सदमें से ब्रज में आठ और बरेली मंडल में छह किसानों की मौत
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बेमौसम बारिश व ओलों से चौपट हुई खेती से किसान तबाह हो गए हैं। भारी कर्ज और उनकी उम्मीदों पर पानी फिरने से सदमे में आए किसानों की मौतों का सिलसिला जारी है। बीते 24 घंटों में प्रदेश में 35 किसानों की जानें गई हैं। इनमें ब्रज क्षेत्र में आठ, अलीगढ़ में चार,बरेली मंडल में छह, मुरादाबाद मंडल में चार, जालौन में दो किसानों की मौत हुई है।
इसके अलावा हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, कन्नौज, बागपत, बुलंदशहर , सुल्तानपुर, बाराबंकी और दादरी आदि जिलों में एक-एक किसान की जान चली गई। आगरा में फसल बर्बाद होने से आहत एक किसान ने आत्मदाह कर लिया जबकि तीन ने सदमे से दम तोड़ दिया।
जैतपुर के गढ़वार गांव के किसान रामरूप ने आलू की फसल की लागत और भाड़ा भी न मिलने से आहत होकर अपने घर में मिट्टी का तेल छिड़ककर खुद को आग के हवाले कर लिया। गंभीर हालात में उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई।
वहीं, चित्राहाट के पाठकपुरा निवासी किसान मायाराम, गांव बसई खेरागढ़ के किसान रमेश और खेरागढ़ के ही ऊंटगिर निवासी राजेश खेत में खराब फसल को देखकर सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके और उनकी मौत हो गई।
कुछ को सदमा तो कुछ ने कर ली खुदकुशी
एटा के विकास खंड शीतलपुर के गांव शाहपुर में शनिवार रात किसान विजय सिंह की फसल बर्बाद देख सदमे से मौत हो गई। कासगंज के गांव मझौला में गेहूं की फसल की बर्बादी एवं बाग में हुए जबरदस्त नुकसान ने एक और किसान की जान ले ली। मथुरा के गांव फालैन में भी फसल की तबाही का सदमा कुशल स्वरूप बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनकी मौत हो गई।
फीरोजाबाद में थाना पचोखरा क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर में बारिश से फसल बर्बाद होने के सदमे से किसान प्रेम किशोर की मौत हो गई। परिवारीजनों ने बताया कि उन पर बैंक का सात लाख रुपये का कर्ज था।
अलीगढ़ में गोंडा के ग्राम धारा की गढ़ी निवासी 32 वर्षीय कन्हैया पुत्र जगदीश का शव रविवार को पेड़ पर लटका मिला। पिता जगदीश के अनुसार कन्हैया शनिवार सुबह 9 बजे खेत पर जाने की कह कर गया था वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा तो परिवारीजन उसकी तलाश में खेत पर पहुंचे तो उन्हें कन्हैया का शव पेड़ पर लटका दिखा।
पिता के मुताबिक कन्हैया ने फसल नष्ट होने के तनाव में आकर आत्महत्या की है। कन्हैया के चार बच्चे हैं। जगदीश के पास केवल चार बीघा जमीन है। उसी से परिवार का गुजारा हो रहा था। यहीं के खैर के गांव जरारा निवासी किसान नवाब और अंडला निवासी अशोक की सदमे से मौत हो गई, जबकि अतरौली की बाढ़ौल निवासी महिला किसान चंद्रवती ने भी इसी तरह सदमे में दम तोड़ दिया।
मर रहे हैं किसान, सो रही है सरकार
वहीं बरेली मंडल में बदायूं के उसहैत थाना क्षेत्र के गांव काकोरी में 27 वर्षीय मुनेंद्र गिरी ने गांव के बाहर पाकड़ के पेड़ पर मफलर का फंदा डालकर खुदकुशी कर ली। परिवार वालों का कहना है कि मुनेंद्र पर बैंक का भी एक लाख रुपया कर्ज था।
वहीं बरेली जिले में सदमे से चार और पीलीभीत में एक किसान की मौत हो गई। मुरादाबाद मंडल में फसल बर्बाद होने से संभल जिले के बहजोई के परतापुर गांव के किसान हरिओम रविवार सुबह खेत से लौटकर सीधे अपने कमरे में गया और मिट्टी का तेल छिड़ककर खुद को जला दिया।
अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई। संभल के ही चंदौसी थाने के बनियाठेर क्षेत्र के गांव सराय सिकंदर निवासी गुलाब सिंह की मौत सदमे से हो गई।
वहीं मुरादाबाद के नवाबपुरा इलाके की सैनी बस्ती में रह रहे महेंद्र सैन और कुंदरकी थाना क्षेत्र के पंडिया गांव निवासी किसान सोमपाल की सदमे से मौत हो गई। इसके अलावा बागपत के गांव खामपुर निवासी किसान सतेंद्र फसलों की तबाही बर्दाश्त नहीं कर पाया।
गेहूं के खेत में ही उसे दिल का दौरा पड़ गया जिससे उसकी मौत हो गई। बाराबंकी के मीतपुर मजरे निजामुद्दीनपुर निवासी गरीबे की मौत हो गई। सुल्तानपुर के सकरदे गांव में एक महिला किसान की भी रविवार सुबह जान चली गई। झांसी, बांदा, चित्रकूट, कन्नौज में भी एक-एक किसानों की सदमे से जान गई जबकि हमीरपुर में एक और जालौन में दो किसानों ने लगाई फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।