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अयोध्या में कोरोना पर भारी पड़ी आस्था, परिक्रमा पथ पर उमड़े भक्त

Mon, 23 Nov 2020 07:05 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 23 Nov 2020 07:05 PM IST
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Faith heavy on corona in Ayodhya, devotees gathered on the path of circumambulation
अयोध्या में परिक्रमा करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
चौदहकोसी परिक्रमा मेले में कोरोना महामारी पर श्रद्घालुओं की आस्था भारी दिखी। हजारों भक्तों ने रामनगरी की सदियों की परंपरा का निवर्हन पूरे जिम्मेदारी से किया। हालांकि इस बार कोरोना की गॉइडलाइन के चलते बाहरी श्रद्घालु परिक्रमा में शामिल नहीं हो सके। इसका असर रहा कि जहां चौदह कोसी परिक्रमा में 15 से 20 लाख श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ती थी, वहीं इस बार यह संख्या एक लाख भी पार न कर सकी। फिर भी कोरोना की गॉइडलाइन का पालन करते हुए पूरे उत्साह के साथ भक्त परिक्रमा करते दिखे।
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राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद इस बार यह उम्मीद की जा रही थी कि बड़ी संख्या में भक्त अयोध्या के कार्तिक परिक्रमा मेले में उमड़ेंगे। इस बीच प्रशासन ने कोरोना को देखते हुए कार्तिक मेले में बाहरी श्रद्घालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी। 20 नवंबर से ही अयोध्या में बाहरी भक्तों का प्रवेश रोक दिया गया। चौदहकोसी परिक्रमा के दिन तक पुलिस बैरियरों पर आईडी चेक करती दिखी। बावजूद इसके चौदहकोसी परिक्रमा के शुभ मुहूर्त रात 1:56 बजे से पहले ही श्रद्घालुओं ने परिक्रमा का शुभारंभ कर दिया जो कि सोमवार की देर शाम तक चलती रही। अयोध्या, दर्शननगर भीखापुर, देवकाली, जनौरा, नाका हनुमानगढ़ी, मोदहा, सिविल लाइंस स्थित हनुमान मंदिर, सआदतगंज, अफीम कोठी आदि स्थानों से श्रद्धालुओं ने पूरे भक्ति की रौं में परिक्रमा करनी शुरू कर दी। जय श्रीराम के उद्घोष व सीताराम नाम की धुन के बीच परिक्रमार्थी परिक्रमा पथ को नापते नजर आए। महिला, पुरूष, बच्चे, वृद्घ भी पुण्यार्जन करते दिखे तो साधु-संतों की टोली हरिकीर्तन करती परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ती रही। इस दौरान जिला प्रशासन द्वारा श्रद्घालुओं को कोरोना गाइडलाइन के अनुपालन की नसीहत भी दी जाती रही। पुलिस श्रद्घालुओं से मॉस्क लगाकर व निश्चित दूरी का पालन कर परिक्रमा करने की अपील करती दिखी।
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इस बीच श्रद्घालुओं ने भी पूरी जिम्मेदारी का परिचय दिया जिसका परिणाम रहा कि कोरोना पर आस्था भारी नजर आई। श्रद्घालु मॉस्क लगाकर परिक्रमा करते नजर आए। परिक्रमा पथ पर मिले शरद पाठक, हर्ष पाठक, आदित्य तिवारी बोले कि कोरोना तो समस्या है ही, लेकिन परिक्रमा हमारी पौराणिक परंपरा है। अयोध्या की आध्यात्मिक समृद्घि का आधार भी परिक्रमा है, ऐसे में हमने कोरोना की गॉइडलाइन का पालन करते हुए परिक्रमा करने का निर्णय लिया है। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह जगह-जगह सेवा शिविर भी लगे हुए थे। जलपान से लेकर चिकित्सा के पूरे इंतजाम परिक्रमा पथ पर खूब दिखे। आस्था के पथ पर चल रहे श्रद्धालुओं की सेवा करने के लिए भी हजारों हाथ उठे हुए मिले। दर्द निरोधक दवाएं और मलहम हाथों में लिए सेवा शिविरों में लोग खड़े थे। कोरोना को देखते हुए कोविड-हेल्प डेस्क की भी स्थापना की गई थी।
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पचास हजार श्रद्घालुओं ने ही की परिक्रमा
कोरोना के चलते इस बार चौदहकोसी परिक्रमा में एक नया रिकॉर्ड भी बना। वर्षों बाद यह अवसर रहा जब चौदहकोसी परिक्रमा में एक लाख से भी कम श्रद्घालुओं ने परिक्रमा की हो। अयोध्या के कार्तिक परिक्रमा मेले में हर वर्ष 15 से 20 लाख श्रद्घालु परिक्रमा करते हैं, लेकिन कोरोना के कारण इस बार परिक्रमार्थियों की संख्या बहुत ही कम रही। खुफिया एजेंसियों व प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक बमुश्किल 50 से 60 हजार भक्त ही परिक्रमा कर सके। परिक्रमा पूरी करने के बाद श्रद्घालुओं ने रामनगरी के विभिन्न मंदिरों हनुमानगढ़ी, कनकभवन, रामलला व आदि में दर्शन-पूजन भी किया।
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