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बैठक का पहला दिन: हर धर्म में छिपे तालिबानी सोच के लोगों को बेनकाब करेगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
Mon, 23 Aug 2021 09:08 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 23 Aug 2021 09:08 PM IST
सार
राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मुईन अहमद ने बताया कि धार्मिक कट्टरता के खिलाफ जागरूकता अभियान, मॉबलिंचिंग पर रोक लगाने, इबादतगाहों की सुरक्षा, केंद्रीय वक्फ एक्ट में संशोधन, सूफीवादी विचारधारा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिये काम करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।
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बैठक का एक दृश्य।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक के पहले दिन सोमवार को धार्मिक कट्टरता के खिलाफ अभियान चलाने पर सहमति बनी। पदाधिकारियों ने माना कि तालिबानी विचारधारा कट्टरवाद पर आधारित है जो सभी धर्म के मानने वालों में मौजूद है। तय हुआ कि हर धर्म में छिपे तालिबानी सोच के लोगों को बोर्ड बेनकाब करेगा। वर्ष 2017 में गठित बोर्ड ने दावा किया कि वह 85 फीसदी सुन्नी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है।
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चारबाग के एक होटल में चल रही बैठक के बाद राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मुईन अहमद ने बताया कि धार्मिक कट्टरता के खिलाफ जागरूकता अभियान, मॉबलिंचिंग पर रोक लगाने, इबादतगाहों की सुरक्षा, केंद्रीय वक्फ एक्ट में संशोधन, सूफीवादी विचारधारा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिये काम करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।
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उन्होंने कहा कि धार्मिक कट्टरता समाज व राष्ट्र को खोखला कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सूफीवादी धर्मस्थलों का प्रबंधन वहाबी विचारधारा के हवाले करने की मुहिम चलाई है। मौजूदा वक्फ एक्ट में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को विफल करार दिया। कहा कि बोर्ड में 22 राज्यों का प्रतिनिधित्व है।
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अध्यक्ष मौलाना कारी यूसुफ अजीजी की अध्यक्षता में हुई बैठक का संचालन प्रवक्ता रियाजुददीन कादरी ने किया। बैठक में कर्नाटक के मौलाना तनवरी हाशमी, सूफी साजिद हुसैन अजमेरी, हाफिज मोहम्मद अली कादरी, आंध्रप्रदेश अध्यक्ष सूफी अलताफ रजा, राजस्थान अध्यक्ष मुफ्ती शमीम और उत्तराखंड से मौलाना जाहिद रजा रजवी सहित कई प्रदेशों से पदाधिकारी शामिल हुए।