{"_id":"641f5c0f55c056f3b80b566d","slug":"festival-son-chiraiya-lucknow-news-c-13-lko1018-149238-2023-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: ‘देशज’ के मंच पर भारतीय संस्कृतियों का संगम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: ‘देशज’ के मंच पर भारतीय संस्कृतियों का संगम
विज्ञापन
लखनऊ। मालिनी अवस्थी की आवाज में अवध मा होली खेले रघुबीरा की बयार ...दूसरी ओर देश के विभिन्न राज्यों के दिग्गज लोक कलाकारों का पारंपरिक वस्त्रों में समागम। मौका था लोक सांस्कृतिक संस्था सोनचिरैया के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम ‘देशज’ का जहां लोहिया पार्क के परिसर में कुछ देर के लिए भारतीय गांव को बसा दिया गया।
ग्रामीण चित्रकलाओं के साथ सजे परिसर में कर्नाटक की पहली ट्रांसजेंडर नृत्यांगना पद्मश्री मंजम्मा जोगती को जोगती गायन में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए चौथे लोक निर्मला सम्मान से नवाजा गया। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि संगीत की शिक्षा से बड़ी कोई शिक्षा नहीं है। उन्होंने गुरु करे सो होय भजन गाकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पत्नी नम्रता पाठक के साथ मौजूद रहे। कार्यक्रम में मणिपुर का थांग ता और पुंग चोलम ने दर्शकों को जोश व उल्लास से भर दिया। वहीं जैसे ही पंजाब का भांगड़ा, हरियाणा का धमाल शुरु हुआ, दर्शक जगहों से उठ उठकर भारत माता की जय-जयकार करने लगे। छाऊ दल, ढेढया नृत्य, सामूहिक आल्हा गायन पर मानो धरती आनंद से सराबोर हो गई। 75 स्कूली छात्र-छात्राओं का सामूहिक आल्हा गायन दर्शकों के लिए खास रहा। बनारस, बुंदेलखंड, ब्रज,सोनभद्र, थारु, आदि की लोक संस्कृतियों ने दर्शकों को खूब लुभाया। मथुरा के बच्चों ने आल्हा गायन से ध्यान खींचा। वहीं मणिपुर की युद्ध शैली का नृत्य पुंगचोलम भी खास रहा। इस दौरान मंच को ग्रामीण परिवेश में बैलगाड़ी के पहियों व कच्ची मिट्टी के घर से सजाया गया।
विज्ञापन
अनेकता में एकता है भारतीय संस्कृति की पहचान
नृत्यांगना पद्मश्री मंजम्मा जोगती ने कहा कि भारतीय संस्कृति की यही खासियत है कि हम सब अलग-अलग जगहों के होकर भी ऐसे मिलते हैं जैसे एक ही हो। कहा कि लखनऊ की खासियत यह है कि मुझे महिला समझ कर बिना किसी भेदभाव के यह सम्मान दिया गया।
विज्ञापन
ग्रामीण चित्रकलाओं के साथ सजे परिसर में कर्नाटक की पहली ट्रांसजेंडर नृत्यांगना पद्मश्री मंजम्मा जोगती को जोगती गायन में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए चौथे लोक निर्मला सम्मान से नवाजा गया। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि संगीत की शिक्षा से बड़ी कोई शिक्षा नहीं है। उन्होंने गुरु करे सो होय भजन गाकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पत्नी नम्रता पाठक के साथ मौजूद रहे। कार्यक्रम में मणिपुर का थांग ता और पुंग चोलम ने दर्शकों को जोश व उल्लास से भर दिया। वहीं जैसे ही पंजाब का भांगड़ा, हरियाणा का धमाल शुरु हुआ, दर्शक जगहों से उठ उठकर भारत माता की जय-जयकार करने लगे। छाऊ दल, ढेढया नृत्य, सामूहिक आल्हा गायन पर मानो धरती आनंद से सराबोर हो गई। 75 स्कूली छात्र-छात्राओं का सामूहिक आल्हा गायन दर्शकों के लिए खास रहा। बनारस, बुंदेलखंड, ब्रज,सोनभद्र, थारु, आदि की लोक संस्कृतियों ने दर्शकों को खूब लुभाया। मथुरा के बच्चों ने आल्हा गायन से ध्यान खींचा। वहीं मणिपुर की युद्ध शैली का नृत्य पुंगचोलम भी खास रहा। इस दौरान मंच को ग्रामीण परिवेश में बैलगाड़ी के पहियों व कच्ची मिट्टी के घर से सजाया गया।
विज्ञापन
अनेकता में एकता है भारतीय संस्कृति की पहचान
नृत्यांगना पद्मश्री मंजम्मा जोगती ने कहा कि भारतीय संस्कृति की यही खासियत है कि हम सब अलग-अलग जगहों के होकर भी ऐसे मिलते हैं जैसे एक ही हो। कहा कि लखनऊ की खासियत यह है कि मुझे महिला समझ कर बिना किसी भेदभाव के यह सम्मान दिया गया।