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Lucknow News: किस्सा प्रशासन में गूंजा विकसित भारत का संकल्प
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अटल सुशासन पीठ की ओर से बृहस्पतिवार को ‘किस्सा प्रशासन का : अध्याय-1—विकसित भारत@2047’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ‘पीपुल, पॉलिसीज, पॉसिबिलिटीज’ यानी जन, नीतियां और संभावनाओं के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कुलपति प्रो. जेपी सैनी के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त आईएएस एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा किए। उन्होंने सुशासन, सार्वजनिक नीति, प्रशासनिक सुधार और राष्ट्र निर्माण में प्रशासन की भूमिका पर प्रकाश डाला। वर्ष 1993 की अल्मोड़ा आपदा को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक तंत्र की तत्परता और संकट से उबरने की क्षमता पर चर्चा की।
विभागाध्यक्ष प्रो. वैशाली सक्सेना ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए ‘किस्सा प्रशासन’ के पहले अध्याय और आपदा प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में रेजिलिएंस यानी संकट से उबरने की क्षमता के महत्व को रेखांकित किया।
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जनभागीदारी और पारदर्शिता पर जोर
विशिष्ट अतिथि कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अरविंद मोहन ने अपने निजी अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को किस्सों और अनुभवों के माध्यम से विषय समझाने की उपयोगिता पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भी उन्होंने की। वक्ताओं ने कहा कि समावेशी, कुशल, उत्तरदायी और जवाबदेह शासन विकसित भारत की आधारशिला है। प्रशासन में पारदर्शिता, जनभागीदारी, नवाचार और बेहतर सेवा-प्रदाय के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
कार्यक्रम में अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपीय भाषाओं के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मैत्री प्रियदर्शी, प्रो. नंदलाल भारती, डॉ. नंदिता कौशल, डॉ. सुशील चौहान, डॉ. अमन सिंह सहित शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। संचालन कौशाम्बी सिंह तोमर ने किया। विभाग एवं अटल सुशासन पीठ की ओर से डॉ. सुशील सिंह चौहान ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कुलपति प्रो. जेपी सैनी के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त आईएएस एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा किए। उन्होंने सुशासन, सार्वजनिक नीति, प्रशासनिक सुधार और राष्ट्र निर्माण में प्रशासन की भूमिका पर प्रकाश डाला। वर्ष 1993 की अल्मोड़ा आपदा को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक तंत्र की तत्परता और संकट से उबरने की क्षमता पर चर्चा की।
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विभागाध्यक्ष प्रो. वैशाली सक्सेना ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए ‘किस्सा प्रशासन’ के पहले अध्याय और आपदा प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में रेजिलिएंस यानी संकट से उबरने की क्षमता के महत्व को रेखांकित किया।
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जनभागीदारी और पारदर्शिता पर जोर
विशिष्ट अतिथि कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अरविंद मोहन ने अपने निजी अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को किस्सों और अनुभवों के माध्यम से विषय समझाने की उपयोगिता पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भी उन्होंने की। वक्ताओं ने कहा कि समावेशी, कुशल, उत्तरदायी और जवाबदेह शासन विकसित भारत की आधारशिला है। प्रशासन में पारदर्शिता, जनभागीदारी, नवाचार और बेहतर सेवा-प्रदाय के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
कार्यक्रम में अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपीय भाषाओं के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मैत्री प्रियदर्शी, प्रो. नंदलाल भारती, डॉ. नंदिता कौशल, डॉ. सुशील चौहान, डॉ. अमन सिंह सहित शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। संचालन कौशाम्बी सिंह तोमर ने किया। विभाग एवं अटल सुशासन पीठ की ओर से डॉ. सुशील सिंह चौहान ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।