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Ayodhya: अयोध्या के एक प्राचीन मंदिर में रोज होता है श्रीराम का सूर्य तिलक, बिना तकनीक की मदद के होती है घटना
Mon, 07 Apr 2025 05:00 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 07 Apr 2025 05:00 PM IST
सार
अयोध्या के एक प्राचीन मंदिर में हर रोज भगवान श्रीराम का सूर्य तिलक होता है। यह घटना प्राकृतिक रूप से बिना किसी तकनीक की मदद से सम्पन्न होती है।
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प्राकृतिक सूर्य तिलक का एक दृश्य।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राम जन्मोत्सव पर रामलला का सूर्य की किरणों ने चार मिनट तक तिलक किया। इसे विज्ञान व अध्यात्म का अद्भुत समन्वय बताया जा रहा है। इसरो और सीबीआरआई, रुड़की के वैज्ञानिकों की टीम ने दो साल की कड़ी मेहनत के बाद हर राम जन्मोत्सव पर रामलला के सूर्य तिलक की स्थायी व्यवस्था कर ली है। वहीं, रामनगरी के एक अन्य प्राचीन मंदिर में भी सूर्य की किरणों ने प्राकृतिक तरीके से राम जन्मोत्सव पर श्रीराम का सूर्य तिलक किया। सूर्य की रश्मियों ने करीब पांच मिनट तक भगवान सीता राम के मुख मंडल को प्रकाशित किया।
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हम बात कर रहे हैं रामनगरी के अति प्राचीन दंतधावन कुंड आचारी मंदिर की। मंदिर की स्थापना विष्णु प्रकाशाचार्य ने की थी। मंदिर के द्वितीय आचार्य छत्रू स्वामी पहुंचे हुए संत थे। उनके चमत्कारों से तत्कालीन शासक भी प्रभावित थे। मंदिर परंपरा की 13वीं पीढ़ी के महंत विवेक आचारी का दावा है कि मंदिर में रोजाना सूर्य की किरणें श्रीसीताराम भगवान का सूर्य अभिषेक करती हैं। इसी क्रम में राम जन्मोत्सव के दिन रविवार को भी सुबह 8:15 बजे से 8:20 बजे तक सूर्य की किरणों ने भगवान के मुख मंडल को प्रकाशित किया।
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बताया कि मंदिर का गर्भगृह पूर्व दिशा में निर्मित है जबकि उत्तर दिशा में एक झरोखा बना है, इसी झरोखे से सूर्य की किरणें नित्य सुबह भगवान श्रीसीताराम का अभिषेक करती हैं। किरणें पहले मुख पर पड़ती हैं, फिर भगवान व माता जानकी के पैरों पर पड़ती हैं। यह प्रक्रिया करीब पांच मिनट की होती है। उनका दावा है कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक सूर्य तिलक है। इसमें किसी तकनीक का कोई प्रयोग नहीं किया गया है।