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झोलाछाप बने 'आयुर्वेद विशेषज्ञ': यूपी में 19 और डॉक्टरों की फर्जी डिग्री उजागर, रजिस्ट्रेशन रद्द कर केस दर्ज

Fri, 30 Oct 2026 09:36 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Fri, 30 Oct 2026 09:36 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश के आयुर्वेदिक, यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड के सत्यापन में 19 और डॉक्टरों की डिग्रियां फर्जी पाए जाने के बाद उनका पंजीयन रद्द कर इलाज पर रोक लगा दी गई है। फर्जी डिग्रियों के आधार पर खुद के क्लिनिक व बड़े अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहे इन डॉक्टरों के खिलाफ थाने में तहरीर देकर उनके अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

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Fake degrees of 19 more Ayurveda doctors exposed in UP registration cancelled case filed
यूपी में 19 और आयुर्वेद डॉक्टरों की फर्जी डिग्री उजागर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में आयुर्वेद के 19 और डॉक्टरों की डिग्री फर्जी मिलने के बाद पंजीयन रद्द कर दिया गया है। इनके खिलाफ लखनऊ के हुसैनगंज थाने में तहरीर दी गई है। सभी ने फर्जी डिग्रियों के आधार पर आयुर्वेदिक, यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में पंजीयन कराया था। इनमें से कुछ ने अपने अस्पताल खोल लिए, जबकि कुछ नामचीन अस्पतालों में नौकरी कर रहे हैं। इससे पहले अगस्त में 41 आयुर्वेद डॉक्टरों की डिग्रियां फर्जी मिलने के बाद उनका पंजीयन रद्द किया गया था।

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बोर्ड ने वर्ष 2015 के बाद पंजीयन कराने वाले सभी डॉक्टरों का नए सिरे से सत्यापन शुरू कराया है। अब तक की जांच में 19 डॉक्टरों की डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। इन डॉक्टरों ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा के संस्थानों से डिग्रियां लगाई थीं। सत्यापन के दौरान संबंधित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने इन डिग्रियों को फर्जी बताया। इनमें 14 डॉक्टरों ने वर्ष 2021-22 में और पांच ने वर्ष 2024 में पंजीयन कराया था। बोर्ड ने सभी को नोटिस भेजा है।
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हुसैनगंज थानाध्यक्ष शिवमंगल सिंह ने बताया कि मिली तहरीर को पहले से दर्ज एफआईआर में शामिल किया जाएगा। 41 आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जल्द आगे की कार्रवाई होगी। 

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इनका पंजीयन रद्द, इलाज करने पर रोक

  1. बोर्ड ने डॉ. शशिभूषण यादव, जहांगीरगंज अंबेडकरनगर, डॉ. अंकित श्रीवास्तव, गूमा फातिमा जोत बलरामपुर, डॉ. अशोक कुमार, बीघापुर उन्नाव, डॉ. परवेज आलम, प्रेमनगर कानपुर, डॉ. वीरेंद्र कुमार, गौरा बादशाहपुर जौनपुर, डॉ. रमापति, मुंगरा बादशाहपुर जौनपुर, डॉ. अरविंद, कबीरुद्दीनपुर जौनपुर, डॉ. जितेंद्र चक्रवाल, शिवदासपुर वाराणसी, डॉ. डिंपल, बालाजी कांप्लेक्स मेरठ, डॉ. निशांत भारद्वाज, मवाना मेरठ, डॉ. आशुतोष मंडल, घरबरा गौतमबुद्धनगर।
  2. डॉ. विनोद कुमार यादव, बैजूपट्टी कुशीनगर, डॉ. बिजेंद्र वर्मा, नौरंगाबाद इटावा, डॉ. यूनुस, मस्जिद गली टांडा बुलंदशहर, डॉ. वसीम, नौ कुवा रोड घेरबुखारी शामली, डॉ. रेहान अहमद, शाहजमाल कोल, अलीगढ़, डॉ. शैलेंद्र कुमार, नया गनला मथुरा, डॉ. कमल उपाध्याय, सादाबाद हाथरस और डॉ. भरत सक्सेना, मैगलगंज, लखीमपुर खीरी का पंजीयन रद किया है। इसके बाद ये डॉक्टर मरीजों का उपचार नहीं कर सकते।
  3. आयुर्वेद निदेशालय ने संबंधित जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें संबंधितों के अस्पतालों के लाइसेंस रद करने और इन डॉक्टरों के कहीं भी उपचार करने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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