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चिंताजनक: युवाओं की ही नहीं... शिशुओं की भी सेहत बिगाड़ रहा मोबाइल, छीन रहा भाषा व सामाजिकता का विकास
Mon, 02 Dec 2024 12:45 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 02 Dec 2024 12:45 PM IST
सार
मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों को ऑटिज्म की समस्या दे रहा है। छोटी उम्र में ज्यादा मोबाइल देखने से बच्चों में भाषा व सामाजिकता का विकास नहीं हो रहा है। केजीएमयू में बाल एवं किशोर मनोरोग की हर ओपीडी में इस तरह के मामले आ रहे हैं।
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child with mobile (Demo)
- फोटो : freepik
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विस्तार
राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू में चलने वाली बाल एवं किशोर मनोरोग की ओपीडी में अभिभावक अपने बच्चे को लेकर पहुंच रहे हैं। उनकी समस्या है कि बच्चे की उम्र तीन साल होने वाली है। पहले की तरह अब हमसे बात नहीं करता। बुलाने और पुचकारने पर आंख से आंख नहीं मिलाता है। अपने आसपास ऐसे देखता है मानो कार्टून के चरित्र तलाश रहा हो।
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केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के डॉ. अमित आर्या के मुताबिक, ये ऑटिज्म के लक्षण हैं। यह समस्या कम उम्र में मोबाइल फोन ज्यादा देखने से आती है। ओपीडी में कम से कम चार-पांच ऐसे बच्चे लाए जाते हैं, जिनकी समस्या मोबाइल या फिर स्क्रीन आधारित होती है। इसकी वजह से उनका सामाजिक व्यवहार और सोचने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। समस्या की पहचान देर से होने पर बच्चे का इलाज करना काफी मुश्किल हो जाता है।
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इन बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने अपनी व्यस्तताओं के चलते बच्चे को कम उम्र से ही मोबाइल दिखाना शुरू कर दिया था। बच्चा जब थोड़ा बड़ा हुआ तो उसमें कई तरह की समस्याएं नजर आईं। इसके बाद ही उन्होंने डॉक्टर से सलाह लेना उचित समझा।