बेहद आसानी से यूपी डीजीपी तक का ई-मेल हैक कर रहे हैकर्स
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देश भर के लिए बने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के तहत यूपी के पुलिस अफसरों को दिए गए इंट्रानेट ई-मेल अकाउंट महफूज नहीं हैं। थाना प्रभारी से लेकर डीजीपी तक के ई-मेल अकाउंट आसानी से हैक किए जा सकते हैं।
अमर उजाला ने इस सिस्टम में मौजूद खामियों को उजागर करने के उद्देश्य से साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की मदद से इन्हें खोला तो पाया कि हैकिंग की थोड़ी-बहुत समझ रखने वालों के लिए ऐसा करना मुश्किल नहीं है।
हैकर सीनियर पुलिस अफसर बनकर न केवल मातहत अधिकारियों को अहम आदेश दे सकता है, बल्कि कई अन्य तरह से भी पुलिस विभाग को नुकसान पहुंचा सकता है।
इसलिए आसान है हैकिंग
इंट्रानेट पर बने ई-मेल आईडी पर यूजर नेम के स्थान पर पुलिस अफसरों के सीयूजी नंबर का इस्तेमाल किया गया है। यानी किसी भी पुलिस अफसर का ई-मेल एड्रेस जानना बेहद आसान है। यह इंट्रानेट नेशनल इंफॉमेटिक्स सेंटर के सर्वर पर चलाए जा रहे हैं।
...और खुल गया ई-मेल
जानिए क्या है सीसीटीएनएस सिस्टम
क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम को 2009 में लॉन्च किया गया। इसके लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसी साल बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
ऐसे काम करता है एसक्यूएल
एसक्यूएल इंजेक्शन ऐसा कोड है जिसे डाटा से चलने वाली किसी एप्लीकेशन पर हमला करने में इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान गलत एसक्यूएल को एंट्री फील्ड में डाला जाता है। यानी जब ईमेल का पासवर्ड पूछा जाता वहां इसका उपयोग करते हुए नकली पहचान तैयार की जाती है, इसे सर्वर सही मानते हुए ई-मेल खोल देता है।
अपडेट नहीं तो कैसे वेबसाइट को खतरों से बचाएंगे
साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट नितनेम सिंह बताते हैं कि पुलिस में प्रोग्रामिंग पढ़ चुके बीटेक पास युवाओं को भर्ती करने के बाद ई-मेल भेजने जैसे कामों तक सीमित रखा जा रहा है, जिससे वो खुद को अपडेट नहीं कर पा रहे हैं। जब उनसे वेबसाइट बनवाई जाती है तो वे इसके लिए मौजूद खतरों को समझ नहीं पाते और यह हैकर्स का काम आसान कर देते हैं।
पुराने सर्वर का इस्तेमाल
दूसरी बड़ी वजह पुराने सर्वरों का उपयोग होना है। जब तक सर्वर अपडेट नहीं किए जाएंगे सुरक्षा खतरे में ही रहेगी।
कमजोरियां तो हैं, लेकिन...
दूसरी ओर एक अन्य साइबर सिक्युरिटी विशेषज्ञ मयंक खरे कहते हैं पुलिस के ईमेल ही नहीं कई अन्य सरकारी वेबसाइट्स में भी इस तरह की कमजोरियां मौजूद हैं। लेकिन बिना आधिकारिक अनुमति के इनका सोशल ऑडिट करना ठीक नहीं है। वे बताते हैं कि इससे गोपनीयता भंग होने का खतरा बना रहता है।
ई-मेल ओपन होने के खतरे
- गोपनीय सूचनाएं आसानी से लीक हो सकती हैं।
- वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बनकर उनके मातहतों को कोई भी निर्देश दिया जा सकता है जो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचा सकता है, मसलन किसी को हिरासत में लेना या पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाना।
- वरिष्ठ अधिकारी के ईमेल से बड़े स्तर पर पुलिस विभाग में ईमेल भेजकर भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा सकती हैं।
- गलत आदेश प्रसारित किए जा सकते हैं। आतंकियों से लेकर अपराधी तक इनका उपयोग पुलिस विभाग में अराजकता फैलाने में उपयोग कर सकते हैं।
- संवेदनशील मौकों पर पुलिस अधिकारियों के ईमेल का उपयोग हालात को बिगाड़ने में हो सकता है।