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पूर्व विधायक जतारिया छह साल के लिए निष्कासित
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झांसी। जिला पंचायत वार्ड संख्या 3 भरोसा सीट से भाजपा उम्मीदवार पवन गौतम के सामने बगावत करके चुनाव लड़ रहे पूर्व विधायक सतीश जतरिया को पार्टी ने छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया। प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने उनके निष्काषन के साथ ही पार्टी समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने वाले दूसरे कार्यकर्ताओं को भी सख्त लहजे में निर्देश देते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
पूर्व विधायक सतीश जतारिया बहुजन समाज पार्टी के टिकट से बबीना विधानसभा से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उनका बसपा से मोहभंग हो गया और उन्होंने सपा का दामन थाम लिया। सपा से होते हुए वह भाजपा में आए थे। पार्टी नेताओं का कहना है कि पूर्व विधायक काफी समय से पैरवी कर रहे थे लेकिन, उनके बजाए लॉटरी पवन गौतम की लग गई। पवन के समर्थित उम्मीदवार होने के बावजूद पूर्व विधायक ने नामांकन कर दिया। पार्टी नेताओं के समझाने के बावजूद वह नामांकन वापस लेने को राजी नहीं हुए। स्थानीय पदाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को उनको पार्टी से छह साल के निष्काषित कर दिया गया। वहीं, पूर्व विधायक के निष्काषन के बाद अब भरोसा सीट दोनों पक्षों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने अपने उम्मीदवार को जीतने के लिए जहां जोर लगाना शुरू कर वहीं, पूर्व विधायक भी निष्काषन के बाद खुलकर मैदान में आ गए हैं। जानकारों की मानें तब इसका असर मोंठ ब्लॉक की तीनों सीट पर पड़ना तय है। मोंठ की पूंछ, साकिन एवं भरोसा तीनों ही सीट अनुसूचित जाति को आरक्षित है। भाजपा को यहां सपा, बसपा की तगड़ी चुनौती के साथ अब पार्टी के भीतर के असंतुष्टों से भी निपटना पड़ेगा।
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पूर्व विधायक सतीश जतारिया बहुजन समाज पार्टी के टिकट से बबीना विधानसभा से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उनका बसपा से मोहभंग हो गया और उन्होंने सपा का दामन थाम लिया। सपा से होते हुए वह भाजपा में आए थे। पार्टी नेताओं का कहना है कि पूर्व विधायक काफी समय से पैरवी कर रहे थे लेकिन, उनके बजाए लॉटरी पवन गौतम की लग गई। पवन के समर्थित उम्मीदवार होने के बावजूद पूर्व विधायक ने नामांकन कर दिया। पार्टी नेताओं के समझाने के बावजूद वह नामांकन वापस लेने को राजी नहीं हुए। स्थानीय पदाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को उनको पार्टी से छह साल के निष्काषित कर दिया गया। वहीं, पूर्व विधायक के निष्काषन के बाद अब भरोसा सीट दोनों पक्षों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने अपने उम्मीदवार को जीतने के लिए जहां जोर लगाना शुरू कर वहीं, पूर्व विधायक भी निष्काषन के बाद खुलकर मैदान में आ गए हैं। जानकारों की मानें तब इसका असर मोंठ ब्लॉक की तीनों सीट पर पड़ना तय है। मोंठ की पूंछ, साकिन एवं भरोसा तीनों ही सीट अनुसूचित जाति को आरक्षित है। भाजपा को यहां सपा, बसपा की तगड़ी चुनौती के साथ अब पार्टी के भीतर के असंतुष्टों से भी निपटना पड़ेगा।
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