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प्रवर्तन निदेशालय ने रिवर फ्रंट व अवैध खनन मामले में तेज की जांच, आठ को समन

Mon, 03 Jun 2019 10:17 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 03 Jun 2019 10:17 PM IST
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ed speeds up investigation in in river front and illicit mining scams
गोमती रिवर फ्रंट - फोटो : amar ujala
रिवर फ्रंट घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने आठ अधिकारियों व ठेकेदारों को समन जारी किए हैं। जनवरी में इन सभी के लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद (हरियाणा) और भिवाड़ी (राजस्थान) में नौ स्थानों पर छापामारी कर कई दस्तावेज और सामग्री जब्त की गई थी। 
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इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पूछताछ के लिए अधिकारियों व ठेकेदारों को बुलाया जा रहा है। उधर, अवैध खनन से जुड़े मामले में भी निदेशालय ने निजी सचिव और बाबू स्तर के अधिकारियों को पूछताछ के लिए इसी महीने के अंत तक बुलाया है।      
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प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों का कहना है कि रिवर फ्रंट में कई ऐसी कंपनियों को काम दिया गया जिनका सिंचाई विभाग में पंजीयन ही नहीं था। इस संबंध में निदेशालय ने पिछले वर्ष एफआईआर दर्ज की थी। इसमें सीबीआई की एफआईआर को आधार बनाकर तत्कालीन मुख्य अभियंता गुलेश चंद्र, एस एन शर्मा, काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शिव मंगल यादव, अखिल रमन, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव और कार्यकारी अभियंता सुरेंद्र यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इनमें गुलेश चंद्र, शिव मंगल यादव, अखिल रमन और रूप सिंह यादव सेवानिवृत्त हो चुके हैं। निदेशालय इन अधिकारियों से पूर्व में पूछताछ कर चुका है।
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यह है मामला 

प्रदेश में वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद योगी सरकार ने अखिलेश सरकार के निर्माण कार्यों की जांच शुरू की थी। इसी कड़ी में गोमती रिवर फ्रंट की जांच के लिए आलोक सिंह के नेतृत्व में एक जांच कमेटी बनी थी। प्रथम दृष्टया परियोजना में गड़बड़ी की बात कहकर गोमतीनगर थाने में 19 जून 2017 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। 

जुलाई में जांच सीबीआई को दी गई। 30 नवंबर 2017 को सीबीआई ने अधिशासी अभियंता, लखनऊ खंड शारदा कैनाल की तहरीर पर आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 34 भ्रष्टाचार निवारण की धारा 7 और 13 के तहत केस दर्ज किया था तभी प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले वर्ष सितंबर में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

यह कंपनियां हैं जांच के दायरे में 

प्रवर्तन निदेशालय की एफआईआर में गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी, भ्रष्टाचार और सरकारी पद के दुरुपयोग का आरोप था। जांच में पता चला कि अयोग्य कंपनियों और कुछ ब्लैक लिस्टेड कंपनियों को ठेका दिया गया। ठेके में कुछ ऐसी भी कंपनियां शामिल थीं, जिन्हें ठेके से ज्यादा भुगतान किया गया। 

इनमें गैमन इंडिया, केके स्पून पाइप प्राइवेट लिमिटेड, रिशु कंस्ट्रक्शन, हाईटेक कम्पेटेंट बिल्डिर्स प्राइवेट लिमिटेड और तराई कंस्ट्रक्शन के नाम शामिल हैं। इन सभी कंपनियों को बीते सितंबर महीने में प्रवर्तन निदेशालय ने नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके अलावा कुछ और प्राइवेट लोगों के खिलाफ भी प्रवर्तन निदेशालय आगे की कार्रवाई करेगा।

अवैध खनन से जुड़े मामले में 10 अफसर तलब 

अवैध खनन घोटाले में भी प्रवर्तन निदेशालय ने 10 लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। साथ ही सरकार से कुछ दस्तावेज भी मांगे हैं जिसमें हमीरपुर में डीएम रहीं बी चंद्रकला और सरकार के बीच पत्राचार का ब्यौरा भी शामिल है। सूत्रों का कहना है कि  फिलहाल बी चंद्रकला से दोबारा पूछताछ नहीं होगी।

मालूम हो कि निदेशालय ने 2012 से लेकर 2016 के बीच हमीरपुर में खनन से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर में पूर्व डीएम आईएएस बी चंद्रकला समेत 11 लोगों को नामजद किया था। इन सभी के नाम सीबीआई की 3 जनवरी को दर्ज एफआईआर में भी थे। 

इनमें बी चंद्रकला, तत्कालीन खनन अधिकारी मोइनुद्दीन, माइनिंग क्लर्क राम आसरे प्रजापति, पट्टाधारी दिनेश कुमार मिश्रा, संजय दीक्षित, सत्यदेव दीक्षित, रामअवतार सिंह, करन सिंह और आदिल खान हैं। अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 483 और 420 के अलावा प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट की धारा 13 के तहत केस दर्ज है। 

इस मामले में निदेशालय ने बी चंद्रकला समेत सभी आरोपियों से लंबी पूछताछ की थी। अब दूसरी पंक्ति के अधिकारियों से पूछताछ होगी। पट्टों के आवंटन में हुए खेल को लेकर भी कुछ अधिकारियों का रोल सामने आया है। पूछताछ संभवत: 10 जून से महीने के अंत तक  हो सकती है। 
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