यूपी प्रेस क्लब में मनाई गई। इस अवसर पर पत्रिका विभोर स्मारिका का लोकार्पण किया गया। साथ ही वरिष्ठ कवियों को आचार्य रामदेव लाल ''विभोर'' स्मृति सम्मान 2025 से नवाजा गया।
समारोह के अध्यक्ष डॉ. हरिशंकर मिश्र जी ने कहा कि विभोर जी ने प्रासंगिक विपुल साहित्य की सर्जना की और लक्षण ग्रंथ भी लिखे। कहा, वे आचार्य कवि की कोटि में आने वाले मनीषी हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व प्रेरक और मार्गदर्शक है। इस मौके पर मुरलीधर पांडेय (मुंबई), रामकिशोर तिवारी (बाराबंकी), उमेश चंद्र दुबे, अवधेश गुप्त ''नमन'' और डॉ. सुषमा विप्लव ''सौम्या'' को आचार्य रामदेव लाल विभोर स्मृति सम्मान-2025 से अलंकृत किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. राम कठिन सिंह ने कहा कि अप्रतिम साहित्यिक प्रतिभा के धनी रामदेव लाल ''विभोर'' एक उच्च कोटि के कवि तो थे ही, साथ ही छे कविता के महत्व को समझने के लिए उन्होंने जो छंद-विधान पर शोधपूर्ण कार्य किया, वह अद्वितीय है। विशिष्ट अतिथि साहित्य भूषण मधुकर अष्ठाना ने अपनी काव्य पंक्तियों के जरिये अपनी बात रखी। उन्होंने सुनाया- जिए तो ऐसे कि फूलों के साथ नाम रहा, हमारे दिल में बसे आप खुशबुओं की तरह। विशिष्ट अतिथि डॉ. अमिता दुबे ने कहा कि रामदेव लाल ''विभोर'' का जीवन और उनका रचनाकर्म निश्चित रूप से विभोर करने वाला है। उनकी महत्वपूर्ण कृतियां विशेषकर नीम की छांव, छंद-विधान एवं गजल ज्ञान साहित्य जगत की धरोहर हैं।
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संस्था के अध्यक्ष डॉ. गोपालकृष्ण शर्मा ''मृदुल'' ने कहा कि विभोर जी में कवि और आचार्य का दुर्लभ मणि-कांचन संयोग था। समारोह में विभोर जी के पुत्र व संस्था के महामंत्री राजेश श्रीवास्तव के अलावा मुकेश श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव, अखिलेश श्रीवास्तव व विकास श्रीवास्तव समेत पूरा परिवार मौजूद रहा। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन आवारा नवीन व नवीन शुक्ल ''नवीन'' ने किया।
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समारोह के अध्यक्ष डॉ. हरिशंकर मिश्र जी ने कहा कि विभोर जी ने प्रासंगिक विपुल साहित्य की सर्जना की और लक्षण ग्रंथ भी लिखे। कहा, वे आचार्य कवि की कोटि में आने वाले मनीषी हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व प्रेरक और मार्गदर्शक है। इस मौके पर मुरलीधर पांडेय (मुंबई), रामकिशोर तिवारी (बाराबंकी), उमेश चंद्र दुबे, अवधेश गुप्त ''नमन'' और डॉ. सुषमा विप्लव ''सौम्या'' को आचार्य रामदेव लाल विभोर स्मृति सम्मान-2025 से अलंकृत किया गया।
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मुख्य अतिथि डॉ. राम कठिन सिंह ने कहा कि अप्रतिम साहित्यिक प्रतिभा के धनी रामदेव लाल ''विभोर'' एक उच्च कोटि के कवि तो थे ही, साथ ही छे कविता के महत्व को समझने के लिए उन्होंने जो छंद-विधान पर शोधपूर्ण कार्य किया, वह अद्वितीय है। विशिष्ट अतिथि साहित्य भूषण मधुकर अष्ठाना ने अपनी काव्य पंक्तियों के जरिये अपनी बात रखी। उन्होंने सुनाया- जिए तो ऐसे कि फूलों के साथ नाम रहा, हमारे दिल में बसे आप खुशबुओं की तरह। विशिष्ट अतिथि डॉ. अमिता दुबे ने कहा कि रामदेव लाल ''विभोर'' का जीवन और उनका रचनाकर्म निश्चित रूप से विभोर करने वाला है। उनकी महत्वपूर्ण कृतियां विशेषकर नीम की छांव, छंद-विधान एवं गजल ज्ञान साहित्य जगत की धरोहर हैं।
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संस्था के अध्यक्ष डॉ. गोपालकृष्ण शर्मा ''मृदुल'' ने कहा कि विभोर जी में कवि और आचार्य का दुर्लभ मणि-कांचन संयोग था। समारोह में विभोर जी के पुत्र व संस्था के महामंत्री राजेश श्रीवास्तव के अलावा मुकेश श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव, अखिलेश श्रीवास्तव व विकास श्रीवास्तव समेत पूरा परिवार मौजूद रहा। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन आवारा नवीन व नवीन शुक्ल ''नवीन'' ने किया।