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Lucknow News: संकट में भी नहीं थमी सेवा, भट्टी पर भोजन पकाकर बुझा रहे लोगों की भूख
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प्रतीक सिंह उपलब्ध करा रहे खाना।
लखनऊ। गैस सिलिंडर की किल्लत के बीच जहां कई दुकानदारों ने खाने के दाम बढ़ा दिए हैं, वहीं समाजसेवी प्रतीक सिंह की हनुमत कृपा भोजन सेवा मिसाल पेश कर रही है। गैस न मिलने के कारण आई बाधा को पार करने के लिए उन्होंने भट्ठी का सहारा लिया, ताकि सेवा का पहिया थमे नहीं।
प्रतीक सिंह की ओर से यह सेवा शहर के तीन प्रमुख स्थानों चारबाग स्टेशन पर छोटी लाइन के पास, आंचलिक विज्ञान केंद्र और हनुमान सेतु मंदिर के पास दी जा रही है। चारबाग में सेवा निशुल्क है, जबकि आंचलिक विज्ञान केंद्र और हनुमान सेतु मंदिर के पास मात्र 10-10 रुपये में भरपेट भोजन मिलता है।
गैस की किल्लत के कारण फिलहाल पूड़ी-सब्जी बनाना संभव नहीं हो पा रहा है, इसलिए अब दाल की कचौड़ी और चटनी सिर्फ 15 रुपये में दी जा रही है। इसके अलावा 10 रुपये में छोला-चावल, कढ़ी-चावल और राजमा-चावल परोसा जा रहा है। प्रतिदिन 10 लोगों की टीम खाना पकाती है और 1,000 से अधिक लोग यहां भोजन ग्रहण करते हैं।
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मुफ्तखोरी नहीं, सम्मान का भोजन
वर्ष 2018 में शुरू हुई इस सेवा के पीछे प्रतीक सिंह बताते हैं कि 10 रुपये लेने का उद्देश्य केवल लागत निकालना नहीं, बल्कि व्यक्ति को मुफ्तखोरी के एहसास से बचाकर सम्मान के साथ भोजन कराना है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी की वजह से भूखा न रहे।
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प्रतीक सिंह की ओर से यह सेवा शहर के तीन प्रमुख स्थानों चारबाग स्टेशन पर छोटी लाइन के पास, आंचलिक विज्ञान केंद्र और हनुमान सेतु मंदिर के पास दी जा रही है। चारबाग में सेवा निशुल्क है, जबकि आंचलिक विज्ञान केंद्र और हनुमान सेतु मंदिर के पास मात्र 10-10 रुपये में भरपेट भोजन मिलता है।
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गैस की किल्लत के कारण फिलहाल पूड़ी-सब्जी बनाना संभव नहीं हो पा रहा है, इसलिए अब दाल की कचौड़ी और चटनी सिर्फ 15 रुपये में दी जा रही है। इसके अलावा 10 रुपये में छोला-चावल, कढ़ी-चावल और राजमा-चावल परोसा जा रहा है। प्रतिदिन 10 लोगों की टीम खाना पकाती है और 1,000 से अधिक लोग यहां भोजन ग्रहण करते हैं।
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मुफ्तखोरी नहीं, सम्मान का भोजन
वर्ष 2018 में शुरू हुई इस सेवा के पीछे प्रतीक सिंह बताते हैं कि 10 रुपये लेने का उद्देश्य केवल लागत निकालना नहीं, बल्कि व्यक्ति को मुफ्तखोरी के एहसास से बचाकर सम्मान के साथ भोजन कराना है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक तंगी की वजह से भूखा न रहे।