{"_id":"5daf60778ebc3e93b434703e","slug":"educational-institutions-with-a-grade-will-guide-5-other-institutes-lucknow-news-lko488429274","type":"story","status":"publish","title_hn":"ए ग्रेड पाने वाले संस्थान बनेंगे पांच संस्थान के मार्गदर्शक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ए ग्रेड पाने वाले संस्थान बनेंगे पांच संस्थान के मार्गदर्शक
विज्ञापन
ए ग्रेड वाले संस्थान बनेंगे पांच संस्थाओं के मार्गदर्शक
यूजीसी चेयरमैन ने दी जानकारी, मार्गदर्शन करने वाली संस्था को मिलेंगे 30 लाख रुपये
नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रेडिएशन काउंसिल (नैक) में ए ग्रेड पाने वाले संस्थानों को अब पांच अन्य संस्थानों की नैक ग्रेडिंग कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी। उन पर जिम्मेदारी होगी कि वे न सिर्फ संस्थानों की मदद करें बल्कि उन्हें इसके लिए तैयार भी करें। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) इस काम के लिए ए ग्रेड पाने वाले संस्थान को 30 लाख रुपये भी देगा। यूजीसी के चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह ने मंगलवार को यह जानकारी दी। वे लखनऊ विश्वविद्यालय में दीक्षारंभ कार्यशाला का शुभारंभ करने आए हुए थे।
प्रो. सिंह ने कहा कि संस्थान का पूरी तरह से आंकलन करने के लिए नैक बहुत जरूरी है। जिन संस्थानों ने ए ग्रेड पा लिया है वे अन्य संस्थानों की मदद कर सकते हैं। इसलिए यह योजना लाई जा रही है। इन संस्थानों की सहायता से अब तक ग्रेडिंग न करा पाने वाले संस्थान भी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि नैक ग्रेडिंग कराने वाले संस्थानों को उनकी ग्रेडिंग के आधार पर तीन भागों में बांटा जाएगा। इसी ग्रेडिंग के आधार पर उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी। संस्थानों को चाहिए कि वे नैक की ग्रेडिंग जरूर कराएं। नैक की बेहतर ग्रेेडिंग वाले संस्थानों में पढ़ाई के लिए भी बेहतर मौके उपलब्ध होंगे।
आर्थिक सहायता के लिए लविवि तैयार करे प्रस्ताव
प्रो. डीपी सिंह ने 100वें साल में प्रवेश करने जा रहे विश्वविद्यालय को आर्थिक सहायता के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। उनके अनुसार यूजीसी की ओर से 100 साल पूरे करने वाले विवि को 100 करोड़ रुपये देने की योजना समाप्त हो चुकी है। इसलिए अब यही चारा है कि लविवि अपने स्तर से विशेष प्रस्ताव तैयार करे। लविवि 25 नवंबर को 100वें साल में प्रवेश कर जाएगा। अन्य विवि को भी उन्होंने यूजीसी के बजाय अन्य विभागों से मदद के लिए प्रस्ताव देने को कहा। उनके अनुसार अभी यूजीसी ही उच्च शिक्षण संस्थानों को आर्थिक मदद दिया करती थी। अब राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के साथ ही कई मंत्रालय उच्च शिक्षण संस्थानों को आर्थिक मदद दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
यूजीसी चेयरमैन ने दी जानकारी, मार्गदर्शन करने वाली संस्था को मिलेंगे 30 लाख रुपये
नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रेडिएशन काउंसिल (नैक) में ए ग्रेड पाने वाले संस्थानों को अब पांच अन्य संस्थानों की नैक ग्रेडिंग कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी। उन पर जिम्मेदारी होगी कि वे न सिर्फ संस्थानों की मदद करें बल्कि उन्हें इसके लिए तैयार भी करें। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) इस काम के लिए ए ग्रेड पाने वाले संस्थान को 30 लाख रुपये भी देगा। यूजीसी के चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह ने मंगलवार को यह जानकारी दी। वे लखनऊ विश्वविद्यालय में दीक्षारंभ कार्यशाला का शुभारंभ करने आए हुए थे।
प्रो. सिंह ने कहा कि संस्थान का पूरी तरह से आंकलन करने के लिए नैक बहुत जरूरी है। जिन संस्थानों ने ए ग्रेड पा लिया है वे अन्य संस्थानों की मदद कर सकते हैं। इसलिए यह योजना लाई जा रही है। इन संस्थानों की सहायता से अब तक ग्रेडिंग न करा पाने वाले संस्थान भी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि नैक ग्रेडिंग कराने वाले संस्थानों को उनकी ग्रेडिंग के आधार पर तीन भागों में बांटा जाएगा। इसी ग्रेडिंग के आधार पर उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी। संस्थानों को चाहिए कि वे नैक की ग्रेडिंग जरूर कराएं। नैक की बेहतर ग्रेेडिंग वाले संस्थानों में पढ़ाई के लिए भी बेहतर मौके उपलब्ध होंगे।
विज्ञापन
आर्थिक सहायता के लिए लविवि तैयार करे प्रस्ताव
प्रो. डीपी सिंह ने 100वें साल में प्रवेश करने जा रहे विश्वविद्यालय को आर्थिक सहायता के लिए अलग से प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। उनके अनुसार यूजीसी की ओर से 100 साल पूरे करने वाले विवि को 100 करोड़ रुपये देने की योजना समाप्त हो चुकी है। इसलिए अब यही चारा है कि लविवि अपने स्तर से विशेष प्रस्ताव तैयार करे। लविवि 25 नवंबर को 100वें साल में प्रवेश कर जाएगा। अन्य विवि को भी उन्होंने यूजीसी के बजाय अन्य विभागों से मदद के लिए प्रस्ताव देने को कहा। उनके अनुसार अभी यूजीसी ही उच्च शिक्षण संस्थानों को आर्थिक मदद दिया करती थी। अब राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के साथ ही कई मंत्रालय उच्च शिक्षण संस्थानों को आर्थिक मदद दे रहे हैं।
विज्ञापन