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रिटायर्ड डीआईजी समेत तीन लोगों ने रोहतास कंपनी पर किया ठगी का केस
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रिटायर्ड डीआईजी समेत तीन ने रोहतास पर दर्ज कराया ठगी का केस
हजरतगंज कोतवाली में रिटायर्ड डीआईजी दद्दनजी शर्मा समेत तीन लोगों ने रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड कंपनी के सीईओ परेश रस्तोगी व अन्य अधिकारियों के खिलाफ ठगी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है।
इंस्पेक्टर राधारमण सिंह ने बताया कि रोहतास कंपनी ने किसी को फ्लैट तो किसी को प्लॉट का झांसा देकर रुपया ऐंठा था। मामलों की जांच की जा रही है।
इंस्पेक्टर ने बताया कि रिटायर्ड आईपीएस दद्दन जी शर्मा रायबरेली रोड स्थित साउथ सिटी कॉलोनी में रहते हैं।
उनके परिचित ने सुल्तानपुर रोड के कासिमपुर विरुहा में रोहतास कंपनी की प्लॉटिंग योजना के बारे में बताया।
नौ सितंबर 2014 को वह परिचित के साथ हजरतगंज के राजा राम मोहन राय स्थित रोहतास कंपनी के कार्यालय पहुंच गए।
वहां सीईओ परेश रस्तोगी व अन्य अधिकारियों ने उन्हें प्लॉट व कंपनी की योजना के बारे में जानकारी दी।
अधिकारियों का कहना था कि प्लॉट की बुकिंग कराने पर वह दो से ढाई साल बाद या तो प्लॉट ले सकते हैं या फिर डेढ़ गुना रुपया वापस ले सकते हैं।
रिटायर्ड डीआईजी ने 1350 वर्ग फीट का एक प्लॉट बुक कराते हुए कंपनी को चेक के जरिए दस लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
कंपनी ने उनसे 30 महीने बाद प्लॉट पर कब्जा देने अथवा 15 लाख रुपये देने का अनुबंध किया। समय पूरा होने के बाद रिटायर्ड डीआईजी ने प्लॉट अथवा रुपयों की मांग की तो कंपनी के अधिकारी टालमटोल करने लगे।
उन्होंने कंपनी को नोटिस दिया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने हजरतगंज कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई। रिटायर्ड डीआईजी का कहना है कि उनकी मूल रकम व ब्याज मिलाकर 18 लाख रुपये कंपनी पर बनते हैं।
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दूसरा मामला आशियाना के सेक्टर एम निवासी पारिजात का है। पारिजात ने बताया कि उन्होंने 29 अक्तूबर 2012 में प्रमोद कुमार शर्मा के माध्यम से सुल्तानपुर रोड पर कंपनी की योजना में 300 वर्ग गज का प्लॉट बुक कराया था।
प्लाट की कीमत 13.50 लाख रुपये बताई गई थी जिसका उन्होंने नकद व भारतीय स्टेट बैंक की विभिन्न तिथियों की चेक के जरिए भुगतान कर दिया।
कंपनी के अधिकारियों ने प्लॉट न दे पाने की दशा में 8500 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से रुपया वापस करने का अनुबंध किया था।
हालांकि, प्लॉट मिला न ही रुपया वापस किया गया। पारिजात का कहना है कि 8500 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से कंपनी को उन्हें 25.50 लाख रुपये देने हैं।
इसमें ब्याज के तीन लाख रुपये अतिरिक्त हैं। यानी कंपनी से पारिजात को कुल 28.50 लाख रुपये लेने हैं।
उन्होंने भी हजरतगंज कोतवाली में रोहतास कंपनी के सीईओ परेश रस्तोगी, एमडी पीयूष रस्तोगी, निदेशक पंकज रस्तोगी, वाइस प्रेसीडेंट नितिन भाटिया, लाइजनिंग ऑफिसर राकेश गर्ग व कंपनी के वित्तीय प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराया है।
इसके अलावा अमीनाबाद के गणेशगंज स्थित चंद्रशेखर आजाद मार्ग निवासी मो. करीम फारुकी ने फ्लैट के नाम पर नौ लाख रुपये ठगने के आरोप में रोहतास कंपनी के अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराई है।
फारुकी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012 में गोखले मार्ग पर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के सामने स्थित रोहतास प्लेटिना में फ्लैट बुक कराया था।
एडवांस के तौर पर उन्होंने कंपनी के सीईओ परेश रस्तोगी को 11.13 लाख रुपया दिया था। परेश रस्तोगी ने तीन वर्ष के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करके फ्लैट पर कब्जा देने का आश्वासन दिया, लेकिन सात साल बाद भी कब्जा नहीं मिला।
काफी दबाव डालने पर उसने दो लाख रुपये नकद लौटाए व तीन-तीन लाख रुपये के तीन चेक दिए जो बाउंस हो गए। इसके बाद से परेश रस्तोगी कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टरका रहा है। फारुकी का कहना है कि कंपनी ने उनके 9.13 लाख रुपये हड़प लिए हैं।
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हजरतगंज कोतवाली में रिटायर्ड डीआईजी दद्दनजी शर्मा समेत तीन लोगों ने रोहतास प्रोजेक्ट लिमिटेड कंपनी के सीईओ परेश रस्तोगी व अन्य अधिकारियों के खिलाफ ठगी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है।
इंस्पेक्टर राधारमण सिंह ने बताया कि रोहतास कंपनी ने किसी को फ्लैट तो किसी को प्लॉट का झांसा देकर रुपया ऐंठा था। मामलों की जांच की जा रही है।
इंस्पेक्टर ने बताया कि रिटायर्ड आईपीएस दद्दन जी शर्मा रायबरेली रोड स्थित साउथ सिटी कॉलोनी में रहते हैं।
उनके परिचित ने सुल्तानपुर रोड के कासिमपुर विरुहा में रोहतास कंपनी की प्लॉटिंग योजना के बारे में बताया।
नौ सितंबर 2014 को वह परिचित के साथ हजरतगंज के राजा राम मोहन राय स्थित रोहतास कंपनी के कार्यालय पहुंच गए।
वहां सीईओ परेश रस्तोगी व अन्य अधिकारियों ने उन्हें प्लॉट व कंपनी की योजना के बारे में जानकारी दी।
अधिकारियों का कहना था कि प्लॉट की बुकिंग कराने पर वह दो से ढाई साल बाद या तो प्लॉट ले सकते हैं या फिर डेढ़ गुना रुपया वापस ले सकते हैं।
रिटायर्ड डीआईजी ने 1350 वर्ग फीट का एक प्लॉट बुक कराते हुए कंपनी को चेक के जरिए दस लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
कंपनी ने उनसे 30 महीने बाद प्लॉट पर कब्जा देने अथवा 15 लाख रुपये देने का अनुबंध किया। समय पूरा होने के बाद रिटायर्ड डीआईजी ने प्लॉट अथवा रुपयों की मांग की तो कंपनी के अधिकारी टालमटोल करने लगे।
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उन्होंने कंपनी को नोटिस दिया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने हजरतगंज कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई। रिटायर्ड डीआईजी का कहना है कि उनकी मूल रकम व ब्याज मिलाकर 18 लाख रुपये कंपनी पर बनते हैं।
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दूसरा मामला आशियाना के सेक्टर एम निवासी पारिजात का है। पारिजात ने बताया कि उन्होंने 29 अक्तूबर 2012 में प्रमोद कुमार शर्मा के माध्यम से सुल्तानपुर रोड पर कंपनी की योजना में 300 वर्ग गज का प्लॉट बुक कराया था।
प्लाट की कीमत 13.50 लाख रुपये बताई गई थी जिसका उन्होंने नकद व भारतीय स्टेट बैंक की विभिन्न तिथियों की चेक के जरिए भुगतान कर दिया।
कंपनी के अधिकारियों ने प्लॉट न दे पाने की दशा में 8500 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से रुपया वापस करने का अनुबंध किया था।
हालांकि, प्लॉट मिला न ही रुपया वापस किया गया। पारिजात का कहना है कि 8500 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से कंपनी को उन्हें 25.50 लाख रुपये देने हैं।
इसमें ब्याज के तीन लाख रुपये अतिरिक्त हैं। यानी कंपनी से पारिजात को कुल 28.50 लाख रुपये लेने हैं।
उन्होंने भी हजरतगंज कोतवाली में रोहतास कंपनी के सीईओ परेश रस्तोगी, एमडी पीयूष रस्तोगी, निदेशक पंकज रस्तोगी, वाइस प्रेसीडेंट नितिन भाटिया, लाइजनिंग ऑफिसर राकेश गर्ग व कंपनी के वित्तीय प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कराया है।
इसके अलावा अमीनाबाद के गणेशगंज स्थित चंद्रशेखर आजाद मार्ग निवासी मो. करीम फारुकी ने फ्लैट के नाम पर नौ लाख रुपये ठगने के आरोप में रोहतास कंपनी के अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराई है।
फारुकी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012 में गोखले मार्ग पर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के सामने स्थित रोहतास प्लेटिना में फ्लैट बुक कराया था।
एडवांस के तौर पर उन्होंने कंपनी के सीईओ परेश रस्तोगी को 11.13 लाख रुपया दिया था। परेश रस्तोगी ने तीन वर्ष के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करके फ्लैट पर कब्जा देने का आश्वासन दिया, लेकिन सात साल बाद भी कब्जा नहीं मिला।
काफी दबाव डालने पर उसने दो लाख रुपये नकद लौटाए व तीन-तीन लाख रुपये के तीन चेक दिए जो बाउंस हो गए। इसके बाद से परेश रस्तोगी कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टरका रहा है। फारुकी का कहना है कि कंपनी ने उनके 9.13 लाख रुपये हड़प लिए हैं।