यूपी में भाजपा सरकार के छह महीने के कार्यकाल पर सीएम योगी का Exclusive इंटरव्यू, हर मुद्दे पर की बात
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‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने छह महीने के शासन में किए गए फैसलों और उनके परिणामों से खुश तो हैं, लेकिन पूरी तरह संतुष्ट नहीं। कहते हैं कि कानून-व्यवस्था पर बेहतर काम हुआ है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है। जनता का शासन और सत्ता पर भरोसा बढ़ा है। लोगों का प्रदेश से पलायन रुका है। नौकरशाही अपने को बदलने पर मजबूर हुई है। पर, इतना भर पर्याप्त नहीं है। यह तो शुरुआत है, जिसे सबका साथ-सबका विकास तक पहुंचाना है। शुरुआत अच्छी हुई है तो सभी को भरोसा रखना चाहिए कि परिणाम भी बेहतर आएंगे।
सत्ता में हुए परिवर्तन से छह महीने में कार्यसंस्कृति बदलने में सफलता मिली है तो यकीन रखिए, आने वाले दिनों में लोगों के जीवन और सरकारी कामकाज के ढर्रे को भी परिवर्तित करके उन्हें साफ-स्वच्छ, भ्रष्टाचार, अपराध और शोषणमुक्त, समता-ममता युक्त प्रशासन देने में भी यह ‘योगी’ सफल होगा। लंबे समय के बाद प्रदेश जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति के मकड़जाल से मुक्त हुआ है।
पहली बार प्रदेश में किसान और युवा केंद्रित राजनीति की शुरुआत हुई है। सरकार के फैसलों से प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल बना है। विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को जनता का समर्थन मिल रहा है। पूरा भरोसा है कि प्रदेश में होने जा रहे निकाय और सहकारिता चुनाव में भी भाजपा को जनता का विश्वास, साथ और समर्थन मिलेगा। योगी आदित्यनाथ रविवार को यहां अपने सरकार आवास 5 कालिदास पर सरकार के छह महीने पूरे होने पर ‘टीम अमर उजाला’ के सवालों का जवाब दे रहे थे।
महंत या मुख्यमंत्री योगी के लिए सब एक जैसे
योगी के लिए क्या सत्ता और क्या संन्यास। दोनों बराबर हैं। राजप्रासाद में रहने वाले ईमानदार लोगों का उद्देश्य भी जनकल्याण होता है और आश्रम में रहने वाले योगी और संन्यासी का जीवन भी जनकल्याण के लिए ही होता है। इसलिए सामंजस्य या समन्वय बनाने में कोई मुश्किल नहीं। जैसे महंत के नाते मठ में रहता था, वैसे ही मुख्यमंत्री की भूमिका में यहां रहता हूं।
योगी और संन्यासी के लिए अपना सुख या अपना दुख कोई मायने नहीं रखता। उसके लिए तो जनता का सुख या दुख ही अपना है। शिष्य, महंत व सांसद के रूप में यह योगी उसी दिशा में काम कर रहा था और अब मुख्यमंत्री के रूप में भी उसी भूमिका का निर्वाह कर रहा है। स्थान और जिम्मेदारी बदली है लेकिन भूमिका नहीं बदली है। दायित्व भी पहले जैसे हैं और कर्तव्य भी।
मुख्यमंत्री आवास या मठ
देखिए! संन्यासी का सुविधाओं से क्या मतलब। इसीलिए मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने यहां एयर कंडीशन हटवाए। अन्य सुविधाओं में कटौती की। लोगों ने इस पर तरह-तरह की बातें की। पर, मेरा मानना है कि सत्ता सेवा के लिए मिलती है। मैं तो योगी हूं, लेकिन मेरा मानना है कि जिस किसी को भी सत्ता मिले उसे संन्यास के भाव से सत्ता का संचालन करना चाहिए।
ध्यान रखना चाहिए कि सत्ता सुविधा के लिए नहीं बल्कि सेवा के लिए मिली हैं। पूर्व की सरकारों ने सत्ता को अपने स्वार्थ और अपने लोगों की सुविधाओं के लिए इस्तेमाल किया। इसी से शासन-प्रशासन की साख कम हुई। भाजपा सरकार का नेतृत्व करने के नाते मुझे यह कहने में संकोच नहीं है कि आज प्रदेश सरकार का एकमात्र लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ जनता की सेवा तथा कल्याण है।
भोग-विलास नहीं सेवा
योगी के लिए सत्ता का अर्थ भोग-विलास नहीं, अपितु जनसेवा और निर्बलों को सबल बनाने में सहयोग देना तथा साथ खड़े होना है। इसलिए सरकार के नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलते ही मैंने अपने सभी सहयोगी मंत्रियों से बात की। उनके सामने प्रदेश की जर्जर आर्थिक स्थिति के तथ्य रखे। कहा कि जनता ने भाजपा को सत्ता सेवा के लिए दी है। ऐसे में हमें कुछ बदलाव करने होंगे। पहले की गैर भाजपा सरकारों की तरह हम आप सबको घरों के लिए नए सोफे, नए परदे अथवा चलने की नई और लग्जरी गाड़ियां नहीं दे सकते। पुरानी गाड़ियों से चलना होगा।
सभी ने प्रसन्नता पूर्वक मेरे इस प्रस्ताव को स्वीकार किया। जो नई 20 इनोवा गाड़ियां खरीदी गई हैं, वे पुरानी 40 गाड़ियों को नीलाम करके खरीदी गई। ये गाड़ियां कंडम हो चुकी थीं। यह भी तय किया गया है कि जो नई 20 गाड़ियां आई हैं, वे भी अतिथियों के चलने के लिए हैं। मैं या मेरा कोई मंत्री उससे नहीं चलेगा।
इसलिए जनता के बीच नहीं गया योगी
यह कहना गलत है कि जय-पराजय के भय के कारण विधान मंडल का सदस्य बनने के लिए जनता के बीच चुनाव लड़ने नहीं गया। सच तो यह है कि छह महीने पुरानी सरकार, जिसे लगभग डेढ़ दशक पुराना जर्जर शासन तंत्र मिला हो, अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाली सरकार की विरासत संभालने को मिली हो, उसके लिए एक-एक दिन बहुत अनमोल है।
हमें कम समय में न सिर्फ इन अव्यवस्थाओं व बुराइयों को खत्म करके दिखाना है बल्कि समाज और जनकल्याण के काम भी शुरू करने हैं। ऐसे में एक नई सरकार का मुख्यमंत्री अगर विधानसभा चुनाव लड़ने में दो महीने व्यस्त हो जाता तो इन कामों पर ध्यान न दे पाता। सभी काम ठप हो जाते। ऐसे में नेतृत्व का निर्देश हुआ कि विधान परिषद से विधान मंडल में पहुंचो। मुख्य लक्ष्य जन कल्याण है, पार्टी और सरकार की छवि तथा प्रतिष्ठा है। वैसे भी मैं योगी हूं और हमारे लिए अपनी प्रतिष्ठा बहुत मायने नहीं रखती।
2019 : नीतियां लोगों के लिए, वही जिताएंगे
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी ने लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर प्रदेश को भाजपा के मतों का प्रतिशत 42 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का जो लक्ष्य सौंपा है, उसमें सरकार का नेतृत्व संभालने के नाते मैं भी पूरी तरह जुटा हूं। किसानवादी और विकासवादी नीति पर सरकार को चलाकर तथा योजनाएं बनाकर लोगों को पहले से ज्यादा भाजपा के करीब लाएंगे और पार्टी के वोट 60 प्रतिशत पहुंचाएंगे।
ध्रुवीकरण : आरोप निराधार, हम विकासवादी
भाजपा या मेरे ऊपर ध्रुवीकरण की राजनीति के आरोप गलत हैं। जातिवाद और संप्रदायवाद की राजनीति करने वाले ही ऐसे निराधार आरोप लगाते हैं। कोई कितने भी आरोप लगाए, लेकिन हमारी सरकार जातिवाद और संप्रदायवाद की राजनीति नहीं चलने देगी। हम विकास की बात करते हैं।
नौकरशाही : साधने के बजाय सक्रिय बनाया
सपा और बसपा की सरकारों ने नौकरशाही को पंगु बना दिया था। फैसले लेने की आदत खत्म कर दी थी। सत्ता में आने के तत्काल बाद हमने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, सभी विभागों के प्रमुख सचिवों, सचिवों, विशेष सचिवों और विभागाध्यक्षों को बुलाकर उन्हें भाजपा का लोक कल्याण संकल्प पत्र सौंपा और उसके मुताबिक काम करने को कहा। लाइन ऑफ एक्शन रख दिया है। साफ कर दिया है कि अगर इसके साथ चल पाए तो ठीक वरना बाहर। इस सरकार में काम न करने वाले अधिकारी नहीं चलेंगे। यह नौकरशाही को साधना नहीं, बल्कि सक्रिय करके काम के प्रति जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाना है। सरकार को संतोष है कि जिस नौकरशाही की कार्यक्षमता पर सवाल उठने लगे थे, वही अधिकारी आज न सिर्फ काम कर रहे हैं बल्कि नतीजे भी दे रहे हैं। अब काम हो रहे हैं। हम काम करा रहे हैं।
तुष्टीकरण : पूर्व की सरकारें करती थीं, हम मुद्दा आधारित नीति बना रहे
सरकार ने प्रदेश में 20-25 वर्षों से चल रहे जातिवादी और तुष्टीकरण नीति को समाप्त करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए हैं। यह कदम अभी और आगे बढ़ेंगे। किसान और युवा आधारित नीतियां बनाई और लागू की जा रही हैं। इसका प्रमाण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुसार, किसानों की आय दोगुनी करने के लिए उठाए जाने वाले कदम हैं।
पानी के किल्लत वाले अर्थात डॉर्क जोन वाले इलाकों तथा बिजली की खपत कम करने के लिए किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप दिए जा रहे हैं। अब तक 10 हजार सोलर पंपों का वितरण कराया जा चुका है। मार्च तक 10 हजार और पंप बाटेंगे। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू कर किसानों को राहत दी गई है। प्रदेश में 20 नए कृषि विज्ञान केंद्र खोले गए हैं। बड़े जिलों में दो और छोटे जिलों में एक कृषि विज्ञान केंद्र खोलने का लक्ष्य है। चार नए कृषि विश्वविद्यालयों खोलने जा रहे हैं।
किसान : 3 साल में तिगुनी होगी गन्ना की पैदावार
किसानों की पैदावार बढ़वाना प्रदेश सरकार का पहला लक्ष्य है। इसके लिए किसानों को सुविधा तथा सहूलियत देंगे और उन्हें नई तकनीक भी मुहैया कराएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि आज जिस खेत में 150 क्विंटल गन्ना पैदा होता है, उसमें अगले तीन वर्षों में 500 से 700 क्विंटल गन्ना पैदा होने लगे। पिछले 15 वर्षों में पहली बार गन्ना मूल्य का समय से भुगतान किया गया है। सरकार ने फैसला किया है कि नया पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ना किसानों का पूरा बकाया पैसा उनके खाते में पहुंच जाए।
संत या सियासी शख्स, ऐसा है योगी का कमरा
बैठने वाले सोफा के बगल रखी छोटी मेज पर गुरु महंत अवैद्यनाथ का चित्र। एक माला। सामने मेज पर ‘शिवलोक’ सहित रखी कई धार्मिक पुस्तकें। योग और गीता पर भी कुछ पुस्तकें। एक क्षण के लिए भ्रम होता है कि यहां कोई सियासी शख्स रहता है या यह किसी संत के आश्रम में आ गए हैं। जब स्वागत में सामने मट्ठा आता है। कटोरी में पेड़ा लाए जाते हैं, तो लगता है कि वास्तव में प्रदेश में बहुत बदलाव हो चुका है।
मुख्यमंत्री आवास वाला यह भवन है तो आज भी प्रदेश की सत्ता का शक्ति केंद्र, पर ऐसा केंद्र नहीं जो राजधर्म का का पालन सिर्फ राजनीति की राह पर चलकर करता हो। अब यह स्थान धर्मतंत्र की छाया में राज का तंत्र चलाने वाले शख्स का ठिकाना बन चुका है।
पर, किसी खास उपासना पद्धति वाले धर्मतंत्र के अनुसार, नहीं। अपितु इस भाव के साथ कि सत्ता में आने के नाते ऐसे फैसले करना धर्म है जिनके मूल में सेवा, कल्याण, लोकोपकार, न्याय हो तथा जो सरोकारी, सर्वग्राही और नीति आधारित कर्तव्यों का पालन करने वाले हों।