राहत: घरेलू उपभोक्ताओं व किसानों की बिजली दरें बढ़ने के आसार कम, जनता की नाराजगी नहीं चाहती सरकार
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इस साल घरेलू उपभोक्ताओं व किसानों की बिजली दरों में बढ़ोतरी के आसार कम हैं। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार दरों में इजाफा करके शहरी व ग्रामीण उपभोक्ताओं की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहती है। इसके साथ ही निजी शैक्षिक संस्थाओं को भी बिजली दरों में राहत मिलना लगभग तय माना जा रहा है जबकि धार्मिक आयोजनों के लिए अस्थायी कनेक्शन की दरों में भी 50 फीसदी तक कमी हो सकती है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग को भी इसके संकेत दे दिए गए हैं। आयोग नए स्लैब के आधार पर 2020-21 के लिए टैरिफ आर्डर को अंतिम रूप देने में जुटा है। अगले महीने टैरिफ आर्डर जारी होने की संभावना है।
पावर कॉर्पोरेशन की ओर से 2020-21 के लिए दाखिल बिजली दरों के प्रस्ताव पर जनसुनवाई में उपभोक्ता संगठनों व उपभोक्ताओं की ओर से उठाए गए बिंदुओं के परीक्षण के बाद नियामक आयोग नई दरों के निर्धारण में जुटा है।
नवंबर के दूसरे सप्ताह तक टैरिफ जारी करने की कर रहा था तैयारी
भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक सरकार की तरफ आयोग को घरेलू व किसानों की बिजली दरें न बढ़ाने का इशारा कर दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि आयोग नवंबर के दूसरे सप्ताह तक 2020-21 का टैरिफ आर्डर जारी करने की तैयारी कर रहा है।
अगर आयोग पावर कॉर्पोरेशन के नए स्लैब को जस का तस स्वीकार लेता है तो मौजूदा समय में लागू 80 स्लैब घटकर 53 रह जाएंगे। बीपीएल को छोड़ कर शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए तीन, कॉमर्शियल के लिए दो, लघु एवं मध्यम उद्योग के लिए दो स्लैब रखे गए हैं। किसानों, विभागीय कर्मियों और भारी उद्योग के स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।