क्या आप जानते हैं नमकीन खाने से भी होती है डायबिटीज?
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पिज्जा-बर्गर जैसे फास्ट फूड ही नहीं, छोला-भटूरा और कचौड़ियां भी मोटापा और डायबिटीज के लिए जिम्मेदार हैं। केवल अधिक मीठा खाने से ही डायबिटीज नहीं होती, बल्कि तली-भूनी चीजें भी डायबिटीज को बढ़ावा देती हैं। बृहस्पतिवार को डायबिटीज पर हुई प्री-कॉन्फ्रेंस में मेटाबोलिज्म से जुड़े विशेषज्ञों ने यह दावा किया।
विशेषज्ञों ने डायबिटीज में देसी घी, ऑलिव ऑयल और रिफाइंड का इस्तेमाल सुरक्षित बताने के दावे को भी भ्रम बताया। रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया की लखनऊ में बृहस्पतिवार को आयोजित 43वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की प्री-सिंपोजियम में विशेषज्ञों ने बताया कि तले-भूने खाद्य पदार्थों में फैट की मात्रा कई गुना होती है। इससे शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है।
कॉन्फ्रेंस की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को होगी। ′जीवन में मिठास की वापसी′ पर केंद्रित कॉन्फ्रेंस में दुनियाभर के पांच हजार डायबिटीज विशेषज्ञ तीन दिन लखनऊ में गहन मंथन करेंगे।
एम्स के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. राजेश खड़गावत ने बताया कि देश की 10 प्रतिशत आबादी डायबिटीज की शिकार है। आम तौर पर फास्ट फूड को इसकी वजह बताया जाता है। यह कुछ हद तक सही भी है, लेकिन इसके साथ ही छोले-भटूरे और दूसरे तले-भूने खाद्य पदार्थ भी उतने ही खतरनाक हैं।
डॉ. राजेश ने बताया कि कॉलेस्ट्रॉल बढ़ने का सबसे बड़ा कारण तेल ही है। वहीं, हमें इस मिथ से भी बाहर निकलना चाहिए कि देसी घी, ऑलिव ऑयल या रिफाइंड ऑयल का सेवन डायबिटीज में सुरक्षित है। ऐसे में जरूरी है कि हम तेल का इस्तेमाल घटाकर आधा कर दें।
रोज सुबह-शाम आधा-आधा घंटा जरूर टहलें। लाइफ स्टाइल बदलेगी तो शुगर लेवल भी नियंत्रित रहेगा।
स्कूलों के कैंटीन बढ़ा रहे बच्चों में रोग
बीएचयू के डॉ. मधुकर राव का कहना है कि स्कूलों में खेलने की जगह नहीं बची। इनकी कैंटीन में फास्ट फूड बिकता है। ये स्कूल डायबिटीज के लिए उपजाऊ जमीन पैदा कर रहे हैं जहां से यह बीमारी हमारे बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है। यह बहुत खतरनाक होगा।
देश में सिर्फ बीमारी के तरीके का आकलन, शोध नहीं
डायबिटीज के इलाज पर हम पूरी तरह यूरोप और अमेरिका की फार्मा कंपनियों पर निर्भर हैं। इसी वजह से हमारे यहां दवाएं बहुत महंगी हैं। यहां हम केवल बीमारी के तरीके और समस्या का आकलन ही कर रहे हैं।
शोध के नाम पर कुछ भी नहीं है। हम अब या तो इन दवाओं के सस्ते होने का इंतजार करें या अपनी दवा विकसित करने की दिशा में काम करें। इसके लिए शोध की जरूरत है।
इसका बड़ा बजट सरकार और दवा कंपनियों को वहन करना होगा। हमें समझना होगा कि डायबिटीज हमारी सोच से कई गुना तेजी से बढ़ रही है। डायबिटीज की औसत उम्र 45 से घटकर 20 साल पर आ गई है। ब्रिटेन में 75 साल की उम्र में हार्ट अटैक होता है, जबकि हमारे यहां इसकी औसत उम्र 50 साल है। सरकार को इसकी भयावहता इसी से समझ लेनी चाहिए कि अगर राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया गया तो देश के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बीमारी की रोकथाम पर खर्च होगा।
प्रो. मधुकर राय एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, बीएचयू
डायबिटीज अकेली नहीं आती
डायबिटीज ऐसी बीमारी है, जिसके नुकसान दूसरी बीमारियों के रूप में सामने आते हैं। इसमें हाई ब्लड प्रेशर, लिपिड, यूरिक एसिड का बढ़ना, हार्ट अटैक जैसी दूसरी बीमारियां शामिल हैं। टाइप टू डायबिटीज बड़ी समस्या बनी हुई है। इससे एक और बड़ी समस्या मेटोबोलिक डिसऑर्डर के रूप में सामने आने लगती है।
मेटाबोलिक डिसऑर्डर मोटापा बढ़ा देता है। हमने पटना में 55 वर्ष से कम उम्र के 4385 लोगों पर स्टडी की तो पता चला कि इनमें से अधिकतर डायबिटीक के साथ हार्ट पेशेंट भी थे। यह भी देखने में आया कि डायबिटीज की सहायक बीमारियों से मौत के मामले ज्यादा हो रहे थे।
डॉ. अजय कुमार, डायबिटीज एक्सपर्ट, पटना
फिजिकल एक्टिविटी ही बचाएगी
डायबिटीज अब केवल मेट्रो शहरों की बीमारी नहीं रही। गांवों और छोटे शहरों को भी यह अपनी चपेट में ले चुकी है। 30 साल तक के युवाओं में डायबिटीज के मामले देखे जा रहे हैं। डायबिटीज से बचना है तो फिजिकल एक्टिविटी बढ़ानी ही होगी। ज्यादा से ज्यादा पैदल चलना चाहिए। फिजिकल एक्टिविटी नहीं बढ़ाई तो अगला खतरा किडनी फेल होने या हार्ट अटैक के रूप में सामने आ सकता है।
डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, डायबिटीज एक्सपर्ट, अलीगढ़
अब इंजेक्शन की जगह इंसुलिन पंप
टाइप वन डायबिटीज और क्रॉनिक डायबिटीज में अभी तक इंजेक्शन से इंसुलिन दिया जाता है। अगले साल तक इंसुलिन पंप भी बाजार में आ जाएंगे। इनकी कीमत करीब एक लाख रुपये होगी। इसे मुंह से इनहेल किया जा सकेगा। यह पंप इंसुलिन की जरूरत की मात्रा भी खुद ही तय कर लेगा।
ऐसी दवाइयां भी अब तैयार हो गई हैं जो किडनी से शुगर सोखकर पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देंगी। आने वाले दिनों में डायबिटीज की दवा में इंसुलिन पैच आएंगे। इसे त्वचा पर लगाया जा सकेगा। त्वचा के संपर्क में आया पैच खुद ही तय करेगा कि शरीर को कितना इंसुलिन चाहिए।
डॉ. एनके सोनी, डायबिटिक फिजीशियन,गाजियाबाद