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Lucknow News: 25 वर्ष बाद भी पूरी नहीं हुई विवेचना, पुलिस को फटकार
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लखनऊ। भ्रष्टाचार के 25 वर्ष पहले दर्ज हुए मुकदमे में विवेचना पूरी न होने पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने आरोपी एलडीए के तत्कालीन सहायक अभियंता विवेकानंद सिंह को अग्रिम जमानत दे दी है। भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश श्याम मोहन जायसवाल ने पुलिस विभाग को गैर जिम्मेदार, लापरवाह मानते हुए कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने विवेकानंद की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि घटना हुए 36 वर्ष हो चुके हैं। रिपोर्ट दर्ज किए 25 वर्ष बीत चुके हैं। सभी आरोपी वृद्ध हो चुके हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक विवेचना पूरी नहीं की और न ही किसी आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर की। शायद पुलिस को बाकी आरोपियों व अहम गवाहों की मृत्यु का इंतजार है।
कोर्ट ने कहा कि संभावना है कि सुनवाई के समय अधिकतर गवाहों की या तो मौत हो चुकी होगी या वृद्धावस्था के कारण याददाश्त कमजोर हो चुकी होगी। मामला स्पष्ट प्रमाण है कि किस तरह विवेचना को धीमा और विलंबित करके आरोपियों को सहयोग किया जा सकता है। मामला पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाने के साथ उसकी विफलता को भी दर्शाता है।
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कोर्ट ने कहा कि इस बात को समझ पाने में असमर्थ हैं कि किन परिस्थितियों में मामले की विवेचना 25 वर्ष में भी पूरी नहीं की जा सकी और इसे पूरा करने में अभी कितना समय लगेगा।
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कोर्ट ने विवेकानंद की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि घटना हुए 36 वर्ष हो चुके हैं। रिपोर्ट दर्ज किए 25 वर्ष बीत चुके हैं। सभी आरोपी वृद्ध हो चुके हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक विवेचना पूरी नहीं की और न ही किसी आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर की। शायद पुलिस को बाकी आरोपियों व अहम गवाहों की मृत्यु का इंतजार है।
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कोर्ट ने कहा कि संभावना है कि सुनवाई के समय अधिकतर गवाहों की या तो मौत हो चुकी होगी या वृद्धावस्था के कारण याददाश्त कमजोर हो चुकी होगी। मामला स्पष्ट प्रमाण है कि किस तरह विवेचना को धीमा और विलंबित करके आरोपियों को सहयोग किया जा सकता है। मामला पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाने के साथ उसकी विफलता को भी दर्शाता है।
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कोर्ट ने कहा कि इस बात को समझ पाने में असमर्थ हैं कि किन परिस्थितियों में मामले की विवेचना 25 वर्ष में भी पूरी नहीं की जा सकी और इसे पूरा करने में अभी कितना समय लगेगा।