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UP: केस में फाइनल रिपोर्ट मंजूर नहीं; JVS फूड्स को मिला पुष्टाहार आपूर्ति का काम, अफसरों से मिलीभगत की आशंका

Fri, 05 Jun 2026 08:39 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Fri, 05 Jun 2026 08:39 PM IST
सार

केस में फाइनल रिपोर्ट मंजूर नहीं हुई है। लेकिन, JVS फूड्स को पुष्टाहार आपूर्ति का काम मिल गया है। कंपनी ने उत्पादन इकाई लगा दी है। बता दें, टेंडर की शर्तों में विवादित कंपनी को काम नहीं दिए जाने की शर्त थी। मामले में कंपनी की अधिकारियों से मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। इसकी शिकायत शासन तक पहुंची है। आगे पढ़ें पूरी खबर... 

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Final report in case not accepted JVS Foods awarded contract for supplementary nutrition supply in UP
पुष्टाहार (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में पुष्टाहार की आपूर्ति करने वाली जेवीएस फूड्स को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के मामले में एक और खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के खिलाफ दर्ज एफआईआर में फाइनल रिपोर्ट लगने की ईओडब्ल्यू की संस्तुति पर न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय लेने से पहले उसे दोबारा पुष्टाहार आपूर्ति का काम मिल गया। इतना ही नहीं, कंपनी ने राजधानी में अपनी उत्पादन इकाई भी स्थापित कर दी। इसकी वजह से इस मामले में कंपनी और विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
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बता दें कि जयपुर की जेवीएस फूड्स और बरेली की खंडेलवाल सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ वर्ष 2018 में बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अपर निदेशक शत्रुघन सिंह ने अनुबंध की शर्तों के मुताबिक कार्य न करने, राज्य, केंद्र सहायतित एवं विश्व खाद्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित परियोजनाओं में पोषाहार की आपूर्ति के क्रय में अनियमितताओं, गुणवत्ता में अनियमितताओं तथा व्यापार कर की धनराशि के गबन के आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई थी। 
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शासन के निर्देश पर यह एफआईआर दर्ज की गई थी

इससे पहले शासन के निर्देश पर ईओडब्ल्यू ने ही दोनों कंपनियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच की थी, जिसमें आरोप सही पाए जाने पर शासन के निर्देश पर यह एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि करीब 8 साल की जांच के बाद ईओडब्ल्यू के विवेचक ने अपनी एजेंसी द्वारा पूर्व में दी गई रिपोर्ट को ही दरकिनार कर कोई साक्ष्य नहीं मिलने और कंपनी द्वारा व्यापार कर की धनराशि जमा करने पर एफआईआर में फाइनल रिपोर्ट लगाने की संस्तुति कर दी, जिस पर गृह विभाग ने भी मुहर लगा दी। 

अधिकारियों ने भी इस मामले की पुनर्विवेचना कराने की जहमत तक नहीं की। फाइनल रिपोर्ट को लेकर अभी न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय होना बाकी है। इस दरम्यान राज्य सरकार द्वारा नेफेड को पुष्टाहार आपूर्ति का काम दिया गया, जिसने निविदा के जरिए जेवीएस फूड्स को काम सौंप दिया।
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ब्लैकलिस्ट पर साधी चुप्पी

इस मामले में तत्कालीन अपर निदेशक ने दोनों कंपनियों को ब्लैक लिस्ट करने को कहा था। कंपनी ने विभाग के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद अदालत ने विभाग को दोबारा कंपनी का पक्ष सुनने का आदेश दिया। हालांकि दोनों कंपनियों को ब्लैकलिस्ट की सूची से हटाने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया। फाइनल रिपोर्ट लगाने के मामले के खुलासे के बाद अधिकारियों ने दोनों कंपनियों के ब्लैकलिस्ट होने की स्थिति के बारे में चुप्पी साध ली है।

कई जनप्रतिनिधियों ने की शिकायत

सूत्रों के मुताबिक नेफेड द्वारा जेवीएस फूड्स को पुष्टाहार की आपूर्ति का काम देने की शिकायत कई जनप्रतिनिधियों ने भी शासन से की है। उन्हाेंने इस बाबत लिखे पत्र में कहा है कि निविदा की शर्तों में स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि कोई भी विवाद होने की स्थिति में निविदा में हिस्सा नहीं लिया जा सकेगा। इसके बावजूद गुपचुप तरीके से जेवीएस फूड्स को काम सौंप दिया गया।
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