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तीन साल से नहीं हुई कृषक समृद्धि आयोग की बैठक, धर्मेंद्र मलिक का सदस्य पद से इस्तीफा
Fri, 26 Feb 2021 12:33 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 26 Feb 2021 12:33 PM IST
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इस्तीफा
- फोटो : अमर उजाला
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करीब साढ़े तीन पहले गठित कृषक समृद्धि आयोग की एक भी बैठक नहीं हो पाने पर विरोध जताते हुए धर्मेन्द्र मलिक ने सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री को भेजे गए त्यागपत्र में मलिक ने उनसे आग्रह किया है कि वे तीन कृषि कानूनों पर किसानों की चिंता से केंद्र सरकार को अवगत कराएं।
धर्मेन्द्र मलिक ने कहा है कि किसान हितों के लिए 10 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कृषक समृद्धि आयोग का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य किसानों की समस्याओं की जानकारी कर समाधान करना था। उन्हें आयोग में गैर सरकारी सदस्य व किसान संगठन (भाकियू) के प्रतिनिधि के तौर पर नामित किया गया था। त्यागपत्र में मलिक ने दुख जताया कि तीन साल में आयोग की एक भी बैठक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पिछले साल लाए गए कृषि कानूनों को लेकर देश भर में भारत सरकार व किसानों के बीच गतिरोध चल रहा है। पिछले तीन माह से किसानों ने कड़ाके की सर्दी में अपना कीमती समय सड़कों पर बिता दिया लेकिन केंद्र सरकार कोई समाधान नहीं निकाल पाई।
न सुझाव भेजे, न संवाद किया...
मलिक ने कहा कि कृषि कानूनों जैसे गंभीर विषय पर भी आयोग की तरफ से भारत सरकार को सुझाव नहीं भेजे गए। इस विषय पर प्रदेश के किसानों की राय जानने के लिए संवाद भी नहीं किया गया। आयोग का गठन जिस उद्देश्य को लेकर किया गया था, आयोग उसे पूरा नहीं कर पाया है। उन्होंने त्यागपत्र भेजते हुए उम्मीद जताई है कि प्रदेश सरकार तीन कृषि कानूनों पर किसानों की चिंताओं से केंद्र सरकार को अवगत कराएगी।
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धर्मेन्द्र मलिक ने कहा है कि किसान हितों के लिए 10 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कृषक समृद्धि आयोग का गठन किया गया था। इसका उद्देश्य किसानों की समस्याओं की जानकारी कर समाधान करना था। उन्हें आयोग में गैर सरकारी सदस्य व किसान संगठन (भाकियू) के प्रतिनिधि के तौर पर नामित किया गया था। त्यागपत्र में मलिक ने दुख जताया कि तीन साल में आयोग की एक भी बैठक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पिछले साल लाए गए कृषि कानूनों को लेकर देश भर में भारत सरकार व किसानों के बीच गतिरोध चल रहा है। पिछले तीन माह से किसानों ने कड़ाके की सर्दी में अपना कीमती समय सड़कों पर बिता दिया लेकिन केंद्र सरकार कोई समाधान नहीं निकाल पाई।
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न सुझाव भेजे, न संवाद किया...
मलिक ने कहा कि कृषि कानूनों जैसे गंभीर विषय पर भी आयोग की तरफ से भारत सरकार को सुझाव नहीं भेजे गए। इस विषय पर प्रदेश के किसानों की राय जानने के लिए संवाद भी नहीं किया गया। आयोग का गठन जिस उद्देश्य को लेकर किया गया था, आयोग उसे पूरा नहीं कर पाया है। उन्होंने त्यागपत्र भेजते हुए उम्मीद जताई है कि प्रदेश सरकार तीन कृषि कानूनों पर किसानों की चिंताओं से केंद्र सरकार को अवगत कराएगी।
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