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खुलासाः फीस रिफंड में हुई जमकर मनमानी

Thu, 30 Oct 2014 03:44 PM IST
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ।
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ। Updated Thu, 30 Oct 2014 03:44 PM IST
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educational institute refund different fees to students.

प्रदेश में विद्यार्थियों की फीस की भरपाई में भारी अनियमितता सामने आई है। जिला स्तर के अधिकारियों और शिक्षण संस्थानों की मिलीभगत से एक ही संस्थान में एक ही पाठ्यक्रम के लिए विद्यार्थियों के खातों में अलग-अलग धनराशि भेज दी गई।

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शिकायत मिलने पर मुख्य सचिव ने इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए निदेशक (समाज कल्याण) की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच का फैसला भी किया गया है।
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शासन को शिकायत मिली थी कि एक ही संस्थान में एक ही पाठ्यक्रम के लिए सामान्य, पिछड़े, अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को शुल्क की प्रतिपूर्ति अलग-अलग की जा रही है।
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जबकि शुल्क निर्धारित करने वाली ‘प्रवेश और फीस नियमन समिति’ फीस तय करने में जाति या वर्ग को आधार नहीं बनाती।

सामान्य और अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को समाज कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग शुल्क की प्रतिपूर्ति करता है।

संस्‍थान और अधिकारियों की मिलीभगत

educational institute refund different fees to students.

जांच कराने पर शिकायत सही मिली। यही नहीं, सभी जिलों में इस तरह के केस मिले। इनकी संख्या लाखों में बताई जा रही है।

पता चला कि जिला समाज कल्याण अधिकारी, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मास्टर डाटा में एक ही संस्थान में एक ही पाठ्यक्रम की अलग-अलग धनराशि फीड करवा दी। इसलिए यह गड़बड़ हो गई।

इसमें संस्थान और जिलास्तरीय अधिकारियों की मिलीभगत बताई जा रही है।

इस तरह की अनियमितताओं पर फौरन काबू पाने के लिए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने निदेशक समाज कल्याण की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक या उनकी ओर से नामित सदस्य कमेटी में होंगे। कमेटी से कहा गया है कि सत्र 2014-15 में किसी भी हालत में ऐसी मनमानी न हो सके।

संबंधित विभागों के सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को बुलाकर संस्थानवार निर्धारित फीस की जांच कर ली जाए। कमेटी को 30 नवंबर तक प्रमुख सचिव समाज कल्याण को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

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