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कोविड के स्ट्रेन में बदलाव की आशंका, केजीएमयू और एसजीपीजीआई में रोजाना 10 फीसदी सैंपलों की हो रही जीनोम सीक्वेंसिंग
Tue, 23 Mar 2021 11:18 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 23 Mar 2021 11:18 PM IST
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corona test
- फोटो : अमर उजाला
देशभर में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली सहित अन्य राज्यों के बाद यूपी में भी संक्रमितों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई है। सप्ताह भर में संक्रमण की दर 0.30 से बढ़कर 0.40 फीसदी पहुंच गई है। आशंका है कि कोरोना वायरस के स्ट्रेन में बदलाव आ सकता है। हालांकि, यूपी में अभी तक ऐसा मामला नहीं आया है, लेकिन आशंका को देखते हुए प्रदेश में वायरस के जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर दिया जा रहा है।
केजीएमयू और एसजीपीजीआई ने जीनोम सीक्वेंसिंग की गति बढ़ा दी है। यहां रोजाना करीब 40 जिलों से आने वाले कुल सैंपल में 10 फीसदी की जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है। वहीं, अलग-अलग दिन जिलों में बदलाव भी किया जा रहा है। जिससे प्रदेश के हर जिले की स्थिति का आकलन किया जा सके। इसमें लखनऊ के अलावा जिन जिलों में संबंधित दिन ज्यादा मरीज मिलते हैं, वहां के सैंपल अनिवार्य रूप से लिए जाते हैं।
प्रायोगिक तौर पर की गई थी जीनोम सीक्वेसिंग
केजीएमयू व एसजीपीजीआई ने कुछ समय पहले प्रायोगिक तौर पर जीनोम सीक्वेसिंग किया था। केजीएमयू ने खुद जांच की थी, जबकि एसजीपीजीआई ने सीडीआरआई के साथ मिलकर लगभग 100 सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की थी। उस वक्त करीब आठ जिलों के सैंपल की जांच की गई थी। ज्यादातर मरीजों में दिल्ली में मिला ए-2-ए स्ट्रेन पाया गया था। इसका प्रभाव सामान्य होता है।
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जांच महंगी, पर अब दायरा बढ़ाने की तैयारी
केजीएमयू माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता जैन ने बताया कि प्रायोगिक तौर पर जांच की गई है। संक्रमण थमने पर जांच कम कर दी गई थी। अब इसे बढ़ाया जा रहा है। कुल सैंपल में से करीब 10 फीसदी की जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है। रिपोर्ट से आईसीएमआर को अवगत करा दिया गया है। एसजीपीजीआई की माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. उज्ज्वला घोषाल का कहना है कि यह जांच काफी महंगी होती है। जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
तेजी से फैलता है खतरनाक स्ट्रेन ए-3-आई
जीनोम सीक्वेंसिंग से वायरस के जेनेटिक वैरिएंट का पता चलता है। इसे स्ट्रेन कहा जाता है। अब तक कोविड वायरस के 19 स्ट्रेन मिल चुके हैं। भारत में क रीब 10 तरह के स्ट्रेन पाए गए हैं। यहां सबसे ज्यादा ए-2-ए स्ट्रेन मिला है। इसके अलावा बी-4, ए-3ए, ए-1-ए, बी-1, ए-3आईए आदि भी पाए गए हैं। इनमें तेजी से फैलने वाले ए-3-आई को ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
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केजीएमयू और एसजीपीजीआई ने जीनोम सीक्वेंसिंग की गति बढ़ा दी है। यहां रोजाना करीब 40 जिलों से आने वाले कुल सैंपल में 10 फीसदी की जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है। वहीं, अलग-अलग दिन जिलों में बदलाव भी किया जा रहा है। जिससे प्रदेश के हर जिले की स्थिति का आकलन किया जा सके। इसमें लखनऊ के अलावा जिन जिलों में संबंधित दिन ज्यादा मरीज मिलते हैं, वहां के सैंपल अनिवार्य रूप से लिए जाते हैं।
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प्रायोगिक तौर पर की गई थी जीनोम सीक्वेसिंग
केजीएमयू व एसजीपीजीआई ने कुछ समय पहले प्रायोगिक तौर पर जीनोम सीक्वेसिंग किया था। केजीएमयू ने खुद जांच की थी, जबकि एसजीपीजीआई ने सीडीआरआई के साथ मिलकर लगभग 100 सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की थी। उस वक्त करीब आठ जिलों के सैंपल की जांच की गई थी। ज्यादातर मरीजों में दिल्ली में मिला ए-2-ए स्ट्रेन पाया गया था। इसका प्रभाव सामान्य होता है।
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जांच महंगी, पर अब दायरा बढ़ाने की तैयारी
केजीएमयू माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता जैन ने बताया कि प्रायोगिक तौर पर जांच की गई है। संक्रमण थमने पर जांच कम कर दी गई थी। अब इसे बढ़ाया जा रहा है। कुल सैंपल में से करीब 10 फीसदी की जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है। रिपोर्ट से आईसीएमआर को अवगत करा दिया गया है। एसजीपीजीआई की माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. उज्ज्वला घोषाल का कहना है कि यह जांच काफी महंगी होती है। जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
तेजी से फैलता है खतरनाक स्ट्रेन ए-3-आई
जीनोम सीक्वेंसिंग से वायरस के जेनेटिक वैरिएंट का पता चलता है। इसे स्ट्रेन कहा जाता है। अब तक कोविड वायरस के 19 स्ट्रेन मिल चुके हैं। भारत में क रीब 10 तरह के स्ट्रेन पाए गए हैं। यहां सबसे ज्यादा ए-2-ए स्ट्रेन मिला है। इसके अलावा बी-4, ए-3ए, ए-1-ए, बी-1, ए-3आईए आदि भी पाए गए हैं। इनमें तेजी से फैलने वाले ए-3-आई को ज्यादा खतरनाक माना जाता है।