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कुकरैल में 17 नालों का गंदा पानी गिरने से रोकने के लिए 50 करोड़ से बनेगी 11 किमी लंबी ड्रेन
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लखनऊ। कुकरैल को पुराना स्वरूप देने की कवायद के बीच अब उसमें गिरने वाले नालों को रोका जाएगा। इसके लिए कुकरैल के दोनों तटों पर 50 करोड़ से इंटरसेप्टिंग ड्रेन बनाई जाएगी। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शहर में पिकनिक स्पॉट से फैजाबाद रोड और फिर वहां से पेपर मिल तक आने वाले कुकरैल नाले का स्वरूप पहले नहर का था। यह बख्शी का तालाब क्षेत्र के अस्ति गांव से निकलती थी और पिकनिक स्पॉट होते हुए पेपर मिल कॉलोनी तक जाती थी। इसमें गंदे पानी और सीवर की जगह नदी का साफ पानी बहता था। यह पानी जलकल तक भेजा जाता था, जिसे पीने के लिए सप्लाई किया जाता था। अब फिर वही स्वरूप लाने की तैयारी है। इसके लिए नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन गंभीर हैं। उनके निर्देश पर ही सबसे पहले कुकरैल में गिरने वाले नालाें को रोका जाएगा। इसके लिए इंटरसेप्टिंग ड्रेन बनाई जाएगी, जिसमें कुकरैल में गिरने वाले नालों को जोड़ा जाएगा। ड्रेन के जरिये नाले के गंदे पानी को लोहिया पथ पर बनने वाले 120 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाएगा।
जल निगम ने शुरू की टेंडर प्रक्रिया
कुकरैल में इस समय छोटे बड़े मिलाकर कुल 17 नालें गिरते हैं। इससे उसका पानी गंदा हो रहा है। इन नालों को रोकने के लिए कुकरैल के दोनों तटों पर 1200 एमएम और 700 एमएम व्यास की इंटरसेप्टिंग ड्रेन बिछाई जाएगी। दोनों तटों को मिलाकर ड्रेन की लंबाई करीब 11 किलोमीटर होगी। इसका काम शुरू होने वाला है। इसके लिए जल निगम ने की टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
अवैध कब्जे भी जाएंगे हटाए
कुकरैल के दोनों तटों पर अतिक्रमण भी है। ऐसे में इंटरसेप्टिंग ड्रेन का काम शुरू करने से पहले वहां से अवैध कब्जे भी प्रशासन हटाएगा। इसकी भी तैयारी शुरू कर दी गई है। बीते साल तटों के सौंदर्यीकरण की इसी योजना के तहत पेपर मिल में कुकरैल के किनारे से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू हुई थी। हालांकि, भारी विवाद के चलते अभियान रोक दिया गया था। प्रशासन इस बार पहले से ही तैयारी कर रहा है ताकि विरोध के कारण काम न रुके।
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बहुत जल्द शुरू होगा काम
जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि इंटरसेप्टिंग ड्रेन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। बहुत जल्द काम शुरू होगा। करीब 11 किलोमीटर क्षेत्र में इंटरसेप्टिंग ड्रेन बिछाई जाएगी। इस पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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जल निगम ने शुरू की टेंडर प्रक्रिया
कुकरैल में इस समय छोटे बड़े मिलाकर कुल 17 नालें गिरते हैं। इससे उसका पानी गंदा हो रहा है। इन नालों को रोकने के लिए कुकरैल के दोनों तटों पर 1200 एमएम और 700 एमएम व्यास की इंटरसेप्टिंग ड्रेन बिछाई जाएगी। दोनों तटों को मिलाकर ड्रेन की लंबाई करीब 11 किलोमीटर होगी। इसका काम शुरू होने वाला है। इसके लिए जल निगम ने की टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
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अवैध कब्जे भी जाएंगे हटाए
कुकरैल के दोनों तटों पर अतिक्रमण भी है। ऐसे में इंटरसेप्टिंग ड्रेन का काम शुरू करने से पहले वहां से अवैध कब्जे भी प्रशासन हटाएगा। इसकी भी तैयारी शुरू कर दी गई है। बीते साल तटों के सौंदर्यीकरण की इसी योजना के तहत पेपर मिल में कुकरैल के किनारे से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू हुई थी। हालांकि, भारी विवाद के चलते अभियान रोक दिया गया था। प्रशासन इस बार पहले से ही तैयारी कर रहा है ताकि विरोध के कारण काम न रुके।
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बहुत जल्द शुरू होगा काम
जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि इंटरसेप्टिंग ड्रेन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। बहुत जल्द काम शुरू होगा। करीब 11 किलोमीटर क्षेत्र में इंटरसेप्टिंग ड्रेन बिछाई जाएगी। इस पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे।