पीएफ घोटाला: आईएएस आलोक कुमार से ईओडब्ल्यू ने की पूछताछ, गड़बड़ी पर रोक लगाने की बात कही
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यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के पीएफ घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ने बुधवार को यूपीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन और उर्जा विभाग के प्रमुख सचिव रहे आलोक कुमार से पूछताछ की है। यह पूछताछ उनके लखनऊ के गौतम पल्ली स्थित आवास पर की गई है।
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने आलोक कुमार से डीएचएफएल में किए गए निवेश को लेकर सवाल किए। उनसे पूछा गया कि गलत तरीके से निजी कंपनी में निवेश का निर्णय लिया गया और वह डेढ़ साल से अधिक समय तक चलता रहा, इस पर रोक क्यों नहीं लगाई गई? जवाब में आलोक कुमार ने कहा कि ट्रस्ट के पैसों के निवेश के लिए पहले से ही व्यवस्था काम कर रही थी, जिसमें वित्त निदेशक और ट्रस्ट के सचिव स्तर से निर्णय लिया जाता था।
आलोक ने बताया कि जब उन्हें गलत तरीके से निवेश की जानकारी मिली तब तक यूपीपीसीएल कर्मियों के सामान्य भविष्य निधि का 2631.20 करोड़ रुपया डीएचएफसी में निवेश किया जा चुका था। इसके बाद उन्होंने न सिर्फ निवेश पर रोक लगाई बल्कि डीएचएफएल से 1185.50 करोड़ रुपये वापस ट्रस्ट को दिलाए। इसी तरह अंशदायी भविष्य निधि के निवेश किए गए 1491.50 करोड़ रुपये में से भी 669.30 करोड़ रुपए ट्रस्ट कार्यालय को वापस मिल चुके थे।
14 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
यूपीपीसीएल कर्मचारियों के पीएफ का निवेश गलत तरीके से डीएचएफएल में किए जाने का मामला पिछले महीने उजागर हुआ था। इसके बाद राजधानी के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए यूपीपीसीएल के पूर्व वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी और ट्रस्ट के पूर्व सचिव पीके गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में यह जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई थी।
ईओडब्ल्यू ने यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्रा को भी गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में अब तक कुल 14 लोगों को गिरफ्तारी हो चुकी है। इसमें दो चार्टर्ड एकाउंटेंट भी शामिल हैं।
पीके गुप्ता के बारे में जानकारी ली
आलोक कुमार से ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने ट्रस्ट के सचिव रहे पीके गुप्ता के बारे में भी जानकारी हासिल की। इन निवेश में गुप्ता की भूमिका के बारे में भी पूछताछ की गई।