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फिक्स व मिनिमम गारंटी चार्ज और रेगुलेटरी सरचार्ज हो खत्म, जनसुनवाई में उपभोक्ता संगठनों ने उठाई मांग

Sat, 15 Dec 2018 04:55 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 15 Dec 2018 04:55 AM IST
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Electric Regulatory Commission Public hearing on new electricity rates
प्रतीकात्मक तस्वीर
उपभोक्ता संगठनों ने प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे फिक्स, मिनिमम गांरटी चार्ज व रेगुलेटरी सरचार्ज खत्म करने की मांग की है। राज्य विद्युत नियामक आयोग में 2018-19 के लिए नई बिजली दरों पर जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठनों की तरफ से यह मांग उठाई है।
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साथ ही बिजली दरों में किसी तरह की बढ़ोतरी न किए जाने का सुझाव भी दिया गया। नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की तरफ से दरों में किसी तरह की वृद्धि प्रस्तावित न किए जाने का हवाला देते हुए दरों में बढ़ोतरी न किए जाने के संकेत दिए हैं। 
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नियामक आयोग ने स्वत: संज्ञान कार्यवाही के तहत शुक्रवार को बिजली कंपनियों के वित्तीय वर्ष 2018-19 के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व 2016-17 के ट्रू-अप प्रस्ताव तथा 2017-18 की वार्षिक परफारमेंस पर सार्वजनिक सुनवाई की। 
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सुनवाई में विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं व उपभोक्ता संगठनों की तरफ से दरों में किसी तरह की बढ़ोतरी न किए जाने का सुझाव देते हुए घरेलू उपभोक्ताओं के लिए जा रहे फिक्स चार्ज, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे मिनिमम गारंटी चार्ज व रेगुलेटरी सरचार्ज को पूरी तरह से सप्ताह करने की मांग की।

आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य एसके अग्रवाल व केके शर्मा की मौजूदगी में हुई सुनवाई के दौरान पॉवर कार्पोरेशन की तरफ से बिजली दर पर  एक प्रस्तुतिकरण भी किया गया। 

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सभी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं से लिए जा रहे फिक्स चार्ज, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का मिनिमम गारंटी चार्ज व सभी उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे 4.28 प्रतिशत रेगुलेटरी सरचार्ज को समाप्त करने की मांग की। 

वर्मा ने बिजलीघरों की उत्पादन लागत में 54 पैसे प्रति यूनिट की कमी के आधार पर बिजली दर में भी कमी का अनुरोध किया। वर्मा ने बिजली कंपनियों के लगातार बढ़ रहे घाटे व सुधार के नाम पर की जा रही फिजूलखर्ची पर भी सवाल उठाए। 

परिषद ने निजी बिजली वितरण कंपनियों का सीएजी से ऑडिट कराने के बाद ही उनकी दरों में बढोतरी पर विचार करने तथा सौभाग्य योजना के उपभोक्ताओं के लिए दर की नई श्रेणी बनाकर इसकी दरें 1 से 1.50 रुपये प्रति यूनिट रखने की मांग उठाई। 

सरकारी विभागों पर बकाया है 10,756 करोड़ 

बकाया वसूली के लिए छोटे उपभोक्ताओं से सख्ती और सरकारी विभागों की अनदेखी पर भी उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाया। परिषद ने आयोग को बताया कि सरकारी विभागों पर मार्च तक करीब 10,756 करोड़ बकाया हो गया है, लेकिन उनसे वसूली नहीं की जा रही है। 

इसी तरह बिजली जनित दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या 400 सालाना से बढ़कर 958 हो गई है। इसे रोकने के नाम पर भी करोड़ों रुपये खर्च हो चुके पर आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। मध्यांचल वितरण निगम के एमडी संजय गोयल ने बताया कि सरकारी विभागों से बकाया वसूली के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। 

बिजली चोरी रोकने को लेकर भी आए सुझाव

सुनवाई के दौरान ज्यादातर उपभोक्ताओं द्वारा बिजली चोरी पर प्रभावी अंकुश की मांग उठाई गई। उपभोक्ताओं का कहना था कि बिजली चोरी रोकने के  लिए बिजली कंपनियां गंभीर नहीं हैं। उपभोक्ताओं ने आयोग को कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया।  

बिजली कर्मियों के घरों पर भी लगे मीटर
सुनवाई के दौरान पीएन कल्कि, राकेश गोयल, बीएन गुप्ता आदि ने जहां बिजली अधिकारियों व कर्मचारियों के घरों में भी मीटर लगाने के बाद ही एनर्जी अकाउंटिंग का सुझाव रखा, वहीं उद्योग व अन्य संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों शिवाकांत त्रिपाठी रमाशंकर अवस्थी, अवधेश अग्रवाल व आलोक कुमार आदि ने रेगुलेटरी सरचार्ज समाप्त करने तथा उद्योगों के बिजली दरें कम करने पर जोर दिया। प्रखर कुलश्रेष्ठ व रचित अग्रवाल ने नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया के सरलीकरण समेत समेत कई बिंदुओं पर सुझाव रखे।

ट्रांसमिशन कार्पोरेशन के कनिष्ठ अफसरों को दिखाया बाहर का रास्ता

जनसुनवाई में पॉवर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन के निदेशक समेत किसी वरिष्ठ अधिकारी के मौजूद न रहने पर आयोग ने कड़ी फटकार लगाई। सदस्य एसके अग्रवाल ने सुनवाई में शामिल होने के लिए पहुंचे कनिष्ठ अधिकारियों की तरफ से संतोषजनक जवाब न मिलने पर नाराजगी जताते हुए उन्हें सभागार से बाहर जाने का फरमान सुना दिया।

बिजली दरें न बढ़ाने के संकेत
जनसुनवाई के अंत में नियामक आयोग अध्यक्ष आरपी सिंह ने आश्वस्त किया कि उपभोक्ता परिषद व अन्य उपभोक्ताओं द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर ही नए टैरिफ पर विचार किया जाएगा। यही नहीं उन्होंने बिजली कंपनियों की तरफ से दरों में बढ़ोतरी के संबंध में टैरिफ प्रस्ताव दाखिल न किए जाने की बात कहते हुए दरें न बढ़ाने के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि आयोग सभी पहलुओं और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए दरों का निर्धारण करेगा।

 
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